कचरे से ऊर्जा, गांवों में समृद्धि! 23,731 करोड़ की GOBARdhan योजना को कैबिनेट की मंजूरी

The CSR Journal Magazine

 GOBARdhan योजना को कैबिनेट की मंजूरी, CBG उत्पादन को करीब 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य, गोबर, कृषि अवशेष, प्रेसमड और नगर निकायों के जैविक कचरे से बनेगा स्वच्छ ईंधन

भारत में कचरे को समस्या के बजाय आर्थिक संसाधन में बदलने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को GOBARdhan (Galvanising Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना को राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना के रूप में मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए कुल ₹23,731 करोड़ का परिव्यय रखा गया है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य देश में Compressed Bio-Gas यानी CBG के घरेलू उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाना और इसके लिए बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करना है। यह योजना केवल बायोगैस उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके जरिए कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर, गन्ना उद्योग से निकलने वाला प्रेसमड, नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और ग्रामीण आय के स्रोत में बदलने की कोशिश की जाएगी। सरकार के अनुसार इससे भारत में एक मजबूत Circular Bioeconomy यानी चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।

CBG को ऊर्जा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाने की तैयारी

Compressed Bio-Gas को भविष्य के ऊर्जा मिश्रण में महत्वपूर्ण भूमिका देने की योजना है। CBG शुद्ध किया हुआ बायोगैस है, जिसे उच्च दबाव पर संपीड़ित किया जाता है। इसके गुण और ऊर्जा क्षमता प्राकृतिक गैस के समान होने के कारण इसका इस्तेमाल CNG के साथ मिश्रण या उसके विकल्प के तौर पर परिवहन, उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि देश में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तैयार होने वाला CBG आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब आधा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए घरेलू जैविक संसाधनों से गैस तैयार करने की क्षमता बढ़ने से आयात बिल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

योजना में क्या बदला, क्यों महत्वपूर्ण है?

GOBARdhan योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार CBG उद्योग के सामने मौजूद कई पुरानी चुनौतियों को एक साथ दूर करने की कोशिश कर रही है। CBG परियोजनाओं के सामने अब तक प्रमुख समस्याओं में कच्चे माल की नियमित उपलब्धता, शुरुआती पूंजी की अधिक जरूरत, स्थानीय वितरण नेटवर्क की कमी, उत्पाद की सुनिश्चित बिक्री और परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाना शामिल रहे हैं। नई योजना में सुनिश्चित खरीद, स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और ऋण सहायताजैसे उपायों को एकीकृत ढांचे में लाने का प्रयास किया गया है। इससे परियोजना लगाने वाली कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को लंबे समय के लिए बेहतर कारोबारी निश्चितता मिलने की उम्मीद है।

CBG की खरीद की होगी सुनिश्चित व्यवस्था

योजना के तहत CBG उत्पादकों के लिए एक विशेष Offtake Assurance Framework तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संयंत्रों में तैयार गैस के लिए बाजार उपलब्ध रहे। City Gas Distribution यानी CGD कंपनियां CBG की खरीद करेंगी। यह खरीद CNG और घरेलू PNG में CBG blending obligations को पूरा करने में मदद करेगी।सरकार ने blending के लिए चरणबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए हैं—
  • 2026-27 में 3 प्रतिशत
  • 2027-28 में 4 प्रतिशत
  • 2028-29 से 5 प्रतिशत
इस व्यवस्था का महत्व इसलिए भी है क्योंकि CBG संयंत्र लगाने वाले निवेशकों को यह भरोसा मिलेगा कि उत्पादित गैस के लिए दीर्घकालिक बाजार मौजूद है। इससे परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता और बैंक से ऋण मिलने की संभावना बेहतर हो सकती है।

₹2,110 प्रति MMBTU का स्थिर प्रशासित मूल्य

GOBARdhan योजना के तहत CBG क्षेत्र में मूल्य संबंधी अनिश्चितता कम करने के लिए एक स्थिर प्रशासित CBG मूल्य ₹2,110 प्रति Metric Million British Thermal Unit (MMBTU) निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार यह व्यवस्था उत्पादकों को लंबे समय के लिए राजस्व की बेहतर दृश्यता देगी, जबकि उपभोक्ताओं की affordability को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसका सीधा असर निवेशकों के निर्णय पर पड़ सकता है। किसी भी बड़े ऊर्जा संयंत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होता है कि तैयार उत्पाद कितनी कीमत पर और कितने समय तक बेचा जा सकेगा। खरीद और मूल्य निर्धारण की स्पष्ट व्यवस्था इस जोखिम को कम करने की कोशिश है।

