ग्रीन एनर्जी से विकास की नई उड़ान, भारत ने बढ़ाया स्वच्छ ऊर्जा का दायरा

The CSR Journal Magazine

हरित भारत का संकल्प हुआ और मजबूत, 288.58 गीगावाट क्षमता के साथ टिकाऊ विकास की दिशा में मजबूत कदम

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। 30 जून 2026 तक देश की कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 288.58 गीगावाट तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा क्षेत्र में भारत की तेजी से बढ़ती ताकत को दर्शाती है, बल्कि एक हरित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में देश की मजबूत प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, सौर और पवन ऊर्जा में तेज वृद्धि के कारण भारत विश्व के अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा देशों में शामिल हो चुका है।

सौर ऊर्जा बनी विकास की सबसे बड़ी ताकत

देश की कुल नवीकरणीय क्षमता में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है। जून 2026 तक स्थापित सौर क्षमता लगभग 162 गीगावाट तक पहुंच गई, जो कुछ वर्ष पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, बड़े सौर पार्क, रूफटॉप सोलर कार्यक्रम और कृषि क्षेत्र में सौर पंपों के विस्तार ने इस वृद्धि को गति दी है। MNRE के आंकड़ों के अनुसार, 2014 के बाद से भारत की सौर क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

पवन ऊर्जा में भी लगातार बढ़त

जून 2026 तक देश की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 57.4 गीगावाट तक पहुंच गई। गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी बने हुए हैं। अपतटीय (ऑफशोर) पवन ऊर्जा परियोजनाओं की तैयारियां भी भारत के ऊर्जा मिश्रण को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों का योगदान

सौर और पवन के अलावा बायोएनर्जी, छोटे जलविद्युत परियोजनाएं तथा अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) कार्यक्रम भी देश की हरित ऊर्जा क्षमता को बढ़ा रहे हैं। बायोमास आधारित संयंत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त आय प्रदान कर रहे हैं, जबकि छोटे जलविद्युत परियोजनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में सहायक हैं।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा स्थिति
कुल स्थापित नवीकरणीय क्षमता- 288.58 GW
सौर ऊर्जा ~162 GW- सबसे बड़ा योगदान
पवन ऊर्जा ~57.4 GW- तेज विस्तार
बायोएनर्जी ~10.9 GW- ग्रामीण आय
छोटे जलविद्युत ~5+ GW- स्वच्छ ऊर्जा
विश्व में तीसरा स्थान- 2030 तक 500 GW लक्ष्य

विश्व में तीसरा स्थान

भारत अब स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने सौर और पवन ऊर्जा विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति की है और वह वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

2030 के लक्ष्य की ओर तेज कदम

भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मार्च 2026 तक यह क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच चुकी थी और जून 2026 तक इसमें और वृद्धि होकर 288.58 गीगावाट हो गई। इससे स्पष्ट है कि देश निर्धारित लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार से कई महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं:
कोयले और आयातित ईंधन पर निर्भरता में कमी
कार्बन उत्सर्जन में गिरावट
ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर
हरित विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा
सौर मॉड्यूल निर्माण, बैटरी भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा अवसंरचना में निवेश बढ़ने से भारत का स्वच्छ ऊर्जा उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है।

ग्रिड और भंडारण सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा की तेज वृद्धि के साथ ग्रिड स्थिरता, ऊर्जा भंडारण और ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना भी आवश्यक हो गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो परियोजनाएं और स्मार्ट ग्रिड तकनीकें आने वाले वर्षों में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

सरकार की प्रमुख नीतियां

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
ISTS शुल्क में छूट
ग्रीन ओपन एक्सेस नियम
नवीकरणीय खरीद दायित्व (RPO) लक्ष्य
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना
पीएम-कुसुम योजना
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
इन नीतियों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है।

हरित भविष्य की ओर भारत का तेज़ सफर

288.58 गीगावाट की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य की बदलती तस्वीर है। यह उपलब्धि बताती है कि देश आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। यदि वर्तमान गति बनी रहती है, तो भारत न केवल 2030 के 500 गीगावाट लक्ष्य को हासिल कर सकता है, बल्कि वैश्विक हरित ऊर्जा नेतृत्व की दौड़ में भी अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है। भारत की हरित ऊर्जा क्रांति अब एक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की नई धुरी बन चुकी है।
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