गुजरात का बड़ा कदम: Net Zero विजन से 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन घटा

The CSR Journal Magazine

गुजरात: ‘नेट जीरो’ विजन से 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेट जीरो’ विजन को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने वित्त वर्ष 2025-26 में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन की ऐतिहासिक कटौती दर्ज की है। राज्य के इतिहास में किसी एक वर्ष में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में यह अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह महत्वपूर्ण सफलता राज्य सरकार की मजबूत नीतियों और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के तेजी से होते विस्तार के कारण संभव हो सकी है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का नेतृत्व

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने में गुजरात का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने का रोडमैप तैयार किया है। पीएम मोदी ने हमेशा साफ और हरा भारत बनाने पर जोर दिया है, जिसमें आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं।

रिकॉर्ड ग्रीन बिजली उत्पादन

गुजरात ने वित्त वर्ष 2025-26 में 49.79 मिलियन टन (mtCO₂e) कार्बन उत्सर्जन में कमी कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि राज्य के इतिहास में सबसे बड़ी कार्बन कटौती है। राज्य में सौर, पवन और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों के जोरदार विकास के चलते यह संभव हुआ। केवल एक वर्ष में 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, जो इस दिशा में प्रगति को साबित करता है।

पिछले 5 वर्षों में प्रदूषण में कमी

राज्य सरकार की ग्रीन एनर्जी पहलों के परिणामस्वरूप पिछले 5 वर्षों में गुजरात ने कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम किया है। प्रतिवर्ष लगभग 442 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होने के बावजूद, राज्य ने अपने उत्सर्जन में 40 प्रतिशत की कमी की है। यह विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का स्पष्ट उदाहरण है और गुजरात का हरित विकास मॉडल साबित करता है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन एनर्जी के बड़े पैमाने पर उपयोग से कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधनों की खपत कम होती है, जो कि कार्बन उत्सर्जन को सीधा कम करता है। यह जलवायु परिवर्तन से मुकाबले का सबसे प्रभावी माध्यम साबित होता जा रहा है।

ऐतिहासिक कार्बन कटौती के प्रमुख कारण

ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार: सौर ऊर्जा (सोलर) और पवन ऊर्जा (विंड एनर्जी) के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व बढ़ोतरी।
नीतिगत सुधार: राज्य की नई सौर और औद्योगिक नीतियों ने उद्योगों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया है।
स्टेट एक्शन प्लान: राज्य ने कार्बन एमिशन को कम करने के लिए समयबद्ध लक्ष्यों के साथ ठोस रोडमैप तैयार किया है।

कार्बन उत्सर्जन का आम आदमी की जिंदगी से संबंध

कार्बन उत्सर्जन केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवनशैली से भी जुड़ा है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के कारण मौसम में बदलाव, अत्यधिक गर्मी और अन्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ग्रीन एनर्जी के उपयोग से प्रदूषण कम होता है, हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है और स्वास्थ्य संबंधित जोखिम कम होते हैं।

पावर जनरेशन में ग्रीन एनर्जी की बढ़ती हिस्सेदारी

गुजरात राज्य ने अपने प्रयासों से यह दिखाया है कि वह केवल निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ नए मानक स्थापित कर रहा है। नई नीतियों जैसे ‘इंटीग्रेटेड RE पॉलिसी 2026’ और ‘ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी’ ने इस दिशा में गति दी है। GUVNL, GEDA और GPCL जैसी संस्थाओं की मेहनत से ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ी है, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार आया है।

नेट जीरो मिशन में गुजरात का योगदान

गुजरात की यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को मजबूती प्रदान कर रही है और ग्रीन एनर्जी की दिशा में गुजरात एक प्रभावशाली मॉडल के रूप में उभर रहा है। देश के लिए यह एक नई उम्मीद और दिशा है।

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