गोबर से लेकर कृषि अवशेष तक बनेगा कच्चा माल

GOBARdhan के नाम में ही इसका उद्देश्य छिपा है—Galvanising Organic Bio-Agro Resources Dhan। योजना में कई प्रकार के जैविक संसाधनों को CBG उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की संभावना है। इनमें प्रमुख हैं—
पशुओं का गोबर- डेयरी और पशुपालन क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में उपलब्ध गोबर को बायोगैस और आगे CBG में बदला जा सकता है।
कृषि अवशेष- फसल कटाई के बाद बचने वाले जैविक अवशेषों को जलाने के बजाय ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रेसमड- चीनी मिलों से निकलने वाला प्रेसमड CBG उत्पादन के लिए उपयोगी जैविक फीडस्टॉक बन सकता है।
नगरपालिका का जैविक कचरा- शहरों में निकलने वाले गीले और जैविक कचरे को अलग करके बायोएनर्जी उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
अन्य बायोमास- क्षेत्र के अनुसार उपलब्ध दूसरे जैविक संसाधनों को भी इस मूल्य श्रृंखला में शामिल किया जा सकता है।
इस तरह योजना का उद्देश्य कचरे को लैंडफिल या खुले में फेंकने की बजाय उसे आर्थिक मूल्य वाले उत्पाद में बदलना है।

किसानों के लिए कैसे बदल सकती है तस्वीर?

GOBARdhan का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर महत्वपूर्ण हो सकता है। किसान और पशुपालक केवल कृषि उपज बेचने तक सीमित न रहकर जैविक संसाधनों की आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन सकते हैं। गोबर और कृषि अवशेष, जिन्हें कई बार बेकार समझा जाता है, अब CBG संयंत्रों के लिए फीडस्टॉक बन सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और संयंत्र संचालन से जुड़े रोजगार पैदा होने की संभावना है। CBG उत्पादन के बाद निकलने वाले जैविक अवशेष से जैविक खाद भी तैयार की जा सकती है। इससे एक ऐसी व्यवस्था बन सकती है जिसमें खेत से निकला जैविक संसाधन ऊर्जा संयंत्र तक पहुंचे, वहां से ईंधन और खाद तैयार हो तथा खाद दोबारा कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल हो। यानी एक ही संसाधन से ऊर्जा, खाद और आय—तीनों पैदा करने की संभावना बनती है।

ग्रामीण भारत में रोजगार के नए अवसर

बड़े CBG संयंत्रों की स्थापना के साथ केवल प्लांट में ही रोजगार नहीं बनेंगे। इसके आसपास एक पूरी स्थानीय सप्लाई चेन विकसित हो सकती है। गोबर और बायोमास का संग्रह, छंटाई, परिवहन, भंडारण, मशीनरी संचालन, संयंत्र रखरखाव, गैस शुद्धीकरण, जैविक खाद का उत्पादन और उसकी बिक्री जैसे क्षेत्रों में रोजगार पैदा हो सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। सरकार की व्यापक सोच यह है कि जैविक कचरे को केवल निपटाने की वस्तु न मानकर उसे ग्रामीण आर्थिक संपदा बनाया जाए।

शहरों के कचरे की समस्या का भी समाधान

भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में गीला कचरा बड़ी चुनौती है। यदि जैविक और गैर-जैविक कचरे को स्रोत पर अलग किया जाए और जैविक हिस्से को CBG संयंत्रों तक पहुंचाया जाए तो नगर निकायों पर कचरा प्रबंधन का दबाव कम किया जा सकता है। इससे लैंडफिल में जाने वाले जैविक कचरे की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कचरे से मीथेन जैसी गैस को नियंत्रित तरीके से पकड़कर ऊर्जा में बदला जा सकता है। यही कारण है कि GOBARdhan को केवल ऊर्जा योजना नहीं बल्कि Waste-to-Wealth और Waste-to-Energy मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है।

पाइपलाइन नेटवर्क को मिलेगा बढ़ावा

CBG का उत्पादन कर लेना पर्याप्त नहीं है। गैस को बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। इसी समस्या को देखते हुए योजना में पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी महत्व दिया गया है। यदि CBG संयंत्रों को मौजूदा गैस नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके तो उत्पादकों को अपने उत्पाद के लिए बड़े बाजार तक पहुंच मिल सकती है। इससे CBG को देश के मौजूदा गैस इकोसिस्टम में शामिल करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

ऋण और पूंजी जुटाने में मदद

CBG संयंत्रों की स्थापना में शुरुआती पूंजी की जरूरत काफी अधिक होती है। इसके अलावा कच्चे माल की आपूर्ति और उत्पाद की बिक्री से जुड़े जोखिमों के कारण बैंक और वित्तीय संस्थान भी परियोजनाओं के जोखिम का आकलन करते हैं। GOBARdhan में पूंजी सहायता और credit support के प्रावधान इसी चुनौती को कम करने के लिए हैं। ऋण गारंटी जैसी व्यवस्था से योग्य परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। इससे निजी क्षेत्र के निवेश को गति मिल सकती है।

