मेदांता में सोनम वांगचुक से मिले जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह, दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

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मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मिले नड्डा-जितेंद्र सिंह, जानें खुलासा

दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। नीट (NEET) और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं व पेपर लीक के खिलाफ पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक से सरकार की यह मुलाकात जारी गतिरोध को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी राजनीतिक पहल मानी जा रही है।  

दिल्ली हाई कोर्ट का अहम आदेश

सोनम वांगचुक, जो जलवायु कार्यकर्ता हैं, को दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें बीते 24-25 दिनों से अनशन पर रहने के कारण स्वास्थ्य में गिरावट आई थी। यही वजह थी कि कोर्ट ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए मेदांता में भेजने का फैसला किया।

अस्पताल चयन का अधिकार

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

मेदांता शिफ्ट करने की अनुमति

दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए गए वांगचुक को तुरंत मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया। हाई कोर्ट ने मेदांता प्रबंधन को उनके निरंतर स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज के लिए वरिष्ठ विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए।

अस्पताल से स्वास्थ्य अपडेट

मेदांता के आईसीयू 8 में डॉ. सुशीला कटारिया की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत स्थिर है, हालांकि अनशन के कारण शरीर में पोटेशियम का स्तर सामान्य से कम पाया गया है और पैन्साइटोपेनिया की समस्या बनी हुई है।

अनशन जारी रखने का संकल्प

अस्पताल स्थानांतरित किए जाने के बावजूद, सोनम वांगचुक ने पेपर लीक के विरोध में छात्रों के समर्थन में अपनी भूख हड़ताल वापस नहीं ली है और उनका अनशन जारी है। अस्पताल के आसपास भारी सुरक्षा बल और वज्र वाहन तैनात किए गए हैं, साथ ही बिना उचित पहचान पत्र के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम नीट परीक्षा विवाद के बीच छात्रों और सामाजिक संगठनों के बढ़ते विरोध के मद्देनजर केंद्र सरकार के लिए बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात

मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोनम वांगचुक से मुलाकात की। बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें नड्डा ने वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी ली। बैठक के दौरान, केंद्र सरकार ने वांगचुक को आश्वासन दिया कि शिक्षा सुधारों पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नड्डा और सिंह ने उन्हें बताया कि सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा शुरू करने के लिए तैयार है।

वांगचुक को दिया भरोसा

सरकार ने वांगचुक से अनुरोध किया है कि वे छात्रों से अपील करें कि वे भरोसा रखें और कोई आंदोलनात्मक कदम न उठाएं। इस तरह के भरोसे से वांगचुक का महत्वपूर्ण संदेश युवा पीढ़ी के लिए होगा। मेदांता अस्पताल में लाने से पहले, जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। वांगचुक को अस्पताल के ICU-8 में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी सेहत पर निगरानी रखी जाएगी।

कोर्ट की कार्यवाही

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका पर फैसला सुनाया। उन्होंने कोर्ट से यह अनुरोध किया था कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए। और अंततः यह आदेश मेदांता के लिए जारी किया गया।वांगचुक के स्वास्थ्य के हालात पर ध्यान देते हुए, मेदांता का स्वास्थ्य दल सफदरजंग और एम्स के डॉक्टरों के साथ मिलकर उनकी स्थिति का विवेचन करेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार वांगचुक के स्वास्थ्य को गंभीरता से ले रही है।

सोनम वांगचुक से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मुलाकात के मायने

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से आधी रात को हुई मुलाकात देश की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण है। नीट (NEET) और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक व कथित अनियमितताओं के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक से सरकार के शीर्ष मंत्रियों की इस बातचीत के कई गहरे मायने (Political Significance) निकाले जा रहे हैं।

गतिरोध तोड़ने और बातचीत की बड़ी पहल

अब तक इस आंदोलन को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधा संवाद नहीं हो पा रहा था। मेदांता अस्पताल जाकर मंत्रियों का वांगचुक से एक घंटे से अधिक समय तक चर्चा करना यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार इस बड़े गतिरोध को बातचीत के जरिए जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है।

संसद में चर्चा कराने का बड़ा आश्वासन

मुलाकात का सबसे बड़ा राजनीतिक परिणाम यह रहा कि मंत्रियों ने सोनम वांगचुक को भरोसा दिलाया है कि सरकार देश के एजुकेशन सिस्टम में सुधार और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर संसद में विस्तार से चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। वांगचुक की भी यह प्रमुख मांग थी कि इस विषय को संसद के पटल पर गंभीरता से उठाया जाए।

कानून-व्यवस्था और आंदोलन को उग्र होने से रोकना

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो रहा है। सरकार ने वांगचुक से अपील की है कि वे छात्रों से धैर्य बनाए रखने और कोई भी उग्र कदम न उठाने की बात कहें, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।

सरकार के भीतर उच्च स्तरीय समन्वय

मेदांता अस्पताल जाने से पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर 4 घंटे से भी लंबी बैठक की थी। इसके तुरंत बाद सरकार के दो बड़े मंत्रियों का वांगचुक के पास जाना यह साफ करता है कि यह कदम पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति और शीर्ष स्तर (PMO और गृह मंत्रालय) की मंजूरी के बाद उठाया गया है।

विपक्ष के दबाव को कम करने की रणनीति

संसद सत्र के दौरान विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के इस रुख के बाद केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्षी नेताओं (जैसे संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के माध्यम से राहुल गांधी) को भी सूचित किया है कि सरकार संसद में चर्चा की मांग पर सहमत हो गई है। इससे विपक्ष के तीखे हमलों की धार को कम करने में मदद मिल सकती है।

मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता का संदेश

दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर वांगचुक को सफदरजंग से मेदांता शिफ्ट किया गया। अस्पताल बदलते ही सरकार के स्वास्थ्य मंत्री (जेपी नड्डा) का खुद आईसीयू में जाकर उनके स्वास्थ्य का हालचाल जानना जनता के बीच यह संदेश देता है कि मुलाकात केवल एक औपचारिक ‘कर्टसी कॉल’ नहीं थी, बल्कि नीट विवाद और छात्र आंदोलन से उपजे बड़े राजनीतिक संकट को टालने और बीच का रास्ता निकालने की दिशा में केंद्र सरकार का एक बड़ा डैमेज कंट्रोल और रणनीतिक कदम है।

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