संसद में घमासान के बीच पीएम आवास पर जुटे बागी सांसद, मोदी ने दिया सुरक्षा और सम्मान का खुला भरोसा

The CSR Journal Magazine

पीएम मोदी ने TMC-उद्धव गुट के बागी सांसदों से की बैठक, कहा- कोई चिंता नहीं, संसद में हंगामे के बीच पीएम की ब्रेकफास्ट मीटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) से पाला बदलकर आए बागी सांसदों के साथ एक विशेष ब्रेकफास्ट मीटिंग की है, जिसमें उन्होंने सांसदों को आश्वस्त करते हुए कहा कि “चिंता की कोई बात नहीं है, मैं आपके साथ हूं।” संसद के मानसून सत्र में जारी भारी हंगामे और राजनीतिक खींचतान के बीच शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में इस अहम बैठक का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुनबे में शामिल हुए नए सांसदों का स्वागत किया गया और भावी विधायी रणनीति पर गहन चर्चा हुई।

संसद में गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री आवास पर ‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’

संसद के मानसून सत्र के दौरान जारी गतिरोध और तीखी नोकझोंक के बीच देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह अपने आधिकारिक आवास पर एनडीए (NDA) के 45 सांसदों के साथ एक महत्वपूर्ण ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ (नाश्ते पर बैठक) की। इस बैठक का मुख्य आकर्षण तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के गुट (शिवसेना UBT) से बगावत कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खेमे में आए सांसदों की उपस्थिति रही। राजनीतिक हलकों में इसे पीएम मोदी की ‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’ के रूप में देखा जा रहा है, जहां विपक्ष के हमलों का सामना कर रहे नए सहयोगियों को शीर्ष नेतृत्व द्वारा पूरी तरह से सुरक्षा और सम्मान का भरोसा दिया गया। बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि NDA एक परिवार की तरह काम करता है और इसमें शामिल होने वाले हर एक सदस्य के हितों की रक्षा करना गठबंधन का साझा संकल्प है।

“कोई चिंता नहीं, मैं आपके साथ हूं” – पीएम मोदी का खुला आश्वासन

बैठक के भीतर से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विपक्षी दलों को छोड़कर आए सांसदों से बेहद आत्मीय माहौल में संवाद किया। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों द्वारा इन सांसदों को निशाना बनाए जाने और उनके निलंबन या अयोग्यता को लेकर फैलाई जा रही राजनीतिक अनिश्चितताओं के संदर्भ में पीएम ने सीधे शब्दों में कहा, “आपके बारे में बाहर क्या कहा जा रहा है, उसकी चिंता बिल्कुल मत कीजिए। किसी भी तरह की शंका रखने की जरूरत नहीं है, मैं व्यक्तिगत रूप से आपके साथ खड़ा हूं। NDA सिर्फ एक राजनीतिक गठबंधन नहीं बल्कि एक एकजुट परिवार है। यहाँ हर घटक दल और प्रत्येक सांसद को पूरा सम्मान और समान अवसर प्रदान किया जाएगा।” प्रधानमंत्री के इस बयान ने नए सांसदों के बीच सुरक्षा का भाव मजबूत किया है। इस बैठक में राष्ट्रीय नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए TMC के बागी सांसद और उद्धव गुट को छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ आए 6 सांसद प्रमुख रूप से मौजूद थे।

लुटियंस दिल्ली के जाल से बचें और संसद के इतिहास को पढ़ें

ब्रेकफास्ट मीटिंग के दौरान पीएम मोदी ने सांसदों को न केवल राजनीतिक सुरक्षा का आश्वासन दिया, बल्कि उन्हें बेहतर संसदीय कामकाज के गुर भी सिखाए। उन्होंने नवनिर्वाचित और नए सहयोगी सांसदों से कहा कि वे संसद के भीतर की चिंताओं या वहां के तनाव को सदन के बाहर अपने व्यक्तिगत जीवन या जनता के बीच न ले जाएं। प्रधानमंत्री ने सांसदों को नसीहत दी कि वे दिल्ली के लुटियंस मीडिया और विशिष्ट हलकों के ‘मायाजाल’ (वेब) से दूर रहें और अपना ध्यान पूरी तरह से अपने क्षेत्र की जनता पर केंद्रित करें।

संसदीय इतिहास का अध्ययन

पीएम ने सांसदों से कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है। उन्हें संसद के पुस्तकालय का उपयोग करना चाहिए, पुराने बहसों के रिकॉर्ड पढ़ने चाहिए और संसदीय इतिहास को गहराई से समझना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इतिहास से जुड़े बहुत सारे तथ्य उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग सदन के भीतर तार्किक डिबेट की तैयारी के लिए किया जाना चाहिए।

चिल्लाने की जरूरत नहीं

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सदन में अपनी बात रखने के लिए गुस्से में चिल्लाने या हंगामा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। पार्टी लाइन के तहत रहकर शांतिपूर्वक और आक्रामक तथ्यों के साथ अपनी बात मजबूती से रखी जा सकती है।

