सेना की बढ़ी ताकत: जल्द शामिल होंगे 450 हल्के कार्ल गुस्ताफ Mk-IV लॉन्चर

The CSR Journal Magazine

लद्दाख की बर्फ से राजस्थान के रेगिस्तान तक, दुश्मन के टैंक और बंकर मिनटों में तबाह, सेना खरीद रही घातक रॉकेट लॉन्चर

भारतीय सेना अपनी इन्फैंट्री (पैदल सेना) की मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए 450 कार्ल गुस्ताफ मार्क-IV (Carl Gustaf Mk-IV) हल्के रॉकेट लॉन्चर और उनके स्पेयर पार्ट्स खरीदने की प्रक्रिया में है, जिसके लिए सेना ने प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) जारी किया है।

नई टेक्नोलॉजी से लैस भारतीय सेना

भारतीय सेना देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपने दस्ते को तैनात करती है, इसीलिए आधुनिक और प्रभावी हथियारों की आवश्यकता बढ़ गई है। इसी के तहत, सेना ने 450 Carl Gustaf Mark-IV (84mm) हल्के रॉकेट लॉन्चर खरीदने के लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया है। ये नए लॉन्चर पुराने Mark-III विकल्प की जगह लेंगे, ताकि सैनिकों की प्रभावशीलता में वृद्धि की जा सके।

Carl Gustaf Mark-IV की खूबियाँ

इस नए और उन्नत वेपन सिस्टम की प्रमुख विशेषताएं और रणनीतिक लाभ निम्नलिखित हैं।
हल्का वजन: वर्तमान में उपयोग हो रहे मार्क-III (वजन लगभग 11 किलोग्राम) की तुलना में मार्क-IV अत्यधिक हल्का है। इसका कुल वजन 7 किलोग्राम से अधिक नहीं होगा, जिससे सैनिक इसे कंधे पर रखकर आसानी से दुर्गम क्षेत्रों में ले जा सकेंगे।
तापमान अनुकूलता: यह हथियार -20°C से +50°C तक के अत्यधिक कठोर तापमान में भी पूरी विश्वसनीयता के साथ काम कर सकता है। इसका मतलब है कि इसे लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान तक हर मोर्चे पर तैनात किया जा सकेगा।
मारक क्षमता और आयु: इसकी प्रभावी मारक रेंज 350 से 800 मीटर के बीच है। साथ ही, इसके बैरल का जीवनकाल कम से कम 1,500 राउंड या 15 वर्ष निर्धारित किया गया है।
सुरक्षा क्लॉज: निविदा शर्तों के अनुसार, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के बोलीदाताओं (जैसे चीन और पाकिस्तान) को इस खरीद प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया है।

कंपनी के लिए विशेष शर्तें

RFP के अनुसार, जो कंपनी इस अनुबंध को प्राप्त करेगी, उसे एक साल के भीतर सभी लॉन्चर भारतीय सेना को सौंपने होंगे। इसके अलावा, उस कंपनी को 15 साल तक तकनीकी सहायता (Product Support) और 24 महीने की वारंटी भी देनी होगी। विशेष रूप से यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियां इस निविदा में भाग नहीं ले सकेंगी।

हर मौसम में करेगी काम

भारतीय सेना की आवश्यकता है कि उसके हथियार हर प्रकार के मौसम में कार्यक्षम हों। इसीलिए, RFP में यह शर्त रखी गई है कि नए लॉन्चर -20 डिग्री से 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान में बिना रुकावट काम कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि इन्हें हिमालय के बर्फीले क्षेत्रों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान तक कहीं भी तैनात किया जा सकता है।

आत्मनिर्भर भारत का स्वदेशी शस्त्र 

भारत में कार्ल गुस्ताफ मार्क-IV (Carl Gustaf Mk-IV) का विनिर्माण (Manufacturing) देश के रक्षा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। स्वीडन की जानी-मानी रक्षा कंपनी साब (Saab) भारत में इसके निर्माण के लिए एक अत्याधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तैयार कर रही है।

भारत का पहला 100% FDI रक्षा प्रोजेक्ट

साब भारत की रक्षा विनिर्माण नीति के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी पाने वाली पहली वैश्विक रक्षा कंपनी है। भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई विदेशी कंपनी पूर्ण स्वामित्व (Fully Foreign-Owned) के साथ भारत में मिलिट्री ग्रेड हथियार का कारखाना चला रही है।

विनिर्माण संयंत्र और स्थान

इसका निर्माण हरियाणा के झज्जर की एमईटी सिटी (MET City) में बनाए गए नए विनिर्माण संयंत्र में किया जा रहा है। इस प्लांट को संचालित करने के लिए साब ने भारत में ‘Saab FFVO India Pvt Ltd’ नाम से अपनी एक नई सहायक कंपनी (Subsidiary) स्थापित की है।

स्वीडन के बाहर पहली यूनिट

कार्ल गुस्ताफ हथियार प्रणाली के इतिहास में यह स्वीडन के बाहर स्थापित होने वाली पहली वैश्विक विनिर्माण इकाई है। भारत को यह विशिष्ट दर्जा इसलिए मिला क्योंकि भारतीय सेना 1976 से ही इस वेपन सिस्टम के पुराने वेरिएंट्स (जैसे Mk-II और Mk-III) का दुनिया में सबसे बड़ा उपयोगकर्ता रही है।

उन्नत स्वदेशी तकनीक

इस कारखाने में केवल असेंबलिंग नहीं होगी, बल्कि साब जटिल और अत्याधुनिक तकनीकें भारत में ला रही है। इसमें उन्नत कार्बन फाइबर-वाइंडिंग (Advanced Carbon Fibre-Winding) और लॉन्चर की सबसे लेटेस्ट साइटिंग टेक्नोलॉजी (Sighting Technology) का स्थानीय स्तर पर निर्माण शामिल है, जिसके कारण ही हथियार का वजन 11 किलोग्राम से घटकर केवल 7 किलोग्राम रह गया है।

वैश्विक निर्यात का केंद्र

यह प्लांट न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत को एक वैश्विक हब बनाएगा। यहाँ बनने वाले कलपुर्जे (Components) और सब-सिस्टम दुनिया भर के अन्य कार्ल गुस्ताफ उपयोगकर्ताओं को भी निर्यात (Export) किए जाएंगे।

घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी

पूर्ण विदेशी स्वामित्व के बावजूद, साब भारत की घरेलू कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों (जैसे Munitions India Limited – MIL) और निजी उप-आपूर्तिकर्ताओं (Sub-suppliers) के साथ घनिष्ठ साझेदारी कर रही है। इससे देश के भीतर ही एक मजबूत डिफेंस सप्लाई चेन और कुशल रोजगार (Skilled Jobs) पैदा हो रहे हैं।

सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाना

ये नए सिस्टम भारतीय सेना की एंटी-टैंक और बंकर नष्ट करने की क्षमता को मजबूत करेंगे। इससे सीमा पर तैनात पैदल सैनिकों की मारक शक्ति में भी इजाफा होगा। इस प्रणाली की मदद से भारतीय सेना अपने दुश्मनों से निपटने में और अधिक सक्षम होंगी। इससे देश की सीमाओं की सुरक्षा एक नई मजबूती प्राप्त करेगी, जो वर्तमान समय की आवश्यकता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos