बीजेपी का ‘अचूक मॉडल’: नॉर्थ ईस्ट की 9 सीटें अब हैं लक्ष्य

The CSR Journal Magazine
बीजेपी ने अपने संख्याबल को बढ़ाने का एक नया तरीका निकाला है। नए और छोटे दलों को अपने साथ लाने, विपक्ष से टूटने वाले गुटों को जोड़ने और मुद्दा-आधारित समर्थन के जरिए एनडीए की ताकत लगातार बढ़ रही है। संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करना बीजेपी का मुख्य लक्ष्य है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र का ध्यान केंद्र

बीजेपी अपनी राजनीतिक रणनीति में पूर्वोत्तर भारत को प्राथमिकता दे रही है। 25 लोकसभा सीटों में से, एनडीए पहले ही 16 सीटों पर काबिज है। अब बीजेपी की नजर उन क्षेत्रीय दलों पर है जो औपचारिक गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) इसका एक ताजा उदाहरण है। इस पार्टी ने एनडीए को मुद्दा-आधारित समर्थन देने का आश्वासन दिया है।

संख्यात्मक बढ़त का गणित

पूर्वोत्तर की 25 सीटों में से एनडीए के पास 16 हैं, जिनमें से बीजेपी के 13, एजीपी, यूपीपीएल और एसकेएम के पास 1-1 सांसद हैं। वहीं, विपक्ष के पास केवल 9 सीटें हैं, जिनमें कांग्रेस के 7, वीपीपी और ZPM के पास 1-1 सांसद हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी का लक्ष्य विपक्ष की स्थिति को कमजोर करना है।

संख्याबल बढ़ाने के पांच ‘अचूक मॉडल’

बीजेपी की रणनीति केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। पार्टी ने अपनी संख्यात्मक शक्ति को स्थायी बनाने के लिए पांच ‘अचूक मॉडल’ विकसित किए हैं। इसमें प्रत्यक्ष दलबदल, इस्तीफा लेकर राज्यसभा की सीटें रिक्त करवाना, विपक्षी नेताओं को एनडीए में शामिल करना, नए छोटे दलों के जरिए जोड़-तोड़ करना और बागी गुटों को मान्यता देना शामिल है।

एनडीए में आंतरिक बदलाव

बीजेपी की यह नई रणनीति न केवल विपक्ष को प्रभावित कर रही है, बल्कि एनडीए के आंतरिक ढांचे को भी बदल रही है। पिछले आम चुनाव में बीजेपी के पास 240 सीटें थीं, लेकिन अब चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू की स्थिति में बदलाव आया है।

महाराष्ट्र में भी नया मोड़

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के सांसदों का पाला बदलना भी इस खेल का हिस्सा है। शिंदे समूह के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। एनसीपी में भी भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ सांसद आने वाले दिनों में एनडीए को समर्थन दे सकते हैं। विपक्ष के भीतर टूट की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

संख्याबल को दृढ़ करने की कोशिशें

बीजेपी केवल साधारण बहुमत नहीं, बल्कि संसद में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की मंशा रखती है। नए छोटे दलों का साथ और विपक्ष से टूटकर आए गुट इस उद्देश्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एनडीए का संख्याबल अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

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