NEET UG काउंसलिंग 2026: दिव्यांग छात्रों के लिए लागू हुए नए मूल्यांकन नियम, केंद्रों की संख्या 61 हुई

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NEET UG काउंसलिंग 2026: दिव्यांग छात्रों को मिलेगी नई उम्मीद, MCC ने जारी की नई गाइडलाइन

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (NEET UG) काउंसलिंग 2026 में शामिल होने वाले बेंचमार्क विकलांगता (PwBD) श्रेणी के छात्रों के लिए केंद्र सरकार और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। चिकित्सा क्षेत्र में दिव्यांग छात्रों को समान अवसर प्रदान करने और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अपने दिव्यांगता मूल्यांकन नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए नई गाइडलाइंस और उसका शुद्धिपत्र (ऐडेंडम) जारी किया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के निर्देशों के अनुरूप तैयार किए गए ये नए नियम चालू शैक्षणिक सत्र की काउंसलिंग प्रक्रिया से ही पूरी तरह प्रभावी हो गए हैं।

मूल्यांकन केंद्रों की संख्या बढ़ी

चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय (DGHS) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के माध्यम से देश भर के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया को नया स्वरूप दिया गया है। इसके तहत मूल्यांकन केंद्रों की संख्या को अभूतपूर्व ढंग से बढ़ाते हुए अपील प्रक्रिया का एक नया कानूनी ढांचा भी खड़ा किया गया है।

मूल्यांकन प्रक्रिया का नया रूप: केवल प्रतिशत नहीं, अब योग्यता सर्वोपरि

पुराने नियमों के तहत दिव्यांग छात्रों की पात्रता मुख्य रूप से उनके दिव्यांगता प्रतिशत (Disability Percentage) के आधार पर तय की जाती थी। अक्सर 40% से अधिक दिव्यांगता होने पर सीधे तौर पर आरक्षण का लाभ तो मिल जाता था, लेकिन कई बार अत्यधिक व्यावहारिक योग्यताओं के बावजूद कुछ छात्र सिर्फ कड़े तकनीकी मापदंडों के कारण चिकित्सा शिक्षा से वंचित रह जाते थे। NMC के नए असेसमेंट फ्रेमवर्क के अनुसार, अब किसी भी छात्र को केवल उसकी दिव्यांगता के प्रकार या महज उच्च प्रतिशत के आधार पर अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता है।

नए नियमों का मूल मंत्र “क्षमताओं का व्यावहारिक आकलन”

फंक्शनल एबिलिटी असेसमेंट (Functional Ability Assessment): नए ढांचे में यह अनिवार्य कर दिया गया है कि अधिकृत मेडिकल बोर्ड छात्र की व्यावहारिक कार्यक्षमता की जांच करेगा। इसमें देखा जाएगा कि छात्र सहायक उपकरणों (Assistive Devices) की मदद से मेडिकल कोर्स की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में कितना सक्षम है।
आवश्यक दक्षताओं पर ध्यान (Essential Competencies): मूल्यांकन बोर्ड अब इस बात की जांच करेंगे कि क्या छात्र शांत और कोलाहलपूर्ण दोनों वातावरणों में प्रभावी ढंग से संवाद कर सकता है, चिकित्सा निर्देशों को समझ सकता है और अपने प्रमुख हाथ या कृत्रिम अंग की मदद से चिकित्सा उपकरणों को पकड़ने व लिखने में सक्षम है या नहीं।
समानता का सिद्धांत: इस पूरी प्रणाली का मूल विचार यह सुनिश्चित करना है कि देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले दिव्यांग छात्र को एक समान और वैज्ञानिक मानदंडों पर परखा जाए।

मूल्यांकन केंद्रों की संख्या में भारी बढ़ोतरी: 16 से बढ़कर हुए 61

दिव्यांग छात्रों को पहले सबसे बड़ी समस्या यह आती थी कि देश भर में केवल 16 ही ऐसे नामित केंद्र थे जहां जाकर उन्हें काउंसलिंग से पहले शारीरिक सत्यापन (Physical Verification) कराना पड़ता था। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले गंभीर रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए इन गिने-चुने महानगरों के चक्कर लगाना मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद कष्टदायी था। छात्रों की इस पीड़ा को समझते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने व्यापक कदम उठाया है। देश भर में अधिकृत मेडिकल असेसमेंट बोर्ड्स (Medical Assessment Boards) की संख्या को 16 से बढ़ाकर सीधे 61 कर दिया गया है।

स्थानीय स्तर पर सुगमता

संख्या में इस बड़े उछाल के बाद अब छात्र अपने राज्य या निकटतम प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थान में जाकर अपनी जांच करवा सकते हैं। छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि केवल MCC और NMC द्वारा अधिकृत इन 61 केंद्रों से जारी किया गया ‘एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट’ (Eligibility Certificate) ही ऑल इंडिया कोटा (AIQ) काउंसलिंग के लिए मान्य होगा। किसी भी सामान्य जिला अस्पताल या निजी डॉक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र इसके लिए स्वीकार्य नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ‘Appellate Boards’ का गठन

