सोने को हमेशा से संपन्नता और आर्थिक ताकत का प्रतीक माना गया है। जब भी वैश्विक वित्तीय माहौल अस्थिर होता है, निवेशक सोने की ओर लौटते हैं, क्योंकि यह एक सुरक्षित और स्थायी निवेश माना जाता है। इसी बीच हमारे पड़ोसी देश चीन में सोने का इतना बड़ा भंडार मिला है, जिसने दुनियाभर के बाजारों और भू-राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। चीन में सोने की यह बड़ी खदान नवंबर 2025 की शुरुआत में मिली थी। चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने इसी महीने इस खोज की आधिकारिक पुष्टि की है।
कहां मिला इतना बड़ा सोना?
पूर्वोत्तर चीन के लियाओनिंग प्रांत के पहाड़ी क्षेत्र में 21वीं सदी की सबसे बड़ी सोने की खोज बताई जा रही है। इस खदान में 1440 टन से ज्यादा सोना मौजूद है। अनुमान के अनुसार इसकी कुल कीमत 192 अरब डॉलर, यानी 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने इस खोज की आधिकारिक पुष्टि की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खदान चीन की गोल्ड इंडस्ट्री का भविष्य ही बदल सकती है।
चीन का नया ‘गोल्ड हब’ बनने की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन इस खोज को केवल खनन तक सीमित नहीं रखना चाहता। वह इस इलाके को एक बड़े गोल्ड सप्लाई चेन हब के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इस परियोजना में शामिल होंगेI खनन, गलाना (Refining), प्रोसेसिंग, आभूषण निर्माणI इसके लिए चाइना नेशनल गोल्ड ग्रुप, लियाओनिंग मिनरल जियोलॉजी ग्रुप और यिंगकोऊ म्युनिसिपल गवर्नमेंट के बीच 20 बिलियन युआन की साझेदारी पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। लक्ष्य है कि साल 2027 तक इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाए।
भारत के पास कितना सोना है?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारत के पास कुल 880.2 टन सोना था। इस आधार पर भारत दुनिया में गोल्ड रिजर्व के मामले में नौवें स्थान पर आता है। वहीं चीन 2303.5 टन गोल्ड रिजर्व के साथ सातवें स्थान पर है। यदि नए मिले सोने को जोड़ दिया जाए, तो विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की पोजिशन और मजबूत हो सकती है।
कितना बड़ा आर्थिक असर होगा?
इस खोज से चीन को कई स्तरों पर फायदा हो सकता है, इतना बड़ा सोने का भंडार चीन के विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक ताकत में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करेगा। मार्केट विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी मात्रा सोने के दामों पर प्रभाव डाल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन इसे बाजार में किस तरह उतारता है। गोल्ड हब बनने के बाद चीन की भूमिका केवल उत्पादक ही नहीं, बल्कि एक बड़ी सप्लाई चेन शक्ति के रूप में भी उभर सकती है।
क्या बदलेगी दुनिया की भू-राजनीतिक तस्वीर?
सोना केवल निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि देशों की रणनीतिक ताकत का भी हिस्सा होता है। अस्थिर वैश्विक माहौल में जिन देशों के पास अधिक सोना होता है, उनकी मुद्रा और आर्थिक स्थिति अधिक स्थिर मानी जाती है।चीन के पास पहले ही दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार हैं। अब इतना विशाल सोने का भंडार मिलने सेउसकी अंतरराष्ट्रीय सौदेबाजी की ताकत बढ़ सकती हैI आर्थिक निर्भरता घट सकती हैI एशिया में शक्ति संतुलन बदल सकता हैI विशेषज्ञ मानते हैं कि यह खोज भविष्य में वैश्विक गोल्ड पॉलिसी और बाजार रणनीति को भी प्रभावित करेगी।
चीन में मिली 1440 टन की सोने की खदान केवल एक खनिज खोज नहीं, बल्कि आर्थिक और भू-राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव ला सकती है। आने वाले वर्षों में यह चीन को वैश्विक सोने के बाजार में एक निर्णायक शक्ति बना सकती है और एशिया में आर्थिक संतुलन की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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