जंतर-मंतर से संसद तक; CJP के ‘संसद मार्च’ और अनशन समाप्ति की इनसाइड स्टोरी

The CSR Journal Magazine

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से हुई कॉकरोच जनता पार्टी की बातचीत, अभिजीत दीपके ने तोड़ा अनशन, कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन रंग लाया

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि उन्होंने और उनके साथी नेता आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा से मुलाकात की। यह मुलाकात नड्डा के निवास पर हुई और इसमें उन्होंने अपनी पार्टी की मांगों को लेकर एक पत्र सौंपा। इस बातचीत के दौरान नड्डा ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस मामले में सरकार में बात करेंगे।

महत्वपूर्ण मुलाकात का मुख्य बिंदु

CJP के प्रवक्ता के अनुसार, यह मुलाकात केंद्रीय मंत्री के घर पर हुई, जो करीब 10 मिनट तक चली। नेताओं ने अपनी मांगों के बारे में विस्तार से बताया। इस बातचीत के बाद भूख हड़ताल पर बैठे CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यह सकारात्मक संकेत है, और अब उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गौर करेगी।

समाजिक मीडिया में बढ़ी चर्चा

सौरभ दास ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने नड्डा से मुलाकात के लिए दो घंटे से ज़्यादा समय इंतज़ार किया। अंततः जब उन्हें नड्डा से मिलने का मौका मिला, तब उन्होंने अपनी मांगों वाला एक लिखित पत्र सौंपा। दास ने कहा कि नड्डा ने उनसे आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे पर आंतरिक स्तर पर चर्चा करेंगे। इस तरह की बातचीत से CJP के सदस्यों में नई उम्मीद जागी है।

मुख्य घटनाक्रम- अनशन की समाप्ति

18 जुलाई को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल ले जाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था। सोमवार (20 जुलाई 2026) को सोनम वांगचुक की अपील और सरकार के साथ बातचीत शुरू होने के बाद दीपके ने जूस पीकर अपना अनशन तोड़ दिया। नड्डा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हुई और उन्होंने मांगों के ज्ञापन पत्र पर आंतरिक रूप से बात करने का भरोसा दिया है।

चलो संसद मार्च में हंगामा

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा नीट (NEET-UG) परीक्षा धांधली और बार-बार होने वाले पेपर लीक के विरोध में संसद के मानसून सत्र के पहले दिन (20 जुलाई 2026) निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली में भारी हंगामा हुआ। इस आंदोलन की गूँज जंतर-मंतर से लेकर देश की संसद तक सुनाई दी, जहाँ विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सरकार को घेरा।

CJP के प्रदर्शन में लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग थाने और रायसीना रोड के पास बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बलों का प्रयोग (लाठीचार्ज) किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे जंतर-मंतर और आस-पास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई।

जंतर-मंतर को कराया गया खाली

दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में लागू धारा 163 बीएनएसएस (पुरानी धारा 144) का हवाला देकर इस मार्च को अवैध घोषित किया था। पुलिस ने जंतर-मंतर पर बने प्रदर्शनकारियों के मंच को हटा दिया और प्रदर्शन स्थल को पूरी तरह खाली कराकर कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

संसद में भारी हंगामा

इस छात्र आंदोलन का असर संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही देखने को मिला। विपक्षी सांसदों (सपा, कांग्रेस व अन्य) ने संसद परिसर और सदन के भीतर नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाया और हाथों में तख्तियां लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की।

मेट्रो स्टेशन किए गए बंद

सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के अंदेशे को देखते हुए दिल्ली मेट्रो प्रशासन ने संसद मार्च से पहले 5 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दिए थे, जिन्हें स्थिति नियंत्रित होने के बाद दोबारा खोला गया।

CJP ने लगाया प्रशासनिक साजिश का आरोप

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि प्रदर्शन को बदनाम करने और शांतिपूर्ण छात्रों पर दोष मढ़ने के लिए जंतर-मंतर पर पत्थरों से लदे ट्रक खड़े किए गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर जानबूझकर खाली एंबुलेंस भेजकर भगदड़ (Stampede) जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई। इस हिंसक टकराव और पुलिस कार्रवाई के बीच CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को भी पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद सरकार के साथ अंदरूनी बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।

भविष्य की उम्मीद

CJP की ओर से यह बातें सरकार के प्रति उम्मीदों को बढ़ाने वाली हैं। CJP के नेता अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि उनकी मांगों पर तेजी से कार्वाई की जाए। कइयों का मानना है कि अगर सरकार उनकी मांगे मानती है, तो इससे संगठन की स्थिति और मजबूत होगी। इस परिस्थिति में अगर बातचीत चलती रहती है, तो आगे और भी सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।

अभिजीत दीपके की भूख हड़ताल का प्रभाव

अभिजीत दीपके की भूख हड़ताल ने इस मुद्दे को मीडिया में खासा चर्चा में ला दिया था। CJP के कार्यकर्ताओं ने इस प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगों को उठाने की कोशिश की थी। उनकी हड़ताल खत्म होने के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में एक सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। पार्टी के सदस्यों का मानना है कि यह बातचीत एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

संभावित अगले कदम

कॉकरोच जनता पार्टी का लक्ष्य अब स्पष्ट है, और संगठन अपने अगले कदम को सुनिश्चित करने के लिए जुट जाने का संकेत दे रहा है। वे सरकारी अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहेंगे और अपनी मांगों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे। इस बातचीत से उनकी राजनीतिक स्थिति में भी सुधार की उम्मीद जागी है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos