रियल एस्टेट में निवेश से पहले इन 7 दस्तावेजों की बारीकी से करें पड़ताल

The CSR Journal Magazine

घर खरीदने जा रहे हैं? ये 7 प्रॉपर्टी पेपर्स न करना भूलें, वरना उठाना पड़ सकता है भारी जोखिम

अपना घर होना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई जोड़कर, कई बार तो प्रोविडेंट फंड (PF) निकालकर और भारी-भरकम होम लोन लेकर लोग एक अदद आशियाने का बंदोबस्त करते हैं। लेकिन रियल एस्टेट बाजार में जितनी तेजी से नई प्रॉपर्टीज बन रही हैं, उतनी ही तेजी से धोखाधड़ी और कानूनी विवादों के मामले भी सामने आ रहे हैं। कई बार लोग जल्दबाजी में, या बिल्डर और ब्रोकर के झांसे में आकर, बिना पूरी कागजी पड़ताल किए मकान या फ्लैट खरीद लेते हैं। नतीजा यह होता है कि जीवन भर की जमा-पूंजी डूब जाती है या फिर अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि आप भी इस साल नया घर, फ्लैट या कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए बेहद जरूरी है।

इन 7 दस्तावेजों का रखें ध्यान

कानूनी जानकारों और रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी प्रॉपर्टी सौदे को फाइनल करने से पहले 7 बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेजों (Property Papers) की जांच करना अनिवार्य है। इन कागजातों में जरा सी भी लापरवाही आपको भविष्य में बेघर कर सकती है या भारी कानूनी व वित्तीय जोखिम में डाल सकती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि वे कौन से 7 पेपर्स हैं जिन्हें चेक करना आपको कभी नहीं भूलना चाहिए।

सेल डीड (Sale Deed) या टाइटल डीड (Title Deed)

यह किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त का सबसे बुनियादी और सबसे महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है। सेल डीड इस बात का पुख्ता सबूत होती है कि प्रॉपर्टी कानूनी रूप से विक्रेता (Seller) से खरीदार (Buyer) के नाम ट्रांसफर हो चुकी है। सेल डीड से ही प्रॉपर्टी के मालिकाना हक (Ownership Title) का पता चलता है। घर खरीदने से पहले विक्रेता से उसकी ओरिजिनल सेल डीड मांगें। यह देखें कि प्रॉपर्टी का मालिकाना हक पूरी तरह साफ (Clear Title) है या नहीं। यदि विक्रेता ने खुद वह घर किसी और से खरीदा था, तो पुरानी सेल डीड की चेन (Chain of Deeds) भी चेक करें। यदि टाइटल डीड स्पष्ट नहीं है, तो भविष्य में कोई भी तीसरा पक्ष आकर उस जमीन या मकान पर अपना दावा ठोक सकता है।

रेरा रजिस्ट्रेशन और अप्रूवल (RERA Registration & Approvals)

साल 2016 में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) कानून आने के बाद से प्रोजेक्ट्स की पारदर्शिता काफी बढ़ गई है। नियमानुसार, 500 वर्ग मीटर से अधिक या 8 अपार्टमेंट वाले हर नए प्रोजेक्ट का रेरा में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर इस बात की गारंटी देता है कि बिल्डर कानूनी दायरे में काम कर रहा है। बिल्डर के दावों पर भरोसा करने के बजाय संबंधित राज्य की रेरा वेबसाइट पर जाएं। वहां प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर स्टेटस चेक करें। इसके अलावा, स्थानीय नगर निगम या विकास प्राधिकरण (जैसे DDA, HUDA, NOIDA आदि) द्वारा जारी ले-आउट प्लान अप्रूवल और बिल्डिंग प्लान अप्रूवल भी देखें। बिना रेरा रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट्स अवैध घोषित हो सकते हैं। उन पर बुलडोजर चलने या काम रुकने का खतरा हमेशा बना रहता है।

नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी (No Objection Certificate – NOC)

एक बड़े आवासीय प्रोजेक्ट को बनाने के लिए बिल्डर को सरकार के विभिन्न विभागों से सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मंजूरी लेनी होती है। इन्हें नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) कहा जाता है। NOC इस बात का प्रमाण है कि इमारत सभी सरकारी मानकों को पूरा करती है। बिल्डर से मुख्य विभागों की एनओसी मांगें, जैसे – फायर विभाग (Fire Safety), प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Environmental Clearance), नागरिक उड्डयन विभाग (यदि एयरपोर्ट के पास हो), और जल एवं बिजली बोर्ड की एनओसी। यदि बिल्डिंग के पास फायर एनओसी नहीं है, तो किसी दुर्घटना की स्थिति में बीमा क्लेम नहीं मिलेगा और सरकारी विभाग बिल्डिंग को सील भी कर सकते हैं।

भारमुक्त प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate – EC)

प्रॉपर्टी के मामले में ‘भारमुक्त’ होने का मतलब है कि उस पर किसी भी प्रकार का बकाया, लोन या कानूनी विवाद नहीं है। इसके लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से भारमुक्त प्रमाण पत्र (EC) जारी किया जाता है। यह सर्टिफिकेट सुनिश्चित करता है कि जिस प्रॉपर्टी को आप खरीद रहे हैं, वह पूरी तरह से बंधक-मुक्त (Free from Mortgages) है। पिछले 13 से 30 वर्षों का ईसी (EC) रिकॉर्ड चेक करें। इससे पता चल जाएगा कि इस अवधि में प्रॉपर्टी को कितनी बार बेचा गया, या इस पर कोई बैंक लोन तो नहीं चल रहा है। यदि आप बिना ईसी चेक किए घर खरीदते हैं और उस पर पहले से कोई होम लोन बकाया है, तो बैंक उस घर को जब्त करने का कानूनी अधिकार रखता है। ऐसे में लोन चुकाने की जिम्मेदारी आप पर आ जाएगी।

