देश के परीक्षा तंत्र पर माफिया का कब्जा: 12 साल में 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य दांव पर

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MP से UP और दिल्ली तक… कहां हुए सबसे ज्यादा पेपर लीक? 152 मामलों की पूरी रिपोर्ट

कांग्रेस द्वारा जारी की गई ‘छात्रों की गूंज’ रिपोर्ट के अनुसार, साल 2014 से 2026 के बीच देश में 152 पेपर लीक के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। इस राष्ट्रीय संकट में दिल्ली/केंद्रीय परीक्षाएं 38 मामलों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि राज्यों में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पेपर लीक सिंडिकेट के मुख्य गढ़ बने हुए हैं।

राष्ट्रीय परीक्षा तंत्र पर हावी परीक्षा माफिया

भारत का परीक्षा और भर्ती तंत्र इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े विश्वसनीयता संकट से गुजर रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से लेकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित परीक्षाओं तक, ‘पेपर लीक’ का एक ऐसा समानांतर सिंडिकेट खड़ा हो चुका है जो करोड़ों युवाओं के भविष्य का सौदा कर रहा है। विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा देश भर के आंकड़ों को संकलित कर जारी की गई एक विशेष रिपोर्ट ‘छात्रों की गूंज‘ ने इस परीक्षा माफिया के नेटवर्क को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। इस आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक से अधिक समय (2014 से 2026 तक) में देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 152 पेपर लीक की पुष्टि हुई है. यह आंकड़ा केवल बड़ी और सुर्खियों में रहने वाली परीक्षाओं का नहीं है, बल्कि इसमें राज्यों के छोटे-छोटे विभागों की क्लर्क भर्ती से लेकर देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) तक शामिल हैं।

देश का ‘लीक मीटर’: किस राज्य में कितनी बार बिका भविष्य?

जब इन 152 मामलों की राज्यवार सघन समीक्षा की जाती है, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियां और कुछ विशिष्ट राज्य इस धांधली के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं।

दिल्ली और केंद्रीय परीक्षाएं (38 मामले)

देश की राजधानी और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का संचालन करने वाली केंद्रीय संस्थाएं इस सूची में सबसे ऊपर हैं। केंद्रीय परीक्षाओं में कुल 38 मामले लीक के दर्ज किए गए हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG, UGC-NET और पूर्व में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से राष्ट्रीय स्तर पर हाहाकार मचा है। इंटरनेट, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे सुरक्षित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके इन परीक्षाओं के कोड और प्रश्नपत्रों को परीक्षा से चंद घंटे पहले करोड़ों रुपयों में बेचा गया।

राजस्थान और गुजरात (11-11 मामले)

राज्यों की श्रेणी में राजस्थान और गुजरात संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं, जहां क्रमशः 11-11 बड़े पेपर लीक के मामले आधिकारिक तौर पर सामने आए हैं। राजस्थान में पिछले सालों में शिक्षक भर्ती (REET), पुलिस कॉन्स्टेबल, पटवारी और वनरक्षक जैसी परीक्षाओं के पेपर पूरी तरह लीक हुए, जिसके कारण लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया। गुजरात में भी अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (GSSSB) की विभिन्न क्लर्क परीक्षाओं और सरकारी बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लगातार लीक होने के बाद सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।

उत्तर प्रदेश (10 मामले)

उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के 10 मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में हुई यूपी पुलिस (UP Police) सिपाही भर्ती परीक्षा और समीक्षा अधिकारी (RO/ARO) परीक्षा के पेपर लीक ने राज्य के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी। इसके अलावा पूर्व में यूपी-टीईटी (UPTET), लेखपाल और जूनियर इंजीनियर जैसी परीक्षाओं के पेपर भी लीक माफियाओं के हत्थे चढ़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश में इस रैकेट के तार अंतर-राज्यीय गिरोहों से जुड़े पाए गए हैं।

महाराष्ट्र (10 मामले)

भर्ती धांधली के मामले में महाराष्ट्र में भी 10 मामले उजागर हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की भर्ती परीक्षा, म्हाडा (MHADA) भर्ती और टीईटी (TET) परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर तकनीकी और भौतिक रूप से पेपर लीक होने की पुष्टि हुई थी, जिसमें कई बड़े अधिकारियों और निजी एजेंसियों को गिरफ्तार भी किया गया था।

