स्पैम कॉल्स से बढ़ती परेशानी! 2026 की पहली छमाही में ही 20.75 लाख से ज्यादा शिकायतें, पिछले साल के आंकड़े के करीब पहुंचा मामला
देश में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अनचाही कॉल और संदेश यानी अवांछित वाणिज्यिक संचार की समस्या भी लगातार गंभीर होती जा रही है। दूरसंचार विभाग के आंकड़े इस चुनौती की बढ़ती तस्वीर सामने रखते हैं। राज्यसभा में दूरसंचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 के बाद से अनचाही कॉल और संदेशों को लेकर मिलने वाली शिकायतों में लगातार वृद्धि हुई है। सबसे चिंताजनक स्थिति वर्ष 2026 की पहली छमाही में दिखाई दे रही है, जब महज छह महीनों में ही 20.75 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। यह संख्या वर्ष 2025 में दर्ज हुई कुल 31.09 लाख शिकायतों की करीब 70 प्रतिशत है। यानी अगर शिकायतों की यही रफ्तार वर्ष की दूसरी छमाही में भी बनी रहती है, तो 2026 में कुल शिकायतों का आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी ऊपर जा सकता है।
अनचाही कॉल और संदेशों का बढ़ता जाल
मोबाइल फोन आज बैंकिंग, खरीदारी, सरकारी सेवाओं, कारोबार और व्यक्तिगत संपर्क का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसी वजह से उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए कंपनियां और कारोबारी बड़ी संख्या में फोन कॉल और संदेश भेजते हैं। इनमें से वैध और उपभोक्ता की सहमति वाले संदेशों के साथ-साथ ऐसे कॉल और संदेश भी शामिल होते हैं, जिन्हें उपभोक्ता ने न तो मांगा होता है और न ही उनकी अनुमति दी होती है। यही अनचाहा संचार आम तौर पर परेशानी का बड़ा कारण बनता है।
डिजिटल भुगतान अहम वजह
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 के बाद से शिकायतों में बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार दिखाई देता है। इसका एक बड़ा कारण मोबाइल आधारित सेवाओं और डिजिटल लेनदेन का तेजी से विस्तार भी माना जा सकता है। जैसे-जैसे अधिक लोग मोबाइल नंबर का इस्तेमाल बैंकिंग, बीमा, खरीदारी, ऋण, निवेश और विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के लिए करने लगे हैं, वैसे-वैसे व्यावसायिक संदेश और प्रचारात्मक कॉल की संख्या भी बढ़ी है। हालांकि हर प्रचारात्मक संदेश या कॉल अनधिकृत नहीं होता। उपभोक्ता की सहमति के आधार पर भेजे गए वैध संदेश और नियमों का पालन करने वाली व्यावसायिक कॉल अलग श्रेणी में आती हैं। समस्या तब पैदा होती है जब बिना उचित अनुमति के बार-बार फोन किया जाता है या ऐसे संदेश भेजे जाते हैं जिनकी उपभोक्ता ने मांग नहीं की है।
साइबर धोखाधड़ी का जरिया
अनचाही कॉल का असर केवल परेशानी तक सीमित नहीं है। कई बार ऐसे फोन कॉल लोगों को वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बनाने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं। बैंक खाता बंद होने, बिजली कनेक्शन काटे जाने, मोबाइल सेवा बंद होने, ऋण मंजूर होने, बीमा पॉलिसी में बदलाव, पुरस्कार मिलने या किसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी मांगी जाती है। कई मामलों में जालसाज स्वयं को बैंक, दूरसंचार कंपनी, बीमा कंपनी या सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बताकर बात करते हैं। उपभोक्ता यदि अनजाने में अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर दे तो उसके बैंक खाते या डिजिटल भुगतान माध्यम से आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए अनचाही कॉल की बढ़ती संख्या को केवल दूरसंचार क्षेत्र की समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता; इसका संबंध डिजिटल सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी से भी जुड़ गया है।
मैसेज के जरिए ठगी
इसी तरह अनचाहे संदेशों में भी अलग-अलग तरह के प्रचार और संदिग्ध लिंक भेजे जाते हैं। कुछ संदेशों में आकर्षक ऑफर का लालच दिया जाता है, जबकि कुछ में तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाता है। संदेश में दिए गए किसी लिंक पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ता को फर्जी वेबसाइट पर ले जाया जा सकता है, जहां उससे व्यक्तिगत जानकारी या भुगतान संबंधी विवरण मांगा जा सकता है। शिकायतों में बढ़ोतरी यह भी बताती है कि उपभोक्ता अब अनचाहे संचार के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक जागरूक होकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। यह पहलू सकारात्मक है, क्योंकि शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार होने से नियामक संस्थाओं को समस्या के स्तर को समझने और नियमों के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