कंप्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Completion & Occupancy Certificate)

जब कोई प्रोजेक्ट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाता है, तो स्थानीय प्रशासनिक प्राधिकरण उसकी जांच करता है। यदि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ है, तो ‘कंप्लीशन सर्टिफिकेट’ (CC) जारी किया जाता है। इसके बाद, नागरिकों के रहने योग्य होने पर ‘ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट’ (OC) दिया जाता है। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बिना किसी भी नई प्रॉपर्टी में रहना कानूनन अवैध माना जाता है। पजेशन (कब्जा) लेने से पहले बिल्डर से ओसी (OC) की मूल प्रति दिखाने को कहें। OC के बिना आपको पानी, सीवरेज और बिजली का स्थायी कनेक्शन मिलने में भारी परेशानी होगी। कई राज्यों में बिना ओसी वाली इमारतों को अवैध मानकर भारी जुर्माना लगाया जाता है या उन्हें ढहा दिया जाता है।

अलॉटमेंट लेटर और बिल्डर-बायर एग्रीमेंट (Allotment Letter & BBA)

यदि आप किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन (निर्माणाधीन) प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कर रहे हैं, तो टोकन मनी देने के बाद बिल्डर आपको ‘अलॉटमेंट लेटर’ देता है। इसके बाद ‘बिल्डर-बायर एग्रीमेंट’ (BBA) साइन होता है। यह दस्तावेज खरीदार और बिल्डर के बीच के नियमों और शर्तों को तय करता है। एग्रीमेंट की हर एक शर्त को बारीक अक्षरों समेत पढ़ें। इसमें पजेशन की तारीख, देरी होने पर मिलने वाला मुआवजा, कंस्ट्रक्शन लिंक्ड पेमेंट प्लान और सुपर एरिया बनाम कारपेट एरिया की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए। कई बार बिल्डर एग्रीमेंट में एकतरफा शर्तें लिख देते हैं, जिससे प्रोजेक्ट में देरी होने पर भी खरीदार कानूनी रूप से असहाय हो जाता है। RERA के नियमों के अनुसार अब यह एग्रीमेंट मानक प्रारूप में होना चाहिए।

म्यूटेशन सर्टिफिकेट और टैक्स रसीदें (Mutation Certificate & Tax Receipts)

प्रॉपर्टी ट्रांसफर होने के बाद सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (जैसे नगर निगम के खाते) में नए मालिक का नाम दर्ज होना जरूरी है, इसे ‘म्यूटेशन’ या ‘दाखिल-खारिज’ कहते हैं। इसके अलावा पिछले मालिक द्वारा चुकाए गए प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें भी अहम हैं। म्यूटेशन सर्टिफिकेट इस बात का सरकारी प्रमाण है कि अब आप उस क्षेत्र के टैक्स पेयर हैं और प्रॉपर्टी आपके नाम दर्ज है। वहीं टैक्स रसीदें बताती हैं कि प्रॉपर्टी पर कोई सरकारी देनदारी बाकी नहीं है। विक्रेता से पिछले कम से कम 3 साल की प्रॉपर्टी टैक्स रसीदें मांगें। पुरानी प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो देखें कि म्यूटेशन उसके नाम पर है या नहीं। टैक्स बकाया होने पर नगर निगम प्रॉपर्टी को कुर्क कर सकता है। म्यूटेशन न होने पर भविष्य में आपको बिजली-पानी के बिल अपने नाम करवाने या आगे प्रॉपर्टी बेचने में दिक्कत आएगी।

आंख मूंदकर न करें भरोसा

कानूनी और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि प्रॉपर्टी डीलर या बिल्डर के मीठे वचनों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। घर खरीदते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें-
स्वतंत्र कानूनी जांच (Legal Verification): किसी अनुभवी वकील को कुछ फीस देकर इन सभी दस्तावेजों की सत्यता की जांच (Title Search Report) जरूर करवाएं।
बैंक लोन का सहारा लें: भले ही आपके पास पूरा कैश मौजूद हो, फिर भी प्रॉपर्टी पर छोटा ही सही, बैंक लोन जरूर लें। बैंक का लीगल और टेक्निकल विभाग लोन देने से पहले प्रॉपर्टी के सभी कागजातों की बेहद कड़ाई से जांच करता है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है।
कारपेट एरिया की जांच: सुपर बिल्ट-अप एरिया के झांसे में न आएं। वास्तविक रूप से आपको मिलने वाली जगह (Carpet Area) के आधार पर ही कीमत का आकलन करें।
जल्दबाजी और अज्ञानता रियल एस्टेट में सबसे बड़े नुकसान की वजह बनती है। नया घर खरीदने की खुशी में कागजी औपचारिकता को बोझ न समझें। ऊपर बताए गए 7 पेपर्स की बारीकी से जांच करके ही अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करें, ताकि आपका सपनों का घर आपके और आपके परिवार के लिए सुरक्षित और खुशहाल आशियाना साबित हो सके।

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