मध्य प्रदेश (6 मामले)

मध्य प्रदेश का नाम आते ही ऐतिहासिक व्यापमं (Vyapam) घोटाला याद आता है। हालांकि हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नए प्रारूपों में एमपी में 6 पुख्ता मामले दर्ज हैं, जिनमें नर्सिंग कॉलेज मान्यता घोटाला, पटवारी भर्ती परीक्षा में हुई धांधली और कृषि विस्तार अधिकारी परीक्षा के पेपर लीक प्रमुख हैं। मध्य प्रदेश में परीक्षा माफिया ने तकनीकी प्रणालियों में सेंध लगाने में महारत हासिल कर ली है।

7.5 करोड़ छात्रों का भविष्य अधर में: ‘जीरो’ कनविक्शन रेट

इस पूरी रिपोर्ट का सबसे स्याह और चिंताजनक पहलू यह है कि परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सरकारी तंत्र की कार्रवाई केवल फाइलों तक सीमित है। इन 152 पेपर लीक की घटनाओं के कारण देश के 7.5 करोड़ से अधिक छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।  कई परीक्षाओं को बार-बार रद्द करना पड़ा और दोबारा परीक्षा (Retest) आयोजित करनी पड़ी। इस रिपोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने दावा किया है कि इस पूरे तंत्र में सजा की दर शून्य (Zero Percent) है। पकड़े गए आरोपी जमानत पर बाहर आ जाते हैं और दोबारा नया सिंडिकेट खड़ा कर लेते हैं।

छात्रों का मानसिक और आर्थिक शोषण

एक छात्र जब दूर-दराज के गांव से आकर बड़े शहर में किराये पर कमरा लेता है, कोचिंग की भारी फीस भरता है, और परीक्षा के दिन पता चलता है कि पेपर लीक हो गया, तो वह केवल आर्थिक रूप से नहीं टूटता, बल्कि मानसिक रूप से भी अवसाद में चला जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस परीक्षा तंत्र की विफलता और अवसाद के चलते कई होनहार छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम भी उठाया है।

परीक्षा माफिया का ‘मेन्यू कार्ड’ और हाई-टेक तकनीक

देहरादून में छात्रों से संवाद के दौरान इस बात का विशेष उल्लेख किया गया कि आज का पेपर लीक सिंडिकेट अब पारंपरिक फोटोकॉपी तक सीमित नहीं है। अब यह एक संगठित व्यापार बन चुका है, जिसका अपना एक ‘मेन्यू कार्ड’ है। यदि किसी के पास करोड़ों रुपये हैं, तो वह मेन्यू कार्ड की तरह चुन सकता है कि उसे किस परीक्षा का पेपर चाहिए। NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए 25 से 50 लाख रुपये प्रति छात्र तक के सौदे किए जाते हैं।

तकनीक का दुरुपयोग

टेलीग्राम चैनल्स, सिग्नल ऐप और डार्क वेब का इस्तेमाल करके पेपर्स को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड माध्यमों से ट्रांसफर किया जाता है।  परीक्षा केंद्रों पर सॉल्वर गैंग बैठाए जाते हैं, जो ब्लूटूथ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपकरणों से लैस होते हैं।

पेपर लीक का सबसे बड़ा मुद्दा, जिसने फूंकी बगावत की चिंगारी

साल 2026 में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) एक बार फिर बड़े पैमाने पर पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर संकट से घिरी है। यह विवाद 2024 के नीट घोटाले की याद दिलाता है, लेकिन इस बार सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अभूतपूर्व कड़े कदम उठाने पड़े हैं।

परीक्षा का आयोजन और लीक का खुलासा

3 मई 2026: देश भर में 22.7 लाख से अधिक चिकित्सा अभ्यर्थियों के लिए NEET-UG परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया, विशेषकर WhatsApp और Telegram पर एक तथाकथित ‘गेस पेपर’ (Guess Paper) वायरल हुआ। जांच एजेंसियों (जैसे राजस्थान SOG) की शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि इस वायरल PDF के 180 में से 120 सवाल हूबहू मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खा रहे थे। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा से करीब 42 से 48 घंटे पहले ही लीक प्रश्नपत्र को सीकर (राजस्थान), नासिक (महाराष्ट्र) और अन्य कोचिंग नेटवर्क्स में 10 लाख से 50 लाख रुपये प्रति छात्र तक में बेचा गया था।

