दीदी का किला ढहा ! महाराष्ट्र के ‘शिवसेना मॉडल’ पर TMC में बड़ी बगावत

The CSR Journal Magazine

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुली जंग, 59 विधायकों के बाद अब संसद में बगावत की तैयारी! 18 सांसद देंगे ममता को बड़ा झटका!

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है, जहां पार्टी के 18 से 20 लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के बागी गुट के संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही हैं। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक फैले इस राजनीतिक भूचाल ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को सीधे तौर पर चुनौती दे दी है। यह पूरा घटनाक्रम महाराष्ट्र के ‘शिवसेना मॉडल’ की तर्ज पर आगे बढ़ रहा है, जिसने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सत्ता के समीकरणों को हिला दिया है।

कोलकाता से दिल्ली तक का राजनीतिक भूचाल

टीएमसी में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल मच रही है। विधायकों के बाद अब लोकसभा सांसद भी नई पार्टी बनाने की ओर अग्रसर हैं। इसके पीछे अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगियों के व्यवहार को जिम्मेदार माना जा रहा है। जहां विधायकों की बगावत की खबरें आ रही थीं, वहीं अब सांसदों के बीच भी असंतोष देखने को मिल रहा है।

नए ग्रुप की संभावना

जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों में टीएमसी के सांसदों का नया ग्रुप बन सकता है। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 से अधिक टीएमसी सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिलने और पार्टी हाईकमांड के खिलाफ एक अलग गुट बनाने की योजना बना रहे हैं। टीएमसी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी बयान दिया है कि पार्टी के अधिकांश सांसद कभी भी बगावत कर सकते हैं। यह ग्रुप एक वरिष्ठ सांसद के नेतृत्व में बनेगा, जो लंबे समय से पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इस नए ग्रुप के गठन से टीएमसी की स्थिति में और अस्थिरता आ सकती है।

विधायक दल में बड़ी टूट

सांसदों से पहले विधानसभा में खेला हो चुका है। निलंबित और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 59 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष रतींद्रनाथ बोस को पत्र सौंपा। स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दे दी है, जिसे ममता बनर्जी के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। बागी धड़े के पास दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन होने के कारण, उन्होंने दलबदल विरोधी कानून से बचते हुए खुद को ही ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ घोषित कर दिया है और पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न (जोड़ा फूल) पर दावा ठोकने की तैयारी में हैं।

अभिषेक बनर्जी का विवादित व्यवहार

बगावत का मुख्य कारण पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनके करीबियों का रवैया बताया जा रहा है। बागी नेताओं का आरोप है कि वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया गया और संगठन में लोकतंत्र खत्म हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगियों द्वारा वरिष्ठ सांसदों से सही व्यवहार न रखने के कारण यह बगावत हो रही है। कई सांसद पहले से ही बीजेपी के संपर्क में हैं। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि चुनाव परिणामों के बाद से स्थिति अधिक गंभीर हो गई है।

टीएमसी की संख्या और वफादारी

टीएमसी के लोकसभा में 28 सांसद हैं, लेकिन पार्टी के राज्यसभा दल में कोई बगावत की आशंका नहीं है। इसकी वजह यह है कि अधिकांश राज्यसभा सांसद ममता बनर्जी के प्रति वफादार हैं। वे पार्टी के खिलाफ जाने की सोच भी नहीं रहे हैं। राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसद हैं, जो पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता प्रकट कर रहे हैं।

ममता बनर्जी और हाईकमांड का पलटवार

संकट को बढ़ता देख टीएमसी नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल में पार्टी की सभी संगठनात्मक कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है ताकि नए सिरे से समीक्षा की जा सके। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि उनके विधायकों को बैठकों में शामिल न होने के लिए धमकियां दी जा रही हैं और केंद्रीय एजेंसियों तथा पुलिस के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। ममता ने तंज कसते हुए कहा कि कई नेता सालों तक सत्ता का सुख भोगने के बाद अब अपने निजी स्वार्थ के लिए भाजपा के संपर्क में जा रहे हैं।

राष्ट्रीय राजनीति पर असर

यह बगावत सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है। यदि संसद (लोकसभा और राज्यसभा) में भी यह टूट आधिकारिक रूप से हो जाती है, तो ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन को दिल्ली में बड़ा नुकसान होगा, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस विपक्षी गठबंधन के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है।

दिल्ली की ओर कदम बढ़ाते सांसद

आगामी दिनों में इन 18 सांसदों का दिल्ली आना भी तय है। यह यात्रा और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठ सकते हैं। यदि यह नए ग्रुप का गठन सफल होता है, तो टीएमसी की राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है।

राजनीति में उथल-पुथल का माहौल

टीएमसी के भीतर चल रही यह उथल-पुथल पार्टी के भविष्य के लिए चुनौती बन सकती है। इस राजनीतिक धरातल पर आने वाले समय में ममता बनर्जी को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। सांसदों का नया ग्रुप संगठनात्मक शक्ति को कमजोर कर सकता है और पार्टी की साख पर भी प्रश्नचिन्ह लगा सकता है।

क्या होगा टीएमसी का अगला कदम?

टीएमसी में चल रही खींचतान आगे जाकर किस रूप में उभरती है, यह देखना दिलचस्प रहेगा। क्या ममता बनर्जी इसे संभाल पाएंगी, या भाजपा का दबदबा बढ़ता जाएगा? राजनीतिक दृष्टि से यह एक अहम मोड़ साबित होने के लिए तैयार है।

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