Lions Rise in Gujarat: गुजरात के सासन गिर और आसपास के क्षेत्रों से एशियाई शेरों (Asiatic Lions in Gujarat) को लेकर एक और खुशखबरी सामने आई है। इस बार 16वीं शेर गणना (Lion Census 2025) में इनकी कुल संख्या 891 दर्ज की गई है, जो कि पिछले आंकड़े से 217 अधिक है। आज पीएम मोदी ने मन की बात में ये खबर देश दुनिया को बताई। Mann Ki Baat में PM Modi ने कहा कि ये खबर वन्य जीव प्रेमियों के लिए Good News है। यह न सिर्फ गिर क्षेत्र बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है, क्योंकि विश्व में एशियाई शेर केवल यहीं पाए जाते हैं। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने बुधवार को गांधीनगर सचिवालय में इस गणना का परिणाम जारी किया। उनके अनुसार, कुल 891 शेरों में से 196 नर, 330 मादा, 59 युवा नर, 75 युवा मादा, 225 शावक और 6 अज्ञात उम्र के शावक शामिल हैं।
Lions Rise in Gujarat: अब गिर की सीमाओं से बाहर भी फैले शेर
गिर अभयारण्य (Gir National Park) के अलावा अब शेरों का रहवास क्षेत्र अन्य जिलों में भी फैल गया है। वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव संजीव कुमार ने बताया कि इस बार की गणना में 11 जिलों की 58 तहसीलों के करीब 35,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया। यह इस बात का संकेत है कि शेरों का दायरा अब गिर के पार बढ़ चुका है। Lion Conservation in Gujarat
Lion Population Growth: टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा
इस बार की गिनती में टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया गया। इसमें GPS डिवाइस, सेटेलाइट इमेजनरी, AI आधारित सॉफ्टवेयर, मल्टी एंगल फोटोग्राफी, हाई-रेजोल्यूशन कैमरे, कैमरा ट्रैप्स, रेडियो कॉलरिंग, और ई-गुज फॉरेस्ट मोबाइल ऐप जैसी तकनीकों ने गिनती को सटीक और प्रमाणिक बनाया। इसके अलावा गिर हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम और GIS सॉफ्टवेयर की मदद से भी डाटा को रिकॉर्ड किया गया, जिससे शेरों के मूवमेंट, स्वास्थ्य और व्यवहार का विश्लेषण करना आसान हुआ।
Direct Beat Verification से की गई गिनती
शेरों की गिनती डायरेक्ट बीट वेरिफिकेशन पद्धति से की गई, जो पिछले कई दशकों से कारगर साबित हो रही है। इसके तहत पूरे गिर क्षेत्र को रीजन, जोन और सब-ज़ोन में बांट कर लगभग 3000 प्रशिक्षित वालंटियर और वन अधिकारियों ने गहन सर्वे किया।
Lions Rise in Gujarat: कौन-कौन बने इस अभियान का हिस्सा?
इस गिनती अभियान में विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया, जिनमें शामिल थे: न्यायपालिका के जज, राष्ट्रीय और राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य, विश्वविद्यालयों के कुलपति और शिक्षक, विद्यार्थी और स्वयंसेवी संस्थाएं,
विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त वन अधिकारी।
पहली बार स्थानीय सरपंचों को भी प्रशिक्षित कर शामिल किया गया
इससे गिनती को स्थानीय सहभागिता और पारदर्शिता मिली, जो भविष्य में Project Lion और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में अहम साबित होगी।
शेरों की जनगणना में साल-दर-साल वृद्धि हुई
1995 में 304
2001 में 327
2005 में 359
2010 में 411
2015 में 523
2020 में 674
2025 (अब) 891
इन आंकड़ों से साफ है कि Asiatic Lion Population लगातार बढ़ रही है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। गुजरात के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो शेरों के संरक्षण और उनके लिए सुरक्षित वातावरण के निर्माण का परिणाम है। गिर के शेर न केवल गुजरात की पहचान हैं, बल्कि भारत की जैव विविधता का भी गौरवशाली हिस्सा हैं। अगर यही रफ्तार रही तो आने वाले वर्षों में शेरों की संख्या और भी उत्साहजनक आंकड़े पार कर सकती है।
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