इंदिरा गांधी के हत्यारे के बेटे को अमृतपाल की पार्टी ने दिया टिकट, पंजाब में चुनावी मैदान में सतवंत सिंह

The CSR Journal Magazine
खालिस्तान समर्थक और असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश रचने वाले केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपना पहला उम्मीदवार घोषित किया है। इस बड़े राजनीतिक फैसले की घोषणा अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने अमृतसर में की। 61 वर्षीय सतवंत सिंह फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाणा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे।

पंजाब में सियासी हलचल: इंदिरा गांधी के हत्यारे के बेटे को अमृतपाल सिंह की पार्टी ने बनाया उम्मीदवार

पंजाब विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राज्य की सियासत में एक बार फिर कट्टरपंथ और ‘पंथक’ राजनीति का जिन्न बाहर आ गया है। ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख और खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह की राजनीतिक पार्टी ने चुनावों के लिए अपने पहले पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने इस बार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हत्याकांड से जुड़े परिवार पर दांव लगाया है।

बस्सी पठाणा सीट से लड़ेंगे चुनाव

अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि सतवंत सिंह पार्टी के पहले आधिकारिक उम्मीदवार होंगे। सतवंत सिंह को फतेहगढ़ साहिब की बस्सी पठाणा (सुरक्षित) सीट से टिकट दिया गया है। इस घोषणा के दौरान फरीदकोट के सांसद सरबजीत सिंह खालसा भी वहां मौजूद थे।

केहर सिंह का इतिहास और हत्याकांड से कनेक्शन

सतवंत सिंह के पिता केहर सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हुई हत्या की साजिश के मुख्य सूत्रधारों में शामिल थे। अदालत ने केहर सिंह को आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाया था। इसके बाद 6 जनवरी 1989 को नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में उन्हें फांसी दे दी गई थी। केहर सिंह का परिवार मूल रूप से बस्सी पठाणा इलाके के मुस्तफाबाद का रहने वाला है, यही वजह है कि उनके बेटे को इसी सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया है।

पार्टी का तर्क: “पंथक परिवारों का सम्मान”

उम्मीदवारी का एलान करते हुए अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि यह फैसला चुनावी नफा-नुकसान देखकर नहीं, बल्कि उन परिवारों को सम्मान देने के लिए किया गया है जिन्होंने ‘पंथ’ और पंजाब के अधिकारों के लिए बलिदान दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की राजनीति पूरी तरह सिख सिद्धांतों, बंदियों की रिहाई और पंजाब के क्षेत्रीय अधिकारों पर केंद्रित रहेगी।

पंजाब की राजनीति में उभरता कट्टरपंथ

साल 2024 के लोकसभा चुनावों में पंजाब की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखा गया था।  राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल में बंद रहने के बावजूद अमृतपाल सिंह ने खडूर साहिब लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। इंदिरा गांधी के एक अन्य हत्यारे बेअंत सिंह के बेटे सरबजीत सिंह खालसा ने भी फरीदकोट सीट से निर्दलीय चुनाव जीता था। इन दो जीतों ने पंजाब में पारंपरिक शिरोमणि अकाली दल (SAD) के पंथक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई थी। अब विधानसभा चुनावों में सीधे अपने उम्मीदवार उतारकर अमृतपाल का संगठन राज्य की मुख्यधारा की पार्टियों, आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है।

बस्सी पठाणा सीट पर दिलचस्प मुकाबला

इस घोषणा के बाद बस्सी पठाणा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और पेचीदा होने की उम्मीद है। दरअसल, फरीदकोट के सांसद सरबजीत सिंह खालसा की बहन अमृत कौर मलोआ ने भी पहले इसी बस्सी पठाणा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। ऐसे में अब पंथक धड़ों के बीच आंतरिक टकराव या नए गठबंधन देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से जहां एक तरफ कट्टरपंथी सिख मतदाताओं का ध्रुवीकरण अमृतपाल की पार्टी के पक्ष में हो सकता है, वहीं दूसरी तरफ विरोधी दल इसे पंजाब की शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताकर चुनावी मुद्दा बनाएंगे।

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