भारत में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा में आई कमी , लेकिन ग्रामीण इलाकों में शादीशुदा महिलाओं की जिंदगी दुश्वार

The CSR Journal Magazine
महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामले मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अपने पार्टनर द्वारा अधिक प्रताड़ित की जाती हैं। यह स्थिति खासतौर पर तब गंभीर हो जाती है जब ये महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करती हैं। आंकड़ों के अनुसार, शहरों की तुलना में गांवों में हिंसा के मामलों की संख्या अधिक है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

पार्टनर से हिंसा की चौंकाने वाली घटनाएं

गांवों में रहने वाली महिलाओं के लिए सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी ही नहीं, बल्कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी उनके पार्टनर से हिंसा झेलना एक सामान्य सी बात हो गई है। खासकर 18 से 29 साल की उम्र की महिलाओं में यौन हिंसा के मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है। साल 2021 की तुलना में घरेलू हिंसा के मामलों में 6.9 फीसदी की गिरावट आई है, फिर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

दक्षिण भारत में हिंसा की बढ़ती घटनाएं

NFHS-6 के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण भारत के कई राज्यों में महिलाओं के साथ हिंसा का स्तर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, कई राज्यों में घरेलू हिंसा के मामले कम होते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन केरल, मिजोरम और गोवा जैसे स्थानों पर यह स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।

राज्यों में भिन्नता की स्थिति

दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और उत्तराखंड जैसे राज्यों में शहरों की महिलाओं को गांवों की महिलाओं के मुकाबले अधिक हिंसा झेलनी पड़ती है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी महिलाओं को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

सबसे ज्यादा हिंसा वाले राज्य

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे से पता चलता है कि बिहार इस मामले में सबसे आगे है, जहां 36.1% महिलाएं हिंसा का शिकार हैं। तेलंगाना में 30.8%, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में 28.5%, जबकि झारखंड में 27% और आंध्र प्रदेश में 22.7% महिलाएं ऐसे मामलों से प्रभावित हैं। ये आंकड़े राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर हैं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को और बढ़ाते हैं।

छोटी उम्र में हिंसा का सामना

नियमित शारीरिक हिंसा के अलावा, ग्रामीण इलाकों में छोटी उम्र की लड़कियां भी हिंसा की शिकार बन रही हैं। कई मामलों में उन्हें 18 साल की उम्र तक यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है, जो कि समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

क्षेत्र के अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान

हालांकि कई राज्यों में हिंसा के मामलों में कमी आई है, लेकिन यह समस्या अब भी प्रभावी बनी हुई है। वाराणसी और चंडीगढ़ जैसे कुछ स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा की दरें अपेक्षाकृत कम हैं, जो कि अन्य क्षेत्रों की तुलना में सुरक्षित महसूस कराते हैं।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा की रोकथाम के लिए उपाय

इस गंभीर मुद्दे का समाधान करने के लिए विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों की आवश्यकता है। महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है।

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