ओडिशा के भुवनेश्वर में 9 साल पहले एक राधा-कृष्ण मंदिर में चोरी हुई थी। अब इतने वर्षों के बाद चोर ने ना सिर्फ सभी गहने लौटा दिए हैं बल्कि उसने माफीनामा भी लिखा है। इतना ही नहीं, चोर ने मंदिर में 201 रुपये का दान किया है और खुद ही दंड के तौर पर 100 रुपए अतिरिक्त भी दिए हैं। चोर की यह हरकत अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।
2014 में की थी राधा-कृष्ण मंदिर में चोरी
मामला 2014 का है। भुवनेश्वर के गोपीनाथपुर में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में चांदी के कई आभूषण चोरी हुए थे। इनमें श्रीकृष्ण की टोपी, बांसुरी, कंगन और कान की बाली भी शामिल थीं। मामले की रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी, लेकिन ना तो चोर का कोई सुराग मिला और ना ही चोरी के आभूषण की जानकारी मिली।
धौली थाना के प्रभारी चितरंजन राउत ने बताया कि पुलिस को एक नोट मिला था। इसमें लिखा था कि करीब चार लाख रुपये मूल्य के गहने, जिन्हें मंदिर से चोरी किया गया था, वह मंदिर के बाहर एक बैग में रखे हैं। शख्स ने नोट में यह भी लिखा कि उसने बैग में मंदिर के लिए 201 रुपये का दान और 100 रुपये दंड के भी रखे हैं। उसने लिखा में मंदिर में जब यज्ञ किया जा रहा था तब उसने यह गहने चुराए थे।
चोरी के गहनों के साथ जुर्माना भी लौटाया
अपने अपराध के बारे में गहराई से माफी मांगते हुए, चोर ने पूर्वी भारत के ओडिशा के एक मंदिर से पीठासीन देवताओं, भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी राधा के चुराए हुए गहने उन्हें नौ साल बाद दो ‘Sorry’ के नोटों के साथ वापस लौटाए। मंदिर के पुजारियों ने इसे ईश्वर का ‘चमत्कार’ बताते हुए कहा, “ हमने लगभग चार लाख मूल्य के मूल्यवान आभूषणों को वापस पाने की सारी उम्मीद छोड़ दी थी, और अब चोर ने न केवल हर वस्तु वापस कर दी है, बल्कि आभूषण बैग में 301 ₹ भी छोड़े हैं। इसमें से 201₹ देवता को दक्षिणा (बलि) के, और 100 ₹ चोरी के लिए एक टोकन जुर्माना है।
भगवद गीता और ईश्वर ने दिखाई सही राह
प्राप्त सूचना के अनुसार चोर ने चोरी के बाद से बुरे सपने और अपराधबोध से ग्रस्त होने का दावा किया और भगवद गीता पढ़ने और अपने तरीक़ों की त्रुटि को महसूस करने के बाद वस्तुओं को वापस करने का फ़ैसला किया। उसने कहा कि चोरी के बाद से लगातार उसके सपने में भगवान आ रहे थे। इससे उसकी बेचैनी बढ़ गई थी और इतने वर्षों से उसे कहीं सुकून नहीं मिला। परेशान होकर एक मुकुट, झुमके और अन्य गहने सहित चोरी हुए गहने मंदिर के दरवाजे पर छोडने के साथ चोर ने पश्चाताप व्यक्त करने वाला एक नोट और प्रायश्चित के रूप में अतिरिक्त 300 रुपये भी शामिल किए।
उड़ीसा के श्री देबेश चौरा महाप्रभु मंदिर की घटना
यह घटना ओडिशा के धौली के पास गोपीनाथपुर गांव में श्री देबेश चौरा महाप्रभु मंदिर में हुई है। इस नोट में चोर ने अपनी पहचान नहीं बताई है। वहीं मंदिर के पुजारी का कहना है कि उन्होंने 9 साल में गहने मिलने की सभी उम्मीदें छोड़ दी थी। शायद चोरी करने वाले को अपनी गलती का एहसास हुआ होगा इसलिए उसने सभी गहने वापस कर दिए। गहनों की वापसी से मंदिर के अधिकारियों और भक्तों को ख़ुशी और राहत मिली। चोर के कार्यों को भगवद गीता और उसकी शिक्षाओं की शक्ति के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है।