नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस: गरीबी और असमानता के खिलाफ वैश्विक संकल्प का प्रतीक
18 जुलाई को दुनिया भर में मनाया जाता है नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस, इस वर्ष की थीम—“It’s Still in Our Hands to Combat Poverty and Inequity”
प्रत्येक वर्ष 18 जुलाई को विश्व समुदाय नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस (Nelson Mandela International Day) मनाता है। यह दिन दक्षिण अफ्रीका के महान स्वतंत्रता सेनानी, रंगभेद विरोधी आंदोलन के अग्रदूत और देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य उनके जीवन, संघर्ष, सेवा, समानता और मानवाधिकारों के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेना है।
गरीबी असामानता के खिलाफ आंदोलन
इस वर्ष 2026 की थीम “It’s Still in Our Hands to Combat Poverty and Inequity” अर्थात “गरीबी और असमानता से लड़ना अब भी हमारे हाथों में है” रखी गई है। यह संदेश दुनिया को याद दिलाता है कि बेहतर समाज का निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी, सेवा-भाव, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व से ही संभव है।
कौन थे नेल्सन मंडेला?
नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका के म्वेज़ो गांव में हुआ था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में दशकों तक चले रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ संघर्ष किया। समान अधिकारों और लोकतंत्र की मांग करने के कारण उन्हें लगभग 27 वर्ष तक जेल में रहना पड़ा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हिंसा के बजाय संवाद, मेल-मिलाप और लोकतांत्रिक मूल्यों का मार्ग चुना।1994 में दक्षिण अफ्रीका में लोकतांत्रिक चुनाव होने के बाद वे देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और नस्लीय भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए।
संयुक्त राष्ट्र ने क्यों शुरू किया यह दिवस?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2009 में 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया। इसका उद्देश्य मंडेला के मानवाधिकार, शांति, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समानता के लिए किए गए योगदान को सम्मान देना था। संयुक्त राष्ट्र लोगों से आह्वान करता है कि वे इस दिन कम से कम 67 मिनट समाज सेवा के लिए समर्पित करें। यह 67 मिनट मंडेला द्वारा सार्वजनिक जीवन में मानवता की सेवा के लिए समर्पित लगभग 67 वर्षों का प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष की थीम का संदेश
इस वर्ष की थीम दुनिया के सामने मौजूद दो सबसे बड़ी चुनौतियों, गरीबी और असमानता की ओर ध्यान आकर्षित करती है। आज भी करोड़ों लोग भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मानजनक जीवन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। आर्थिक असमानता, सामाजिक भेदभाव और अवसरों की कमी विकास की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। थीम का संदेश है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे सकारात्मक कदम उठाए, तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है। किसी जरूरतमंद की सहायता करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।
67 मिनट सेवा अभियान का महत्व
नेल्सन मंडेला दिवस पर विश्वभर में लोग विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। इनमें गरीबों को भोजन उपलब्ध कराना, रक्तदान शिविर आयोजित करना, वृक्षारोपण, स्कूलों में स्वैच्छिक शिक्षण, अस्पतालों और वृद्धाश्रमों में सेवा, स्वच्छता अभियान तथा सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख हैं। इस अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना है कि समाज में बदलाव केवल बड़े निर्णयों से नहीं बल्कि छोटे-छोटे मानवीय प्रयासों से भी आता है।
भारत और मंडेला का विशेष संबंध
भारत और नेल्सन मंडेला के संबंध ऐतिहासिक रहे हैं। महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और न्याय के विचारों से मंडेला गहराई से प्रभावित थे। उन्होंने कई अवसरों पर स्वीकार किया कि गांधीजी के संघर्ष ने उन्हें प्रेरित किया। भारत सरकार ने वर्ष 1990 में नेल्सन मंडेला को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच गहरे ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।
आज के समय में मंडेला के विचारों की प्रासंगिकता
विश्व आज भी गरीबी, युद्ध, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक असमानता, नस्लीय भेदभाव और आर्थिक विषमता जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में नेल्सन मंडेला के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। उनका मानना था कि शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिससे दुनिया को बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी समाज की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और वंचित लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है।
विश्व समुदाय के लिए संदेश
इस वर्ष का नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस केवल एक महान नेता को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का भी समय है। यह दिवस याद दिलाता है कि गरीबी और असमानता जैसी समस्याओं का समाधान केवल नीतियों से नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सेवा की भावना से संभव है। “It’s now in your hands” और “It’s Still in Our Hands to Combat Poverty and Inequity” का संदेश हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाए, तो एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और समान अवसरों वाला समाज बनाया जा सकता है। यही नेल्सन मंडेला की सबसे बड़ी विरासत और इस दिवस का मूल संदेश है।
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