‘मराठी संवाद’ और क्षेत्रीय जुड़ाव का दिखा अनोखा रंग

इस नाश्ते की मेज पर केवल गंभीर राजनीतिक विमर्श ही नहीं हुआ, बल्कि कई अनौपचारिक और आत्मीय क्षण भी देखने को मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राज्यों से आए सांसदों से उनकी क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति से जुड़ते हुए बातचीत की। महाराष्ट्र से आए शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के सांसदों से प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से मराठी भाषा में बातचीत की। उन्होंने धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर से बातचीत के दौरान उनके योग अभ्यास की दिनचर्या के बारे में पूछा, जिससे बैठक का माहौल काफी हल्का-फुल्का हो गया। वहीं, पश्चिम बंगाल से आए टीएमसी के पूर्व सांसदों (जो अब NCPI का हिस्सा हैं) से उन्होंने राज्य के विकास को लेकर लंबी चर्चा की। पीएम ने सांसदों से कहा कि वे अपने-अपने राज्यों के विकास कार्यों की सूची बनाएं और यदि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या राजनीतिक समस्या आती है, तो वे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब राज्य आगे बढ़ेंगे, तभी देश का चौमुखी विकास संभव होगा।

‘NCPI’ और नए राजनीतिक समीकरणों का गणित

इस बैठक के पीछे के राजनीतिक समीकरणों को देखें तो मानसून सत्र की शुरुआत से ही संसद के भीतर संख्या बल को लेकर बड़ी रस्साकशी चल रही है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 बागी सांसदों को सदन में अलग सीट आवंटित की गई थी, जिन्होंने नेशनल सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का गठन किया है। हालांकि, तकनीकी रूप से इनके विलय को पूर्ण औपचारिकता मिलना अभी बाकी है, लेकिन एनडीए ने इन्हें पूरी तरह अपने पाले में स्वीकार कर लिया है।

संसद में दो-तिहाई बहुमत की ओर कदम

इस राजनीतिक फेरबदल के कारण लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA का आंकड़ा 293 से बढ़कर 319 के पार पहुंच गया है। इस रणनीतिक बढ़त के माध्यम से सरकार संसद में आने वाले महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और बड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की कोशिश कर रही है।

विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया और ‘पार्किंग स्पॉट’ का आरोप

एक तरफ जहां प्रधानमंत्री मोदी इन नए सांसदों के साथ घुल-मिल रहे हैं और एनडीए संसदीय दल की बैठकों में NCPI के नेताओं (जैसे काकोली घोष दस्तीदार और जगदीश बसुनिया) को केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी के साथ अग्रिम पंक्ति में जगह दी जा रही है, वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद हमलावर है। कांग्रेस और मूल टीएमसी ने इस बैठक और अलग सीट आवंटन पर कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “NCPI कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के डर से भागे बागी सांसदों के लिए सिर्फ एक सुरक्षित ‘पार्किंग स्पॉट’ बन गई है”। वहीं, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि जब तक तकनीकी रूप से दल बदलने वाले सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा औपचारिक मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक उन्हें एनडीए की आधिकारिक बैठकों का हिस्सा किस नियम के तहत बनाया जा रहा है।

विवादित बयानों से बचने और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग की सलाह

प्रधानमंत्री ने सांसदों को मीडिया से निपटने के लिए भी कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद को टेलीविजन चैनलों पर जाकर किसी भी तरह की “अंट-शंट या फालतू बातें” (trashy statements) नहीं करनी चाहिए। हर परिस्थिति में व्यक्तिगत और संसदीय गरिमा को बनाए रखना आवश्यक है। इसके विपरीत, उन्होंने सांसदों को डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और एक्स (X, पूर्व में ट्विटर) पर सक्रियता बढ़ाने की सलाह दी। पीएम ने कहा:”सोशल मीडिया के माध्यम से सीधे युवाओं से जुड़ें। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जमीन तक पहुंचाएं और अपने क्षेत्रों में युवाओं को खेलकूद तथा अन्य सकारात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।”

‘सबका साथ’ के नारे को धरातल पर उतारने का प्रयास

इस ब्रेकफास्ट बैठक के बाद बाहर आए NCPI के वरिष्ठ नेता जगदीश बसुनिया ने प्रधानमंत्री के साथ हुई इस बातचीत को अत्यंत सुखद और उत्साहवर्धक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र कल्याण और जनहित के साझा लक्ष्यों के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया है। वहीं, सांसद शताब्दी रॉय ने भी कहा कि देश के सर्वोत्तम विकास के लिए मिलकर काम करने की रूपरेखा पर सकारात्मक चर्चा हुई।

NDA की भविष्य की रणनीति

संसद के मानसून सत्र में मचे भारी घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी। यह विपक्ष के खेमे में सेंधमारी के बाद अपने नए सहयोगियों को मानसिक और राजनीतिक रूप से सुदृढ़ करने, गठबंधन के संख्या बल का प्रदर्शन करने और आने वाले दिनों में कड़े विधायी फैसलों के लिए एनडीए के भीतर आंतरिक अभेद्यता तैयार करने की एक सोची-समझी रणनीतिक बिसात है। प्रधानमंत्री के इस भरोसे के बाद अब देखना होगा कि सदन के भीतर और बाहर इन नए सांसदों की भूमिका एनडीए को कितनी मजबूती प्रदान करती है।

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