भारत ने अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण, चीन-पाकिस्तान में बढ़ी चिंता

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: भारत ने अपनी रक्षा तकनीक में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किया गया। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया। मंत्रालय ने कहा कि “शुक्रवार को ओडिशा के चांदीपुर से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया गया।” यह परीक्षण सामरिक बल कमान के निरीक्षण में किया गया, जो मिसाइल की क्षमता को और मजबूती प्रदान करता है।

उन्नत तकनीक का समावेश

अग्नि-4, जो कि दो चरणों वाली ठोस ईंधन से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, की मारक क्षमता लगभग 4,000 किलोमीटर है। यह मिसाइल न केवल परमाणु बल्कि पारंपरिक हथियारों को भी ले जाने में सक्षम है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस बढ़ती ताकत से चीन और पाकिस्तान की चिंता बढ़ेगी। मिसाइल के विकास की प्रक्रिया 2007 से शुरू हुई थी और इस क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संक्षिप्त इतिहास

अग्नि-4 का पहला परीक्षण 2010 में किया गया था। इसके बाद कई सफल परीक्षण हुए, जिनमें 20 जनवरी 2014 को एक महत्वपूर्ण परीक्षण शामिल है, जिसमें मिसाइल ने 4,000 किलोमीटर की दूरी तक अपना लक्ष्य भेदने में सफलता पाई। इस दौरान मिसाइल ने लगभग 850 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुँचने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद, 2 दिसंबर 2014 को पहला यूजर ट्रायल हुआ, जिसमें मिसाइल ने 3,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। इस प्रकार, अग्नि-4 के परीक्षणों ने अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत किया है।

विशेषताएं और क्षमताएं

अग्नि-4 की लंबाई लगभग 20 मीटर है और इसका वजन 17,000 किलोग्राम के आसपास है। यह मिसाइल 1,000 किलोग्राम पेलोड ले जा सकती है। इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन और नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिसमें रिंग लेजर जाइरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और फ्लेक्ससील थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल तकनीक का समावेश है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 4,000 किमी की दूरी पर इसकी सटीकता 100 मीटर से कम है, जो कि इसे विश्वस्तरीय बनाती है।

चीन-पाकिस्तान पर असर

भारत की यह नई मिसाइल का परीक्षण निश्चित रूप से चीन और पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ाने का काम करेगा। भारत की तकनीकी प्रगति ने इस क्षेत्र में संतुलन को प्रभावित किया है। ऐसी स्थितियों में, भारत की रक्षा नीति और विकास के प्रति दृष्टिकोण को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। भारत इस क्षेत्र में अपनी ताकत को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। अग्नि-4 का सफल परीक्षण इस दिशा में एक मजबूत कदम है।

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