Maharashtra School Junk Food Rule: महाराष्ट्र में स्कूलों के जंक फूड पर सख्ती, स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर रोक

The CSR Journal Magazine
Maharashtra School Junk Food Rule: महाराष्ट्र सरकार ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्यभर के सभी सरकारी, अनुदानित, निजी, आवासीय तथा CBSE, ICSE सहित अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूलों के लिए खाद्य सुरक्षा से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं। Food and Drug Administration (FDA Maharashtra) के आयुक्त द्वारा जारी इस राज्यव्यापी आदेश का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना है। यह आदेश 27 जुलाई 2026 को जारी किया गया है और सभी स्कूलों के लिए इसका पालन अनिवार्य होगा।

Maharashtra School Junk Food Rule: स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर रोक

नए नियमों के तहत स्कूल परिसर और स्कूल के प्रवेश द्वार से 50 मीटर के दायरे में High Fat, Sugar and Salt (HFSS) यानी अत्यधिक वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन, प्रचार और मुफ्त वितरण पर रोक लगा दी गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को अस्वास्थ्यकर खानपान से दूर रखना और स्वस्थ भोजन की आदत विकसित करना है।

कैंटीन और मिड-डे मील केंद्रों के लिए नए नियम

स्कूल कैंटीन, टक शॉप, मिड-डे मील केंद्र, छात्रावास की रसोई और अन्य खाद्य आपूर्तिकर्ताओं के लिए वैध FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना लाइसेंस के खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि बच्चों को केवल सुरक्षित और गुणवत्ता युक्त भोजन ही उपलब्ध कराया जाए।

हर स्कूल में Food Safety Supervisor नियुक्त होगा

आदेश के अनुसार प्रत्येक स्कूल में Food Safety Display Board लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही एक Food Safety Supervisor और Health and Wellness Ambassador या नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी करनी होगी, जो खाद्य सुरक्षा मानकों की निगरानी करेगा और छात्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाएगा।

साल में दो बार होगी जांच

सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक स्कूल में वर्ष में कम से कम दो बार खाद्य सुरक्षा निरीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा साल में कम से कम एक बार खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच भी कराई जाएगी। स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, भोजन के सुरक्षित भंडारण, तापमान नियंत्रण, कीट नियंत्रण और कचरा प्रबंधन जैसे मानकों का भी सख्ती से पालन करना होगा।

पौष्टिक भोजन को मिलेगा बढ़ावा

नए दिशा-निर्देशों में स्कूलों को बच्चों को फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, दूध और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि स्वस्थ भोजन ही बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास की नींव है। इसी सोच के साथ इस अभियान को “बच्चों का स्वास्थ्य ही महाराष्ट्र की असली संपत्ति” थीम के तहत लागू किया गया है।
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