Chhatishgarh के पूर्व CM अजित जोगी के बेटे को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक अमित जोगी को एक हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास के लिए सरेंडर करने से रोका है। यह मामला 2003 के रामावतार जग्गी हत्या केस से जुड़ा है। यहां तक कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया।

कोर्ट के सामने उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सवाल उठाया कि एक आरोपी की बात सुने बिना उसे सजा कैसे दी जा सकती है। इस फैसले के तहत अमित जोगी को हाई कोर्ट के उस आदेश के अनुसार, जिसे 2 अप्रैल को जारी किया गया था, सरेंडर नहीं करना पड़ा। यह आदेश चौखट पर जब आया, तब पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे का भविष्य अधर में लटक गया था।

2003 का विवादित मामला

यह केस साल 2003 में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामावतार जग्गी की हत्या से जुड़ा हुआ है। ट्रायल कोर्ट ने 2007 में 28 लोगों को दोषी ठहराया था, लेकिन सबूतों की कमी को देखते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस बरीकरण के खिलाफ अपील की, जो बाद में हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई।

सीबीआई की जांच की भूमिका

इस मामले की जटिलता और बढ़ गई जब जनवरी 2004 में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस हत्या की सीबीआई जांच की सिफारिश की। जग्गी के बेटे ने पुलिस जांच पर असंतोष व्यक्त किया था। सीबीआई ने बाद में अमित जोगी को आरोपी मानते हुए इस मामले को आगे बढ़ाया। सीबीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि अमित जोगी और अन्य ने एक रैली को बाधित करने की योजना बनाई थी।

भविष्य का क्या होगा?

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर और अमल रुका रहेगा। अब देखना यह है कि अमित जोगी इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। उनके भविष्य और राजनीति में उनकी भूमिका इस फैसले पर निर्भर करेगी। विदित हो कि यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा से चर्चित रहा है, और इसे लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं

राजनीतिक दृष्टिकोन से भी यह मामला महत्वपूर्ण है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस फैसले पर अपनी राय व्यक्त की है। हालांकि, इस वक्त कोई भी औपचारिक बयान नहीं आया है। राज्यों के बड़े नेताओं का इस मामले पर ध्यान रहना स्वाभाविक है, क्योंकि इससे राज्य की राजनीतिक दिशा प्रभावित हो सकती है।

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