पहले की व्यवस्था में यदि कोई अधिकृत मेडिकल बोर्ड किसी छात्र को चिकित्सा शिक्षा के लिए अनुपयुक्त या अयोग्य घोषित कर देता था, तो उस छात्र के पास उस फैसले को चुनौती देने का कोई आसान जरिया नहीं था। छात्रों को सीधे अदालतों के दरवाजे खटखटाने पड़ते थे, जिससे काउंसलिंग का कीमती समय निकल जाता था। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इस वर्ष एक त्रिस्तरीय अपीलीय ढांचा तैयार किया गया है।
अपीलीय दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड (Appellate Disability Assessment Board): देश में 5 अपीलीय बोर्डों का गठन किया गया है।
त्वरित न्याय की व्यवस्था: यदि कोई उम्मीदवार प्राथमिक मेडिकल बोर्ड के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह इन नामित अपीलीय बोर्डों के समक्ष अपनी अपील दायर कर सकता है। दिल्ली में इसके लिए सफदरजंग अस्पताल को प्रमुख केंद्र बनाया गया है।
पारदर्शिता की गारंटी: अपीलीय बोर्ड अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञों की एक अलग टीम के माध्यम से छात्र की क्षमताओं का पुनर्मूल्यांकन करेगा, जिससे किसी भी स्तर पर मानवीय भूल या पक्षपात की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

चॉइस फिलिंग और आरक्षण का नया तकनीकी नियम

NEET UG काउंसलिंग के सॉफ्टवेयर में भी इस बार अहम बदलाव किए गए हैं ताकि पारदर्शी तरीके से सीटों का आवंटन सुनिश्चित हो सके।
सॉफ्टवेयर लॉकिंग सिस्टम: काउंसलिंग पोर्टल पर चॉइस फिलिंग (कॉलेजों की प्राथमिकता भरना) के दौरान PwBD आरक्षित सीटें केवल उन्हीं उम्मीदवारों को दिखाई देंगी, जिन्होंने नामित 61 केंद्रों में से किसी एक से ऑनलाइन सत्यापित ‘एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट’ प्राप्त कर लिया है।
होरिजॉन्टल (क्षैतिज) आरक्षण: दिव्यांग छात्रों को मेडिकल सीटों पर 5% क्षैतिज आरक्षण दिया जाता है। इसका मतलब है कि यह आरक्षण सभी मूल श्रेणियों (सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस) के भीतर आंतरिक रूप से लागू होता है।

आवश्यक दस्तावेज और फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

मूल्यांकन बोर्ड के सामने उपस्थित होते समय छात्रों को अपनी प्रामाणिकता साबित करने के लिए एक तय प्रक्रिया से गुजरना होगा। NMC और MCC ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित दस्तावेज अत्यंत अनिवार्य हैं।
स्थायी UDID कार्ड (Unique Disability ID): सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा जारी डिजिटल UDID कार्ड अब पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
स्व-प्रमाणित कार्यात्मक क्षमता शपथ पत्र: उम्मीदवारों को शेड्यूल-I के तहत एक सेल्फ-सर्टिफाइड एफिडेविट देना होगा कि वे एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई पूरी करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से आवश्यक क्षमताएं रखते हैं।
NEET परीक्षा के दस्तावेज: NEET UG 2026 का एडमिट कार्ड, आधिकारिक स्कोरकार्ड और कक्षा 10वीं व 12वीं के प्रमाण पत्र।
कड़ी चेतावनी: अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि कोई उम्मीदवार फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र या जाली UDID कार्ड के सहारे सीट हथियाने की कोशिश करता हुआ पकड़ा गया, तो न केवल उसका कॉलेज आवंटन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा, बल्कि उसके खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।

चिकित्सा शिक्षा में समावेशिता का नया सवेरा

वर्ष 2026 की NEET UG काउंसलिंग में लागू किए गए ये नए मूल्यांकन नियम भारत की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाते हैं। “समान अवसर और छात्र सुरक्षा” के दोहरे सिद्धांतों पर आधारित यह नीतियां यह सुनिश्चित करती हैं कि कोई भी योग्य व्हीलचेयर-बाउंड या दिव्यांग छात्र केवल जटिल कागजी कार्रवाई या पुरानी रूढ़िवादी सोच के कारण डॉक्टर बनने के अपने सपने को न छोड़े। बढ़ी हुई मूल्यांकन केंद्र संख्या और अपीलीय बोर्डों की स्थापना ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सुलभ और सुरक्षित बना दिया है।

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