बेड़ियों में कैद जिंदगी जोधपुर में मानसिक बीमार युवक 12 साल से जंजीरों में बंधा

The CSR Journal Magazine
Jodhpur के हरियाढाणा क्षेत्र में मानसिक रूप से अस्वस्थ 36 वर्षीय लक्ष्मण राम मेघवाल पिछले 10-12 वर्षों से जंजीरों में बंधा जीवन जी रहा है। परिवार आर्थिक तंगी और सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहा है। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी व्यवस्थाओं की कमजोर स्थिति को उजागर करता है।

इलाज और सहारे के अभाव में परिवार की मजबूरी बना बंधन

Rajasthan Jodhpur जिले के हरियाढाणा क्षेत्र में 36 वर्षीय लक्ष्मण राम मेघवाल पिछले कई वर्षों से मानसिक बीमारी के कारण जंजीरों में बंधा जीवन जीने को मजबूर है। परिवार आर्थिक तंगी और इलाज की कमी के चलते उसे सुरक्षित रखने के लिए बांधकर रखने की बात कह रहा है। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर स्थिति और सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

कभी सामान्य जिंदगी जीता था लक्ष्मण, अब कमरा ही दुनिया

हरियाढाणा से पटेल नगर जाने वाले रास्ते पर स्थित एक साधारण घर में लक्ष्मण राम मेघवाल की जिंदगी अब एक छोटे कमरे और लोहे की जंजीरों तक सीमित होकर रह गई है। परिवार के अनुसार करीब 10 से 12 साल पहले उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी थी। शुरुआत में परिवार ने घरेलू स्तर पर इलाज और देखभाल की कोशिश की, लेकिन समय के साथ उसका व्यवहार अनियंत्रित होता गया। परिजनों का कहना है कि जब भी लक्ष्मण को बेड़ियों से मुक्त किया जाता है, वह आसपास के घरों और राहगीरों पर पत्थर फेंकने लगता है। कई बार गांव में विवाद और दुर्घटना जैसी स्थिति बनने लगी, जिसके बाद मजबूरी में परिवार ने उसे बांधकर रखना शुरू कर दिया। गांव के लोगों के अनुसार लक्ष्मण पहले सामान्य लोगों की तरह गांव में घूमता-फिरता था, लेकिन बीमारी ने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी।

वृद्ध मां और मजदूर भाई पर जिम्मेदारी का बोझ

लक्ष्मण की देखभाल की जिम्मेदारी उसकी 74 वर्षीय मां गुड्डी देवी और छोटे भाई चंद्रु पर है। परिवार बेहद गरीब स्थिति में जीवन गुजार रहा है। वृद्ध मां मजदूरी और वृद्धावस्था पेंशन के सहारे घर चला रही हैं, जबकि छोटा भाई दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का खर्च उठाता है। परिवार का मकान भी जर्जर हालत में है और आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि निजी अस्पताल में इलाज करवाना संभव नहीं हो पा रहा। गुड्डी देवी का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। परिवार के अनुसार एक बार स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन सीमित कार्रवाई के बाद मामला फिर अधूरा रह गया।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को भी उजागर करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार मानसिक रोगियों को सम्मानजनक जीवन, उचित इलाज और पुनर्वास मिलना उनका अधिकार है। लंबे समय तक किसी मानसिक रोगी को जंजीरों में बांधकर रखना मानवाधिकारों के खिलाफ माना जाता है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवार मानसिक रोगियों के इलाज और देखभाल के लिए संसाधनों के अभाव से जूझ रहे हैं। 43 डिग्री तापमान में जंजीरों में बंधा लक्ष्मण राम मेघवाल आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को जल्द हस्तक्षेप कर लक्ष्मण का उचित इलाज और पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि उसे भी सम्मानजनक जीवन मिल सके।

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