गिरता स्वास्थ्य, दृढ़ इरादे: सोनम वांगचुक के अनशन के 17 दिन पूरे, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े

The CSR Journal Magazine

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 17वां दिन: नेताओं ने खत्म करने की अपील की

दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ जारी आंदोलन में बैठे प्रख्यात शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज मंगलवार (14 जुलाई 2026) को 17वें दिन में प्रवेश कर गई है। 28 जून से लगातार अनशन पर बैठे 59 वर्षीय वांगचुक की शारीरिक स्थिति अत्यंत नाजुक हो चुकी है। लगातार गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए देश के तमाम दिग्गज राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और फिल्मी हस्तियों ने उनसे अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है। हालांकि, वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद की मेज पर नहीं आती।

तेजी से गिर रहा स्वास्थ्य, 8.5 किलो वजन घटा

कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले चल रहे इस छात्र आंदोलन के मंच से सोनम वांगचुक मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) लीक मामले और व्यापक शिक्षा सुधारों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। आंदोलन के 17वें दिन उनके स्वास्थ्य बुलेटिन ने समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है।चिकित्सीय रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 17 दिनों में सोनम वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम तक कम हो गया है।

अभिजीत दिपके ने X पर दी जानकारी

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर पर गिरकर 67 mg/dL तक पहुंच गया है, जबकि उनका ब्लड प्रेशर 107/70 mmHg दर्ज किया गया है। उपवास के इस लंबे दौर के कारण उनके शरीर की मांसपेशियां तेजी से कमजोर हो रही हैं (मसल लॉस) और वे असहनीय शारीरिक दर्द से गुजर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि भीषण गर्मी और उमस के बीच बिना अन्न-जल के इतने दिनों तक रहना उनके आंतरिक अंगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

विपक्षी दिग्गजों और नामचीन हस्तियों ने की अनशन खत्म करने की मांग

सोनम वांगचुक की बिगड़ती हालत को देखते हुए देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने उनके जीवन की रक्षा को सर्वोपरि बताते हुए भूख हड़ताल वापस लेने का आग्रह किया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश को वांगचुक जैसे प्रखर और ईमानदार विचारों वाले व्यक्तियों की जरूरत है। उन्हें अपने स्वास्थ्य की कीमत पर आंदोलन को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी वांगचुक से उपवास तोड़ने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी दलों से युवाओं के भविष्य के लिए इस आंदोलन को नैतिक समर्थन देने का आह्वान किया है।

अरविंद केजरीवाल-सोनम वांगचुक देश की अमूल्य धरोहर

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “सोनम वांगचुक देश की अमूल्य धरोहर हैं। संघर्ष के और भी लोकतांत्रिक रास्ते हैं, उन्हें अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देनी चाहिए।” केजरीवाल ने घोषणा की कि वे स्वयं 16 जुलाई को शाम 5 बजे जंतर-मंतर जाकर आंदोलन को समर्थन देंगे। इससे पहले आप नेता आतिशी ने भी प्रदर्शन स्थल पर जाकर वांगचुक से मुलाकात की थी।

TMC सांसद महुआ मोइत्रा का भावुक संदेश

 टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश लिखते हुए कहा, “आपका जीवन हमारे लिए और इस देश के छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कृपया अपना अनशन समाप्त करें।”

बुद्धिजीवियों का साझा पत्र

देश की जानी-मानी लेखिका अरुंधति रॉय, प्रसिद्ध अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह, अर्थशास्त्री जयती घोष और फिल्म निर्माता संजय काक सहित कई प्रमुख नागरिकों ने एक संयुक्त बयान जारी कर जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारियों से स्वास्थ्य के मद्देनजर अनशन समाप्त करने की अपील की है।

मुझसे अनशन खत्म करने को मत कहो, सरकार से पूछो

जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों और सहयोगियों द्वारा बार-बार अनशन तोड़ने के आग्रह पर सोनम वांगचुक टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। अभिजीत दिपके के अनुसार, जब उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य का हवाला देकर उपवास समाप्त करने की विनती की, तो वांगचुक ने बेहद शांत लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, “मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए। बल्कि सरकार से पूछिए कि वह अपने ही देश के नागरिकों और छात्रों से बातचीत करने के लिए आगे क्यों नहीं आ रही है? क्या बुनियादी जवाबदेही मांगना कोई अपराध है?” वांगचुक का कहना है कि यदि वे बिना किसी तार्किक परिणति या सरकारी आश्वासन के पीछे हट गए, तो यह देश में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अनशनों के इतिहास की बड़ी असफलता होगी और भविष्य में कोई भी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।

क्या हैं आंदोलन की मुख्य मांगें?

यह पूरा आंदोलन देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव और राष्ट्रीय परीक्षाओं में शुचिता बहाल करने के इर्द-गिर्द केंद्रित है-
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: परीक्षा पत्रों के कथित लीक (NEET पेपर लीक विवाद) और परीक्षा प्रबंधन में आई गंभीर अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही: भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय की जाए।
छात्रों के भविष्य की सुरक्षा: देश के लाखों पीड़ित मेडिकल और अन्य प्रतियोगी छात्रों को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी और सहयोगी छात्र संगठनों ने आंदोलन को और धार देने के लिए आगामी 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ‘जंतर-मंतर से संसद भवन’ तक एक विशाल शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों ने देश भर के अभिभावकों, छात्रों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे दिल्ली पहुंचकर इस मार्च का हिस्सा बनें ताकि सोई हुई व्यवस्था को जगाया जा सके।

देशवासियों से आग्रह

सोनम वांगचुक ने भी देशवासियों से आग्रह किया है कि जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे अपने-अपने स्थानों पर कम से कम एक दिन का सांकेतिक उपवास रखकर देश की शिक्षा और युवाओं के भविष्य को बचाने की इस मुहिम में अपना योगदान दें। फिलहाल, जंतर-मंतर पर भावुक और तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जहां छात्र लगातार सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं और सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या वार्ता का प्रस्ताव सामने नहीं आया है।

सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम

सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल भूख हड़ताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वांगचुक हमेशा से ही शिक्षा और पर्यावरण के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनका मानना है कि जागरूकता और एकजुटता से ही समाज में बदलाव संभव हैं।

आंदोलन के भविष्य की दिशा पर नजर

इस मामले पर लगातार अपडेट्स आ रहे हैं, और वांगचुक के समर्थक और नेता दोनों इस आंदोलन के भविष्य की दिशा पर चौकस नजर रखे हुए हैं। जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन और वांगचुक की भूख हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। लोगों की प्रतिक्रियाएं और समर्थन इसे और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos