अमित शाह का ‘360-डिग्री सिक्योरिटी प्लान’: बॉर्डर पर जीरो टॉलरेंस और बुलडोजर एक्शन के आदेश

The CSR Journal Magazine

बॉर्डर सुरक्षा पर केंद्र का सख्त मास्टर प्लान, अमित शाह ने की समीक्षा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए एक व्यापक और सख्त ‘360-डिग्री सिक्योरिटी प्लान’ तैयार किया है। मई 2026 में राजस्थान के बीकानेर (भारत-पाकिस्तान सीमा) के सांचू पोस्ट पर हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में उन्होंने घुसपैठ, ड्रोन तस्करी और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं.

राजस्थान का सुरक्षा मॉडल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बीकानेर में भारत-पाक सीमा की सुरक्षा का जायजा लिया। उन्होंने ‘360 डिग्री सुरक्षा मॉडल’ को लागू करने की योजना बनाई और अवैध निर्माणों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने का निर्देश दिया। इस बैठक में स्थानीय अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और अन्य सुरक्षा बलों ने भाग लिया।

15 किलोमीटर के दायरे में ‘जीरो टॉलरेंस’ और बुलडोजर एक्शन

गृह मंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में होने वाले किसी भी अवैध निर्माण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए। सुरक्षा के लिहाज से संदिग्ध या बिना अनुमति के बने ऐसे सभी ढांचों को तुरंत चिन्हित कर गिराने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम सीमा सुरक्षा के मद्देनजर उठाया गया है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। शाह ने इस तरह के सभी निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

6,000 किमी लंबा ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्रोजेक्ट तकनीकी कवच

पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा पर एक समान ‘स्मार्ट बॉर्डर’ ग्रिड बनाया जा रहा है। अगले एक साल के भीतर इस पूरी सीमा को एंटी-ड्रोन सिस्टम, स्मार्ट रडार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे, सेंसर और नाइट-विज़न उपकरणों से लैस कर दिया जाएगा ताकि बिना फेंसिंग वाले क्षेत्रों में भी रियल-टाइम निगरानी हो सके।

‘चतुर्भुजीय सुरक्षा ग्रिड’

अमित शाह ने जोर दिया कि सीमा सुरक्षा सिर्फ जवानों का काम नहीं है। इसके लिए उन्होंने 4-स्तंभों वाला ग्रिड तैयार किया है जिसमे सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारतीय सेना, स्थानीय प्रशासन (कलेक्टर, एसपी और गांव के पटवारी) और सीमावर्ती गांवों के जागरूक नागरिक शामिल होंगे। BSF को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय थानों और पटवारियों के साथ सीधा तालमेल बिठाएं ताकि नए आने वाले किसी भी संदिग्ध या घुसपैठिये की तुरंत पहचान हो सके।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2.0 (VVP-II) गांवों का सशक्तिकरण

सीमा पर सुरक्षा तभी मजबूत होगी जब वहां की आबादी टिकी रहेगी। इसके तहत बॉर्डर के गांवों में 100% सरकारी योजनाओं की सैचुरेशन (पहुंच), नई सड़कों का निर्माण और 4G कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा रही है ताकि सीमावर्ती क्षेत्र देश के मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़े रहें।

समन्वित सुरक्षा रणनीति

इस बैठक में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया। सीमा सुरक्षा बल (BSF), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। घुसपैठ, नार्कोटिक्स तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों के नियंत्रण के लिए यही रणनीति अपनाई जाएगी।

जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका

अमित शाह ने सीमा जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों की भूमिका को और महत्वपूर्ण बताया। उन्हें कानूनी गतिविधियों की निगरानी और तस्करी पर नियंत्रण की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाएगी। यह कदम स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने और सीमा सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है।

साइबर अपराधों का नियंत्रण

बैठक के दौरान साइबर अपराधों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की बात भी की गई। 1930 हेल्पलाइन के प्रभावी उपयोग और नए आपराधिक कानूनों के सख्त क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सीमा पार अपराधों का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके।

घुसपैठ पर नियंत्रण

सरकार का मानना है कि स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा एजंसियों के सहयोग से सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा को और बेहतर बनाया जा सकता है। इससे घुसपैठ और अवैध तस्करी पर नकेल लगाई जाएगी। इससे पहले भी अमित शाह ने बिहार के सीमांचल इलाके में बड़ी बैठक की थी, जिसमें अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई थी।

नेतृत्व में सख्ती

गृह मंत्री के निर्देश के अनुसार, सीमांचल में एक लाख से अधिक अवैध निर्माण तोड़े गए हैं। यह सरकार की कोशिश है कि देश के सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। इस नए सुरक्षा मॉडल का असर बिहार, गुजरात, त्रिपुरा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल की सीमाओं पर भी देखने को मिलेगा। गृह मंत्रालय ने इस नए सुरक्षा प्लान की समीक्षा के लिए दो महीने की समयसीमा तय की है, यानी सभी संबंधित जिलाधिकारियों और सुरक्षा अधिकारियों को जमीनी स्तर पर परिणाम-उन्मुख (Result-Oriented) कार्रवाई जल्द से जल्द दिखानी होगी।

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