पहले से तैयार हो चुका है आधार

सरकार का कहना है कि देश में CBG क्षेत्र को विकसित करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई पहल की गई हैं। इनमें SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation), Market Development Assistance यानी MDA, Biomass Aggregation Machinery यानी BAM, Development of Pipeline Infrastructure यानी DPI और National Bioenergy Programme के तहत CBG plants के लिए Central Financial Assistance जैसी पहल शामिल हैं। सरकारी जानकारी के मुताबिक इन पहलों के माध्यम से 200 से अधिक CBG संयंत्र चालू हो चुके हैं और CBG उत्पादन तथा उसकी खरीद की व्यवस्था का आधार तैयार किया जा चुका है। अब नई GOBARdhan योजना इन्हीं प्रयासों को एकीकृत करके बड़े पैमाने पर विस्तार देने का प्रयास करेगी।

योजना का लक्ष्य सिर्फ गैस उत्पादन नहीं

GOBARdhan को केवल CBG उत्पादन बढ़ाने की योजना मानना इसके व्यापक उद्देश्य को सीमित करना होगा। इसके पीछे चार बड़े लक्ष्य दिखाई देते हैं—
पहला—ऊर्जा सुरक्षा- घरेलू स्तर पर स्वच्छ गैस उत्पादन बढ़ाकर आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करना।
दूसरा—कचरा प्रबंधन– जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना।
तीसरा—ग्रामीण अर्थव्यवस्था- किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए नई आय और रोजगार की संभावनाएं बनाना।
चौथा—पर्यावरण संरक्षण- कचरे के बेहतर प्रबंधन और जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना।

भारत की सर्कुलर बायोइकोनॉमी को मिलेगा आधार

सर्कुलर इकोनॉमी का मूल विचार यह है कि किसी संसाधन को इस्तेमाल के बाद बेकार न माना जाए, बल्कि उसे दोबारा आर्थिक चक्र में शामिल किया जाए। GOBARdhan इसी विचार को जैविक संसाधनों के क्षेत्र में लागू करने का प्रयास है। कृषि से निकला अवशेष → CBG संयंत्र → स्वच्छ गैस + जैविक खाद → ऊर्जा और कृषि में दोबारा उपयोग।इस मॉडल में एक क्षेत्र का अपशिष्ट दूसरे क्षेत्र के लिए कच्चा माल बन जाता है। यही भारत की भविष्य की Circular Bioeconomy का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

अब असली चुनौती क्रियान्वयन की

₹23,731 करोड़ की योजना और बड़े लक्ष्य के बावजूद सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। CBG उद्योग के लिए नियमित और गुणवत्तापूर्ण फीडस्टॉक की उपलब्धता, किसानों और स्थानीय निकायों के साथ मजबूत आपूर्ति व्यवस्था, संयंत्रों की तकनीकी क्षमता, वित्तीय अनुशासन, गैस नेटवर्क से कनेक्टिविटी और तैयार CBG की समय पर खरीद बेहद महत्वपूर्ण होगी। नगर निकायों में गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग संग्रह भी जरूरी होगा। यदि जैविक कचरे में प्लास्टिक और अन्य अवांछित सामग्री मिलती रही तो CBG संयंत्रों की दक्षता और परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती है। इसी तरह छोटे किसानों और पशुपालकों को मूल्य श्रृंखला में वास्तविक लाभ पहुंचाना भी योजना की सफलता का अहम पैमाना होगा।

2035-36 तक बड़ा बदलाव लाने का लक्ष्य

सरकार ने GOBARdhan को दस वर्ष के लिए लागू करने का फैसला किया है। 2026-27 से 2035-36 के बीच योजना का उद्देश्य CBG उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाने के साथ-साथ निजी निवेश, ग्रामीण रोजगार और जैविक संसाधनों के बेहतर उपयोग को गति देना है। यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर सफल होता है तो आने वाले वर्षों में भारत के गांवों और शहरों में कचरे को देखने का नजरिया बदल सकता है। जिस गोबर, कृषि अवशेष या गीले कचरे को आज निपटान की समस्या माना जाता है, वही भविष्य में ऊर्जा, खाद और आय का स्रोत बन सकता है।

किसानों से लेकर उद्योगों तक को मिलेगा फायदा

GOBARdhan योजना भारत की ऊर्जा नीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कचरा प्रबंधन को एक साथ जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी पहल है। ₹23,731 करोड़ के निवेश, सुनिश्चित CBG खरीद, स्थिर मूल्य व्यवस्था, पूंजी सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और ऋण समर्थन के जरिए सरकार CBG क्षेत्र को अधिक भरोसेमंद और निवेश योग्य बनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले वर्षों में इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि कागज पर बनी यह व्यवस्था खेत, गांव, नगर निकाय और उद्योग तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है। अगर फीडस्टॉक की नियमित आपूर्ति, तकनीक, वित्त और बाजार को एक साथ जोड़ा गया तो GOBARdhan भारत में “Waste to Wealth” की अवधारणा को बड़े पैमाने पर वास्तविकता में बदल सकती है। यानी आने वाले दशक में भारत के लिए संदेश साफ है—कचरा सिर्फ कचरा नहीं, ऊर्जा और आर्थिक समृद्धि का संसाधन भी है।

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