कलाई पर प्लास्टिक बैंड, 7 किमी की पदयात्रा: राहुल गांधी का पीएम आवास घेरने का सीक्रेट मिशन

The CSR Journal Magazine

दो सीएम और सांसदों की टीम लेकर पीएम आवास के बाहर कैसे पहुंचे राहुल गांधी? धरने की इनसाइड स्टोरी

राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक मामले में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर अचानक पहुंचकर एक अभूतपूर्व और बड़ा धरना प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, केरल के विपक्ष के नेता (और पूर्व सीएम चेहरे) वी.डी. सतीशन समेत करीब 100 सांसद और बड़े नेता शामिल थे।

छात्रों की आवाज से सियासी हलचल

NEET पेपर लीक को लेकर चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक रंग में रंग चुका है। मंगलवार को जंतर-मंतर से शुरू हुई यह आवाज पीएम आवास तक पहुंच गई, जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी, दो मुख्यमंत्रियों और कई सांसदों के साथ धरने पर बैठ गए। यह धरना NEET पेपर लीक मामले के विरोध में खास महत्व रखता है, क्योंकि इससे पहले छात्रों के संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज हुआ था। राहुल गांधी का यह प्रदर्शन दो घंटे से अधिक समय तक चला, जिसमें सरकार और पुलिस अधिकारी उन्हें समझाने का प्रयास करते रहे।

सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान

राहुल गांधी का पीएम आवास के पास धरना कई दृष्टियों से खास माना जा रहा है। पीएम आवास सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण स्थान है और इस समय संसद का सत्र भी चल रहा है। पीएम आवास के आसपास बीएनएस की धारा-163 लागू है, जिससे यह प्रश्न उठता है कि कैसे राहुल गांधी और अन्य नेताओं को वहां जाने की अनुमति मिली।

कैसे पहुंचें पीएम आवास?

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पहुंचे। इस दिन खरगे का जन्मदिन था, लेकिन उन्होंने उसका जश्न मनाने से मना कर दिया और इस अवसर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ धरने का ऐलान किया। इसके बाद, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी पीएम आवास की ओर मार्च करते हुए निकले। यह प्रदर्शन अचानक हुआ और इसकी जानकारी मीडिया को पहले से नहीं दी गई।

सीक्रेट प्लानिंग और मार्च की शुरुआत

यह पूरा प्रदर्शन बेहद गोपनीय तरीके से प्लान किया गया था। कांग्रेस सांसदों को भी पहले से इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी। सभी सांसदों और नेताओं को पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एकत्र होने के लिए कहा गया। वहां पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने अचानक रणनीति बदलते हुए कहा, “चलो, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को जगाते हैं।” इसके बाद राहुल गांधी की अगुवाई में यह पूरी टीम करीब 7 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए सीधे हाई-सिक्योरिटी वाले पीएम आवास के पास पहुंच गई।

हिरासत से बचने के लिए “कलाई बांधने” का फॉर्मूला

जैसे ही पुलिस ने पीएम आवास की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश की, राहुल गांधी ने एक अनोखा तरीका अपनाया। सोशल मीडिया पर कांग्रेस द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में राहुल गांधी खुद नेताओं को प्लास्टिक ज़िप टाइज़ (Zip Ties) बांटते दिखे। सभी नेताओं ने एक-दूसरे के हाथ और कलाई को इन प्लास्टिक बैंड से आपस में बांध लिया, ताकि दिल्ली पुलिस उन्हें आसानी से उठाकर हिरासत में न ले सके और धरना लंबे समय तक जारी रहे।

रात भर रुकने की रणनीति और मांगें

संसद में इस विषय पर चर्चा की अनुमति न मिलने के कारण राहुल गांधी सड़क पर उतरे। विपक्ष ने इस धरने को रात भर जारी रखने की घोषणा की है। कांग्रेस मुख्य रूप से नीट पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग कार रही है। घायल छात्रों पर हुई बर्बरता का प्रधानमंत्री से जवाब भी मांग गया है।

सरकार की तरफ से मनाने की कोशिश और राजनीतिक घमासान

धरना शुरू होने के महज 20 मिनट के भीतर ही मोदी सरकार बैकफुट पर नजर आई। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और राहुल गांधी से बातचीत कर धरना खत्म करने का आग्रह किया। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने इस आग्रह को ठुकरा दिया।

‘भाजपा और कांग्रेस के बीच की जुगलबंदी’

इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटनाक्रम पर तीखा तंज कसा है। ‘आप’ सांसद संजय सिंह और नेता आतिशी ने इसे भाजपा और कांग्रेस के बीच की ‘जुगलबंदी’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर एक महीने से चल रहे प्रदर्शनकारियों से बात न करने वाली सरकार ने राहुल गांधी को पीएम आवास के पास धरने की इजाज़त भी दे दी और एक घंटे में मनाने भी पहुंच गई। दूसरी ओर, इस धरने के समर्थन में समूचे राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालयों पर बड़े प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।

राहुल गांधी की मांगें

कांग्रेस ने NEET पेपर लीक को छात्रों से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए संसद में इस पर चर्चा की मांग की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक, प्रधानमंत्री को दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए। इसके साथ ही, कांग्रेस केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रही है। धरने में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा नहीं करना चाहती।

धरने में शामिल नेता

PM आवास के बाहर हुए धरने में राहुल गांधी के अलावा मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, केरल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इस धरने ने छात्रों के मुद्दों को और भी मजबूती से उठाया है।

आम आदमी पार्टी का हमला

इसी बीच आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी के धरने पर निशाना साधा है। AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया है कि भारत सरकार ने राहुल गांधी को धरने पर बिठाकर CJP के प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश की है। इसके अलावा, AAP के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन को समर्थन दिया।

राजनीतिक समीकरण का बदलाव

अब तक NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा लीड किया जा रहा था। हालाँकि, राहुल गांधी के धरने के बाद कांग्रेस का इस मुद्दे पर सक्रिय होना एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि NEET पेपर लीक का मुद्दा केवल छात्रों की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन गया है।

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