Supreme Court का बड़ा फैसला: आवारा कुत्तों से जुड़ी जिम्मेदारियों पर डॉग फीडर्स भी लेंगे जवाब

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट आज देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के मामलों और डॉग बाइट की घटनाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगा। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और अब इसका फैसला सुरक्षित रखा गया है। पिछली सुनवाई में, कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अगर आवारा कुत्तों के हमले में किसी इंसान को चोट या मौत का सामना करना पड़े, तो उस मामले में नगर निकाय और डॉग फीडर्स दोनों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

रुचिकर बयान: जिम्मेदारी स्वीकार करने की जरूरत

कोर्ट ने कहा, “हमारी टिप्पणियों को हल्के में लेना सही नहीं है। हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं।” इस बयान से यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट स्थानीय प्रशासन की विफलता को नजरअंदाज नहीं करेगा। यह मामला पिछले साल शुरू हुआ जब अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि देश में आवारा कुत्तों द्वारा मानव सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है।

महत्वपूर्ण आदेश: कुत्तों की सीमाएं और सुरक्षा

11 अगस्त 2025 को, कोर्ट ने दिल्ली-NCR क्षेत्र में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था। लेकिन जब इसका विरोध हुआ, तो 22 अगस्त को कोर्ट ने अपने पहले आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनके इलाके में वापस छोड़ा जा सकता है। यह निर्णय पूरे देश में लागू किया गया।

संवेदनशीलता के साथ: याचिकाकर्ता का दृष्टिकोण

इस मामले में विभिन्न पक्षों ने अपने दृष्टिकोण पेश किए। जैसे कि 9 जनवरी 2026 को एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के वकील ने यह कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। इस पर कोर्ट ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे कुत्तों को महिमामंडित करने का कोई प्रयास न करें। जस्टिस नाथ ने यह भी बताया कि कुत्ते इंसानों का डर पहचानते हैं, जो उनके काटने का कारण हो सकता है।

कार्रवाई की दिशा: प्रशासन की जवाबदेही

इस मामलों में एक प्रमुख मुद्दा यह है कि मामलों की बढ़ती संख्या भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। 27 अक्टूबर 2025 को, कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी थी कि आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों के आसपास से आवारा जानवरों को हटाने का आदेश दिया।

स्थायी समाधान: आवारा कुत्तों का उचित प्रबंधन

8 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में, जस्टिस नाथ ने साफ तौर पर कहा कि सरकारें और स्थानीय प्रशासन इस मामले में सक्रियता से काम नहीं कर रहे हैं। पढ़ाई, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए अहम स्थानों पर कुत्तों का होना एक समस्या बन चुकी है। इस पर कानूनी प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।

आगे की उम्मीदें: नीतियों में बदलाव

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल आवारा कुत्तों के लिए बल्कि समाज में उनके प्रति रवैये को भी चुनौती दे सकता है।

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