Bihar Corruption News: स्कॉलरशिप के बदले घूस मांगने वाले प्राचार्य को 3 साल की सजा, बिजली विभाग के JE समेत 3 कर्मचारी रिश्वत लेते गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी ब्यूरो और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई लगातार जारी है। एक ओर छात्रवृत्ति देने के बदले रिश्वत मांगने वाले पूर्व प्रभारी प्राचार्य को विशेष निगरानी अदालत ने तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है, वहीं दूसरी ओर पूर्णिया में बिजली कनेक्शन देने के नाम पर घूस मांगने वाले जूनियर इंजीनियर (JE) समेत तीन कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। दोनों मामलों को भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य की सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वतखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

स्कॉलरशिप के लिए मांगी थी रिश्वत

यह मामला वर्ष 2012 का है। पटना जिले के पालीगंज क्षेत्र की रहने वाली छात्रा गौरवी रंजन ने शिकायत की थी कि रघुनाथपुर स्थित दामोदर उच्च विद्यालय के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य उपेंद्र शर्मा छात्रवृत्ति का चेक देने के बदले 2 हजार रुपये रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद जाल बिछाकर तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य को पटना के बोरिंग रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई के दौरान उनके पास से छात्रवृत्ति से संबंधित चेक भी बरामद किया गया था।

अदालत ने कहा- बच्चों की स्कॉलरशिप में रिश्वत लेना गंभीर अपराध

पटना स्थित विशेष निगरानी अदालत के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह केवल दो हजार रुपये की रिश्वत का मामला नहीं है, बल्कि छात्रों की छात्रवृत्ति के बदले पैसे मांगना बेहद गंभीर और शर्मनाक अपराध है। अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, इस वर्ष भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में यह 14वीं सजा है और तीन वर्ष की सजा वाले मामलों की संख्या काफी कम रही है।

बिजली कनेक्शन के नाम पर घूस लेते पकड़े गए तीन कर्मचारी

इधर, विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने पूर्णिया जिले के के. नगर में बिजली विभाग के जेई भरत मलिक, टेक्निशियन ग्रेड-3 पंकज कुमार मेहता और आशुतोष कुमार पांडेय को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता राजेश कुमार साह ने आरोप लगाया था कि बिजली कनेक्शन देने के बदले उनसे 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। तय हुआ था कि पहले 10 हजार रुपये दिए जाएंगे और बाकी राशि कनेक्शन मिलने के बाद ली जाएगी। शिकायत की जांच के बाद आरोप सही पाए गए, जिसके बाद SVU ने जाल बिछाकर तीनों आरोपियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी रहेगी कार्रवाई

विशेष निगरानी इकाई और निगरानी ब्यूरो का कहना है कि सरकारी सेवाओं में रिश्वतखोरी पर रोक लगाने के लिए ट्रैप कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अदालत से दोषियों को सजा दिलाना भी प्राथमिकता है, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया जा सके।

क्या है इसका महत्व?

सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति और बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं में रिश्वतखोरी आम लोगों को सीधे प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में अदालत से सजा और रंगे हाथ गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोषियों को कानून के मुताबिक सख्त सजा भी दिलाई जाएगी। इससे सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और लोगों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है।

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