NTA द्वारा परीक्षा रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला

12 मई 2026- पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने और चौतरफा चौकाने वाले खुलासों के बाद, NTA ने एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए 3 मई को आयोजित मुख्य NEET-UG 2026 परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता और अंतर-राज्यीय परीक्षा माफिया के नेटवर्क को देखते हुए इस पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी।

देशव्यापी री-एग्जाम (Re-NEET) और परिणाम

21 जून 2026- NTA ने देश के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर कड़ी सुरक्षा के बीच दोबारा परीक्षा (Re-Examination) आयोजित की। इस बार सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) की मदद से प्रश्नपत्रों को सुरक्षित नोडल हब तक पहुंचाया गया और परीक्षा केंद्रों पर जैमर्स व कड़े बायोमेट्रिक सुरक्षा घेरे तैनात किए गए।

2.7 लाख छात्रों ने छोड़ी परीक्षा

जहाँ मुख्य परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र बैठे थे, वहीं 21 जून की दोबारा परीक्षा में भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता के कारण रिकॉर्ड 2.7 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। कुल 19.99 लाख छात्र ही इस री-टेस्ट में शामिल हुए।
16 जुलाई 2026: NTA ने री-एग्जाम के परिणाम घोषित कर दिए, जिसमें लगभग 11.21 लाख उम्मीदवारों ने क्वालिफाई किया। मुख्य आरोपी यश यादव (जिसे सीबीआई ने गिरफ्तार किया था) का परिणाम NTA द्वारा रोक दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और कानूनी मोड़

सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच ने सुनवाई के दौरान NTA और सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि 2024 के नीट लीक के बाद डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित हाई-लेवल कमेटी ने सुधार के जो 95 सुझाव दिए थे, उन्हें पूरी तरह लागू क्यों नहीं किया गया और सुधारों के दावों के बावजूद 2026 में यह दोबारा कैसे हो गया?

याचिकाएं निष्प्रभावी

क्योंकि सरकार और NTA ने स्वेच्छा से परीक्षा रद्द करके दोबारा री-टेस्ट करवा लिया था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 के मध्य में परीक्षा पूरी तरह रद्द करने की पुरानी याचिकाओं को ‘निष्प्रभावी’ (Infructuous) घोषित कर दिया, क्योंकि छात्रों की मुख्य मांग (री-टेस्ट) पहले ही पूरी हो चुकी थी।

वर्तमान स्थिति और आगे का रोडमैप

सीबीआई लगातार इस रैकेट से जुड़े कोचिंग संचालकों, सॉल्वर गैंग और एनटीए के भीतर मौजूद कथित संदिग्धों को गिरफ्तार कर रही है (हाल ही में लातूर के प्रोफेसरों और मुख्य दलालों की जमानत का विरोध किया गया है)। इस बार-बार होने वाले लीक संकट से बचने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि अगले साल (2027) से NEET परीक्षा को पेन-पेपर मोड से बदलकर पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Exam) कर दिया जाएगा ताकि लॉजिस्टिक्स और फिजिकल लीक की गुंजाइश को खत्म किया जा सके। विपक्षी दल और छात्र संगठन (जैसे सीजेपी और अन्य कार्यकर्ता) दिल्ली के जंतर-मंतर पर अभी भी इस बात को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणालियों में आमूलचूल बदलाव किए जाएं।

व्यवस्था में सुधार की मांग और नया कानून

इस राष्ट्रीय महामारी को देखते हुए देश के छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और विभिन्न छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। केंद्र सरकार ने इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए संसद में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम’ (Public Examinations Act) को लागू किया है। इस कड़े कानून के तहत पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले संगठित गिरोहों के लिए 10 साल तक की जेल का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का नियम है। परीक्षा संचालित करने वाली जो सेवा प्रदाता कंपनियां (Service Providers) इसमें संलिप्त होंगी, उनकी संपत्ति कुर्क करने और उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का नियम है।

पूरा सिस्टम बदलने की जरूरत

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बना देने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं के भीतर व्यापक ढांचागत सुधार करने होंगे, राजनीतिक हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त करना होगा और परीक्षाओं को एक ही दिन कराने के बजाय प्रौद्योगिकी का उपयोग कर बहु-चरणों व यादृच्छिकीकरण (Randomization) के आधार पर सुरक्षित बनाना होगा।

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