नीट के खिलाफ विजय थलापति का बड़ा ऐलान, छात्रों के समर्थन में उतरी TVK

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नीट परीक्षा पूरी तरह खत्म की जाए: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति, राहुल गांधी की हिरासत को बताया लोकतंत्र पर हमला

देशभर में नीट (NEET) परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्र आंदोलनों के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तथा TVK प्रमुख विजय थलापति (सी. जोसेफ विजय) ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच या सुधार पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नीट सिस्टम को समाप्त कर राज्यों को चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया का अधिकार वापस दिया जाना चाहिए। इसी के साथ मुख्यमंत्री विजय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर आघात बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है।

TVK का x पोस्ट: छात्रों के भविष्य पर सवाल

TVK ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि नीट लागू होने के बाद से इसकी विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और विवादों के कारण लाखों छात्र मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं तथा उनके भविष्य और करियर पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य अवसर प्रदान करना होना चाहिए, न कि विद्यार्थियों को असमान प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव में धकेलना।

नीट को पूरी तरह खत्म करने की मांग

सीएम विजय ने कहा कि नीट परीक्षा लागू होने के बाद से ही इसकी विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण हर साल छात्रों को होने वाला नुकसान थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे युवा मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं और उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इसलिए इस समस्या का एकमात्र समाधान नीट को पूरी तरह से समाप्त करना ही है।

‘सुधार नहीं, पूरी व्यवस्था बदले’

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि नीट में समय-समय पर सामने आने वाले विवाद यह संकेत देते हैं कि समस्या केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार राज्यों की शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम और सामाजिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं, इसलिए मेडिकल प्रवेश का अधिकार राज्यों के पास होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से शिक्षा के क्षेत्र में राज्यों की भूमिका को मजबूत करने की मांग भी दोहराई।

राहुल गांधी की हिरासत पर तीखी प्रतिक्रिया

दिल्ली में नीट मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान खोजा जाना चाहिए। टीवीके ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए विपक्षी दलों के साथ एकजुटता भी व्यक्त की।

राहुल गांधी की हिरासत की निंदा

विजय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास शांतिपूर्ण तरीके से युवाओं के प्रदर्शन का समर्थन करने गए राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी जैसे वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली पुलिस द्वारा अमानवीय तरीके से घसीटकर हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।

दिल्ली में क्या हुआ?

नीट से जुड़े मुद्दों और कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।

NEET पर तमिलनाडु की पुरानी आपत्ति

तमिलनाडु लंबे समय से नीट परीक्षा का विरोध करता रहा है। राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों का तर्क है कि यह परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के साथ न्याय नहीं करती। उनका कहना है कि महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता बढ़ने से समान अवसर का सिद्धांत कमजोर पड़ता है। विजय थलापति ने मुख्यमंत्री बनने के बाद भी इस रुख को बरकरार रखा है और अब एक बार फिर पूरे देश में नीट समाप्त करने की मांग को प्रमुखता से उठाया है।

विजय ने सुझाए स्थायी व अंतरिम समाधान

मुख्यमंत्री विजय ने नीट परीक्षा को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार के सामने दो मुख्य प्रशासनिक विकल्प रखे हैं-
स्थायी समाधान (शिक्षा को राज्य सूची में लाना): शिक्षा व्यवस्था और मेडिकल दाखिलों पर राज्यों को पूर्ण अधिकार देने के लिए शिक्षा को समवर्ती सूची से हटाकर दोबारा ‘राज्य सूची’ (State List) में शामिल किया जाना चाहिए।
अंतरिम समाधान (विशेष समवर्ती सूची): जब तक स्थायी संवैधानिक बदलाव नहीं होते, तब तक केंद्र सरकार एक ‘विशेष समवर्ती सूची’ (Special Concurrent List) बनाए। इसके माध्यम से राज्य सरकारों को अपनी चिकित्सा शिक्षा और प्रवेश परीक्षाओं पर निर्णय लेने के व्यापक अधिकार प्राप्त हो सकें।
सीएम विजय ने साफ किया कि इस गंभीर मुद्दे पर उनकी पार्टी वोट बैंक की राजनीति के लिए झूठे वादे नहीं करेगी और नीट को खत्म कराने के अपने रुख पर पूरी तरह अडिग रहेगी।।

छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें

नीट को लेकर आंदोलन कर रहे विभिन्न छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें हैं—
  • परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
  • कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
  • छात्रों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक प्रवेश व्यवस्था पर विचार किया जाए।
  • राज्यों को मेडिकल प्रवेश नीति तय करने का अधिक अधिकार मिले।

राजनीतिक असर भी गहराया

विशेषज्ञों का मानना है कि नीट अब केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के अधिकारों, शिक्षा नीति और छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक विषय बन चुका है। तमिलनाडु सरकार की ओर से नीट समाप्त करने की मांग और राहुल गांधी की हिरासत पर समर्थन ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक राजनीतिक बना दिया है। आने वाले दिनों में संसद और विभिन्न राज्यों में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
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