संसद में बगावत की तैयारी: उद्धव गुट के 6 सांसद पाला बदलने के लिए तैयार, NCPI ने दिया विलय का न्योता
शिवसेना (UBT) के भीतर मची सियासी हलचल के बीच, नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने उद्धव ठाकरे गुट के संभावित बागी सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला ऑफर दिया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के अपनी पार्टी में विलय के बाद उत्साहित NCPI ने कहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के लिए भी उनके “दरवाजे खुले हैं”।
राजनीति में नया मोड़
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच अब शिवसेना (ठाकरे गुट) के 6 बागी सांसदों को पश्चिम बंगाल की NCPI पार्टी की ओर से एक बड़ा ऑफर मिला है। इन सांसदों का नाम पहले शिंदे गुट के साथ जोड़ा जा रहा था। हालाँकि, अभी इन सांसदों की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह ऑफर महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई हलचल को जन्म दे रहा है।
महाराष्ट्र का ‘ऑपरेशन टाइगर’ और सियासी संकट
रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं और वे दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अलग गुट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कुल 9 में से दो-तिहाई (यानी न्यूनतम 6) सांसदों का एक साथ आना जरूरी है। शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि बागी सांसदों को तोड़ने के लिए प्रति सांसद ₹50 करोड़ का ऑफर दिया जा रहा है, जिसमें ₹15 करोड़ एडवांस (अग्रिम राशि) के तौर पर दिए गए हैं।
NCPI का ऑफर और पुराना ‘बंगाल मॉडल’
इससे पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी के 20 सांसदों ने इसी गुमनाम पार्टी (NCPI) में विलय का रास्ता चुना था, जिससे वे संसद में अयोग्य होने से बच गए और NDA को समर्थन दे दिया। NCPI ने उद्धव के सांसदों को भी यही कानूनी रूप से सुरक्षित रास्ता (Legal Device) अपनाने और उनके साथ आने का निमंत्रण भेजा है। NCPI के अलावा महाराष्ट्र के अमरावती से विधायक रवि राणा ने भी अपनी ‘युवा स्वाभिमान पार्टी’ की तरफ से ठाकरे के बागी सांसदों को उनके साथ आने का न्योता दिया है।
NCPI का खुला ऑफर
पश्चिम बंगाल की NCPI ने यह स्पष्ट किया है कि अगर ये बागी सांसद उनकी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं तो उनके लिए दरवाजे खुले हैं। संसद में यह वार्तालाप इसलिए हो रहा है क्योंकि उद्धव गुट के सांसदों के पार्टी छोड़ने की संभावनाएँ बढ़ती जा रही हैं। ये घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक उभरता हुआ रुख दर्शा रहा है।
बागी सांसदों पर आरोप
शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने आरोप लगाया है कि इन बागी सांसदों को ‘खरीदने’ के लिए 15 से 50 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि पार्टी पर किसी भी प्रकार का खतरनाक दबाव नहीं है और स्थिति को संभालने की पार्टी की क्षमता पर भरोसा जताया है।
एकनाथ शिंदे गुट का दावा
उद्धव गुट के सांसदों को लेकर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के MLC चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि ये 6 सांसद पहले ही शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। उनका कहना है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत ये सांसद अधिकृत रूप से एकनाथ शिंदे के साथ जुड़ गए हैं। इस घटनाक्रम ने सियासी समीकरणों को और भी ज्यादा पेचीदा कर दिया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
संजय राउत ने कहा कि जो सांसद पार्टी में रहना चाहते हैं, वे इसके लिए स्वागत योग्य हैं। उन्होंने हालिया घटनाक्रम पर अपनी चिंता व्यक्त की है और बताया है कि संसद में सभी मुद्दों पर पार्टी की बात होगी। हालाँकि, अभी तक किसी भी सांसद की तरफ से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे स्थिति और भी रहस्यपूर्ण बन गई है।
पार्टी की व्हिप और चेतावनी
शिवसेना (UBT) ने इस संकट को देखते हुए संसदीय दल की बैठक से ठीक पहले अपने सभी सांसदों के लिए कड़ा व्हिप जारी कर दिया है।उद्धव ठाकरे का रुख: उद्धव ठाकरे ने साफ कहा है कि जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बालासाहेब की शिवसेना छोड़ने वालों को बाद में पछताना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने 22 जून को विधायकों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।
आगे की सियासी बिसात
इन घटनाओं के मद्देनजर, महाराष्ट्र की राजनीति में और भी नए परिवर्तनों के संकेत मिल सकते हैं। इन बागी सांसदों की भविष्य की रणनीति और उनकी प्रतिक्रियाएँ राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों का परिणाम क्या होता है और पार्टी में क्या नए समीकरण उभरते हैं।
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