शिकायत तंत्र का करें उपयोग
दूरसंचार क्षेत्र में अनचाही कॉल और संदेशों पर नियंत्रण के लिए नियामकीय व्यवस्था पहले से मौजूद है। दूरसंचार नियामक और दूरसंचार विभाग समय-समय पर अवांछित वाणिज्यिक संचार पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश और प्रक्रियाएं जारी करते रहे हैं। उपभोक्ताओं को भी ऐसे कॉल और संदेशों की शिकायत करने के लिए उपलब्ध शिकायत तंत्र का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल तकनीकी उपायों से इस समस्या को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। इसके लिए दूरसंचार कंपनियों, नियामक संस्थाओं, बैंकों, डिजिटल मंचों और स्वयं उपभोक्ताओं को मिलकर काम करना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन आधारित प्रणालियों की मदद से संदिग्ध नंबरों और संदेशों की पहचान करने तथा उन्हें समय रहते रोकने की क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।
मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए भी कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। किसी अनजान नंबर से आए फोन पर बैंक खाते, एटीएम, पासवर्ड, एक बार इस्तेमाल होने वाला पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। बैंक या किसी सरकारी विभाग के नाम से आने वाले संदेश में दिए गए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति फोन पर तत्काल भुगतान करने या किसी एप को डाउनलोड करने के लिए दबाव बनाए, तो बातचीत तुरंत समाप्त कर संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
नंबर साझा करने से बचें
अनचाही कॉल और संदेशों की बढ़ती शिकायतों के बीच एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर व्यावसायिक संस्थाओं तक कैसे पहुंचता है। कई बार लोग किसी सेवा के लिए पंजीकरण करते समय अपनी संपर्क जानकारी साझा करते हैं। विभिन्न सेवाओं और मंचों पर नंबर उपलब्ध होने के बाद उसका व्यावसायिक उपयोग किस सीमा तक किया जा रहा है, इस पर निगरानी और डेटा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आंकड़ों ने बताई समस्या की गंभीरता
वर्ष 2026 की पहली छमाही के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं। छह महीने में 20.75 लाख से अधिक शिकायतें और पूरे वर्ष 2025 में 31.09 लाख शिकायतें इस बात का संकेत हैं कि अनचाही कॉल और संदेश अब बड़े पैमाने पर उपभोक्ता अनुभव को प्रभावित कर रहे हैं। यदि दूसरी छमाही में भी शिकायतों की संख्या इसी गति से बढ़ती है, तो वर्ष 2026 का आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से अधिक हो सकता है। हालांकि शिकायतों की संख्या को सीधे तौर पर अनचाही कॉल और संदेशों की वास्तविक कुल संख्या नहीं माना जा सकता। बहुत से लोग परेशान होने के बावजूद शिकायत दर्ज नहीं करते। इसलिए वास्तविक समस्या का दायरा दर्ज शिकायतों से कहीं बड़ा भी हो सकता है। दूसरी ओर, शिकायतों में वृद्धि जागरूकता और शिकायत व्यवस्था के बेहतर इस्तेमाल का परिणाम भी हो सकती है।
स्पैम नंबर्स पर सख्त कार्यवाई
अब जरूरत इस बात की है कि शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थाओं और नंबरों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही वैध व्यावसायिक संचार और अवैध अनचाहे संचार के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं की सहमति का सम्मान हो और कारोबारियों के वैध संचार पर अनावश्यक असर न पड़े।
सुविधा के साथ मुफ़्त मिली परेशानी
मोबाइल फोन ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन अनचाही कॉल और संदेश उसी सुविधा को कई बार परेशानी में बदल देते हैं। 2026 की पहली छमाही में 20.75 लाख से अधिक शिकायतों का आंकड़ा बताता है कि यह समस्या अब छोटी-मोटी असुविधा नहीं रह गई है। उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा, डिजिटल सुरक्षा और सुरक्षित दूरसंचार व्यवस्था के लिए अनचाहे संचार पर प्रभावी नियंत्रण आने वाले समय की बड़ी जरूरत बन चुका है।
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