पूर्व अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में 50 फीसदी कोटा आरक्षित

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पूर्व अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में बढ़े चांस, गृह मंत्रालय ने 50 फीसदी किया कोटा

गृह मंत्रालय ने लोकसभा में घोषणा की है कि पूर्व अग्निवीरों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर 50 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत पूर्व अग्निवीरों के लिए एक विशेष श्रेणी बनाई गई है, जिसमें उन्हें उम्र सीमा में भारी छूट के साथ-साथ लिखित परीक्षा, फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।

गृह मंत्रालय का बड़ा कदम

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने घोषणा की है कि पूर्व अग्निवीरों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और असम राइफल्स में नौकरी पाने का सुनहरा मौका मिलेगा। इसके तहत इन पदों पर 50 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इस नई कैटेगरी ‘पूर्व-अग्निवीर’ के माध्यम से इन्हें भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी। यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में दी गई।

पूर्व अग्निवीरों के सुनहरे भविष्य का नया रोडमैप

गृह मंत्रालय (MHA) का यह नया फैसला अग्निपथ योजना के तहत चार साल की देश सेवा पूरी कर बाहर आने वाले युवाओं के करियर को एक मजबूत और सुरक्षित दिशा देने वाला साबित होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा बलों में भर्ती के नियमों में संशोधन कर पूर्व अग्निवीरों के समायोजन की इस ठोस व्यवस्था को धरातल पर उतार दिया गया है। इस निर्णय के बाद देश के प्रमुख अर्धसैनिक बलों जैसे सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल और राइफलमैन के प्रवेश स्तर के पदों पर अब आधी सीटें पूर्व अग्निवीरों के नाम सुरक्षित रहेंगी।

नई कैटेगरी और छूट

गृह राज्य मंत्री राय ने बताया कि नए नियमों के अनुसार, पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित अधिकतम उम्र सीमा में 3 साल की छूट होगी। साथ ही, पहले बैच के लिए 5 साल की अतिरिक्त छूट भी मिलेगी। यह पहल पूर्व अग्निवीरों की नौकरी की संभावनाओं को बढ़ाएगी और उनके लिए एक सुनहरा भविष्य तय करेगी।

शारीरिक परीक्षण में छूट

पदों के लिए आवेदन करने वाले पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से भी छूट मिलेगी। इस विशेष रियायत के पीछे मुख्य तर्क यह है कि ये युवा पहले ही भारतीय सेना, वायुसेना या नौसेना के कड़े अनुशासन और विश्वस्तरीय सैन्य प्रशिक्षण के ढांचे में चार साल का समय बिता चुके होंगे। यह कदम उन्हें भर्ती प्रक्रिया में सशक्त बनाएगा और उनकी जीविका को सुनिश्चित करेगा।

गृह मंत्रालय ने गठित की विशेष विंग

पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास, सेवा समन्वय और उनके करियर की आगे की प्रगति की निगरानी के लिए गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक विशेष पूर्व-अग्निवीर विंग (Dedicated Ex-Agniveer Wing) की स्थापना भी कर दी गई है। यह समर्पित विंग सभी अर्धसैनिक बलों के साथ मिलकर रिक्तियों के डेटा, भर्ती चक्र और पूर्व अग्निवीरों के सुचारू नियोजन का काम देखेगी, ताकि कॉर्प्स में शामिल होते समय उन्हें किसी भी प्रशासनिक बाधा का सामना न करना पड़े।

सुरक्षा बलों को मिलेगा तैयार और अनुशासित कार्यबल

सैन्य और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नीति से दोतरफा फायदा होगा। एक तरफ जहां सेना से चार साल बाद बाहर आने वाले युवाओं के मन से रोजगार की असुरक्षा खत्म होगी, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) को पहले से पूरी तरह प्रशिक्षित, शारीरिक रूप से अत्यंत चुस्त और हथियारों के संचालन में माहिर जवान सीधे मिल सकेंगे। वर्तमान व्यवस्था में अर्धसैनिक बलों में सीधी भर्ती के बाद रंगरूटों को बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण देने में करोड़ों रुपये का खर्च और कई महीनों का समय लगता है। पूर्व अग्निवीरों के सीधे आगमन से ट्रेनिंग का यह समय और वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। यह कदम भारत की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की चौकसी को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने में गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

राज्य पुलिस बलों में भी खुल रहे रास्ते

केंद्र सरकार के इस बड़े कदम के समानांतर, देश के कई राज्यों ने भी पूर्व अग्निवीरों के महत्व को समझा है। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली पुलिस जैसे विभिन्न राज्य पुलिस बलों ने पहले ही अपने यहां कांस्टेबल स्तर की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी तक का विशेष कोटा और आयु में रियायत देने की घोषणाएं कर रखी हैं। इससे स्पष्ट है कि चार साल की सेवा के बाद बाहर आने वाले 75 प्रतिशत युवाओं के लिए केंद्र से लेकर राज्यों तक रोजगार के कई बेहतरीन द्वार एक साथ खुल रहे हैं।

पिछले बदलावों का असर

सरकार ने पिछले साल दिसंबर में एक नोटिफिकेशन जारी करके सुरक्षा बलों में नियुक्ति के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। इसके तहत कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) पदों पर पूर्व अग्निवीरों की भर्ती का कोटा 10 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया था। इस नीतिगत बदलाव के साथ, प्रत्येक वर्ष पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित वैकेंसी निकाली जाएगी।

देश की रक्षा और युवाओं की प्रगति का नया संगम

अग्निपथ योजना की घोषणा वर्ष 2022 में सशस्त्र बलों की औसत आयु प्रोफाइल को कम करने और एक तकनीकी रूप से कुशल, आधुनिक युद्ध लड़ने वाली सेना तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के नियमों के मुताबिक, प्रत्येक बैच के केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही सेना के नियमित कैडर में स्थायी रूप से बरकरार रखा जाता है। शेष 75 प्रतिशत युवाओं को एकमुश्त कर-मुक्त ‘सेवा निधि’ पैकेज देकर सेवामुक्त किया जाता है।

रक्षा बल के साथ युवाओं का सुरक्षित भविष्य निर्माण

शुरुआती दौर में इस योजना को लेकर युवाओं और विपक्षी दलों के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंताएं थीं कि 4 साल बाद बाहर आने वाले सैनिकों का भविष्य क्या होगा। हालांकि, गृह मंत्रालय द्वारा समय-समय पर किए गए नीतिगत सुधारों और अब इस ऐतिहासिक 50 प्रतिशत कोटे की घोषणा ने उन तमाम संशयों पर विराम लगा दिया है। चूंकि नौसेना और सेना के शुरुआती बैच के अग्निवीर जल्द ही अपनी चार साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले हैं, ऐसे में उनके बाहर आने से ठीक पहले इस पुख्ता पुनर्वास नीति का जमीन पर उतरना देश के करोड़ों रक्षा अभ्यर्थियों के मनोबल को बढ़ाने वाला है। यह नई व्यवस्था भारतीय रक्षा ताने-बाने को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं के सुरक्षित भविष्य की भी गारंटी बनती दिख रही है।

भविष्य की योजनाएं

पूर्व अग्निवीर योजना को केंद्र सरकार की ओर से 14 जून 2022 को लॉन्च किया गया था। इससे इन्हें दी गई सुविधाएं और आरक्षण उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इस प्रकार के बदलावों से पूर्व अग्निवीरों को नए अवसर मिलेंगे और उनकी नौकरी की राह में रुकावटें कम होंगी।

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