RSS Mohan Bhagwat Speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नागपुर में विजयादशमी का पर्व इस बार और भी खास तरीके से मनाया, क्योंकि यह संघ के शताब्दी वर्ष का भी उत्सव है। इस मौके पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने संबोधन में इतिहास, समकालीन चुनौतियां और भविष्य की दिशा पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के योगदान का स्मरण किया और समाज व राष्ट्र के सामने खड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।
RSS Mohan Bhagwat Speech: गुरु तेग बहादुर से गांधी और शास्त्री तक की याद
अपने भाषण की शुरुआत में भागवत ने कहा कि समाज को अन्याय और अत्याचार से बचाने के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु तेग बहादुर जी का स्मरण हमें नई प्रेरणा देता है। साथ ही उन्होंने गांधी और शास्त्री जी की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने भारत के भविष्य की राह दिखाई।
पहलगाम हमला और आतंकवाद पर सख्त रुख
भागवत ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें 26 भारतीयों की हत्या की गई। लेकिन सरकार, सेना और समाज ने मिलकर इसका सशक्त जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने यह साबित किया कि भारत का नेतृत्व, सेना का शौर्य और समाज की एकजुटता अडिग है।
प्राकृतिक आपदाएं और हिमालय की चेतावनी
RSS प्रमुख ने चिंता जताई कि पिछले 3-4 वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। लगातार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ अब सामान्य हो गई हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय हमारी सुरक्षा की दीवार है और पूरे दक्षिण एशिया का जल स्रोत भी। अगर हमारी विकास नीति इन आपदाओं को जन्म दे रही है तो हमें अपनी सोच और फैसलों पर पुनर्विचार करना होगा। हिमालय की मौजूदा स्थिति खतरे की घंटी है।
वैश्विक टैरिफ नीति और स्वदेशी पर जोर
अमेरिका के नए टैरिफ नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया परस्परावलंबन से चलती है, लेकिन यह निर्भरता किसी पर मजबूरी नहीं बननी चाहिए। भारत को आत्मनिर्भर और स्वदेशी उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। हम सबके साथ संबंध रखें लेकिन अपनी शर्तों पर, मजबूरी में नहीं।
पडोसी देशों की अस्थिरता और भारत की जिम्मेदारी
भागवत ने पड़ोसी देशों की अस्थिरता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को सतर्क रहना होगा, क्योंकि ऐसी ताकतें जो अराजकता फैलाना चाहती हैं, वे भारत में भी सक्रिय हैं।
संस्कृति और समाज सेवा पर भरोसा
संघ प्रमुख ने कहा कि आज देशभर में नई पीढ़ी के बीच संस्कृति और देशभक्ति के प्रति आस्था बढ़ रही है। RSS स्वयंसेवक ही नहीं बल्कि कई सामाजिक और धार्मिक संगठन भी निःस्वार्थ भाव से समाज सेवा में आगे आ रहे हैं। इससे आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सशक्तिकरण की भावना मजबूत हो रही है।
RSS Mohan Bhagwat Speech: प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण
भागवत ने प्रयागराज महाकुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि यह आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और संगठन का वैश्विक मानक बन गया। इसने न केवल विश्व को चकित किया बल्कि पूरे भारत में एकता और आस्था की लहर भी जगाई। मोहन भागवत के भाषण में साफ झलक रहा था कि RSS इस शताब्दी पर्व को केवल उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का अवसर मानता है। आतंकवाद, प्राकृतिक आपदाएं, पड़ोसी देशों की अस्थिरता और वैश्विक राजनीति की चुनौतियों के बीच उन्होंने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, संस्कृति और समाज सेवा के रास्ते को भारत की असली ताकत बताया।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
The forecast suggests that two mild western disturbances are approaching northern India this week, marking a shift in weather patterns. The first disturbance is...
The recent outbreak of violence in Noida has sent shockwaves across the state, raising serious questions about administrative preparedness and accountability. What makes the...