93 मौतें और NEET का बढ़ता दबाव: जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी

The CSR Journal Magazine

93 मौतें और NEET का बढ़ता दबाव, प्रदर्शनकारियों का जंतर-मंतर पर हंगामा

NEET परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए और देश में अब तक हुए 93 पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों का भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के बढ़ते दबाव के कारण युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है।

NEET की परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले पांच सालों में NEET से जुड़े 93 छात्रों ने आत्महत्या की है। यह आंकड़ा इस समय पर आया है जब छात्र परीक्षा प्रणाली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कोचिंग के बेहतरीन दबाव को लेकर आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारी सिर्फ परीक्षा की पारदर्शिता की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंताओं का इजहार कर रहे हैं।

आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अब तक 20 आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। 2025 सबसे खराब साल रहा जब 32 छात्रों ने अपनी जान गंवाई। ऐसे में NEET परीक्षा से जुड़ी समस्याएं और मानसिक दबाव एक गंभीर मुद्दा बन गया है। यह केवल एक परीक्षा के विवाद की बात नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।

किस राज्य से हैं सबसे ज्यादा मामले?

NEET के लिए बढ़ते मानसिक दबाव की तस्वीर नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित एक अध्ययन से सामने आई है। 2018 से 2020 के बीच हुए 32 आत्महत्या के मामलों में से सबसे ज्यादा 15 मामले तमिलनाडु से हैं। इसके बाद बिहार में 4 मामले दर्ज किए गए हैं। अध्ययन में पता चला कि पढ़ाई और परीक्षा का दबाव 65.6% मामलों में प्रमुख कारण रहा, जबकि सामाजिक अपेक्षाएं भी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही हैं।

NEET का बढ़ता दबाव

मीडिया के विश्लेषण के अनुसार, 2021 से 2026 के बीच NEET से जुड़े तनाव के कारण कम से कम 93 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें 2025 सबसे खराब वर्ष रहा जब 32 छात्रों ने अपनी जीवन समाप्त कर ली।

पेपर लीक और री-टेस्ट के बीच मौतें

परीक्षा निरस्त होने और 21 जून को दोबारा परीक्षा (Re-NEET) की घोषणा के बीच के मात्र 37 से 46 दिनों के अंतराल में ही देश के विभिन्न राज्यों से 11 से 12 छात्रों ने अपनी जान गंवा दी थी। हाल ही में जुलाई के मध्य में NEET-UG के फाइनल नतीजे आने के बाद भी ओडिशा और अन्य राज्यों से छात्रों के आत्महत्या करने की खबरें आई हैं, जिसके बाद इस साल का कुल आंकड़ा 20 के पार पहुँच चुका है।

पेपर लीक से बढ़ी चिंता

NEET-UG 2026 के पेपर लीक विवाद ने चिंता को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा रद्द होने के बाद 37 दिनों में 12 छात्रों ने आत्महत्या की। ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लगातार परीक्षाओं में अनियमितता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता बढ़ रही है।

छात्रों की मांगें क्या हैं?

जंतर-मंतर पर छात्र सिर्फ परीक्षा विवादों के खिलाफ ही नहीं बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, जिससे छात्रों का विश्वास बना रहे और तनाव और असुरक्षा का वातावरण समाप्त हो। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई है, लेकिन अभी तक आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।

NEET का महत्व और चुनौतियाँ

NEET भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं। लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीमित सीटें उपलब्ध हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है। छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं, जिससे असफलता का डर और आर्थिक बोझ बढ़ता है। ऐसे में पेपर लीक होने से छात्रों का मनोबल पूरी तरह से टूट जाता है।

NTA की जवाबदेही

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षाओं में शुचिता बनाए रखने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्र और अभिभावक पूरी व्यवस्था में बड़े बदलावों की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे की गूंज भारतीय संसद में भी देखी गई। राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेताओं (जैसे मल्लिकार्जुन खड़गे) ने छात्रों पर हुए बल प्रयोग और NEET धांधली पर चर्चा की मांग की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। इस पूरे विवाद के बीच सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य को प्रभावित होने से बचाने के लिए नीट पुनरीक्षा (NEET re-examination) को प्राथमिकता दी गई और परिणाम घोषित किए गए। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं और व्यवस्था में पूर्ण सुधार व पारदर्शिता की मांग पर डटे हुए हैं।

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