योगी सरकार ने बदला पोषण का पूरा सिस्टम, GPS-QR-OTP से राशन की हर डिलीवरी पर नजर

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में बच्चों और महिलाओं तक पोषण सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में टेक होम राशन (THR) व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा गया है, ताकि उत्पादन इकाई से लेकर लाभार्थी के घर तक पोषण सामग्री की पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखी जा सके। सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था के जरिए करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सामग्री पहुंच रही है। इसमें छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं शामिल हैं।

जीपीएस से ट्रैक हो रहे राशन वाहन

टेक होम राशन की सप्लाई में सबसे अहम बदलाव GPS ट्रैकिंग का है। पोषण सामग्री लेकर जाने वाले वाहनों की आवाजाही पर डिजिटल तरीके से नजर रखी जाती है। इससे यह पता लगाना आसान होता है कि वाहन कहां है और निर्धारित रास्ते से सामग्री की सप्लाई हो रही है या नहीं। इस व्यवस्था का मकसद आपूर्ति के दौरान होने वाली गड़बड़ियों की संभावना को कम करना और राशन को तय प्रक्रिया के तहत निर्धारित स्थान तक पहुंचाना है। इससे अधिकारियों के लिए पूरी सप्लाई प्रक्रिया की निगरानी करना भी आसान हुआ है।

क्यूआर कोड से पैकेट की पहचान

पोषण सामग्री के पैकेट को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया है। पैकेट पर लगे QR कोड के जरिए उसकी पहचान और वितरण से जुड़ी जानकारी को डिजिटल प्रक्रिया में दर्ज किया जाता है। इससे राशन की सप्लाई और वितरण के अलग-अलग चरणों का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलती है। यानी व्यवस्था केवल राशन भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने की कोशिश भी की जा रही है कि सामग्री किस स्तर पर है और उसका वितरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ।

ओटीपी से सही लाभार्थी का सत्यापन

लाभार्थी को पोषण सामग्री देते समय OTP आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पोषण सामग्री निर्धारित लाभार्थी तक ही पहुंचे। ओटीपी सत्यापन के बाद वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है। इससे अधिकारियों के लिए बाद में रिकॉर्ड की जांच करना और किसी गड़बड़ी की स्थिति में जानकारी खोजना आसान हो सकता है।

जरूरत के हिसाब से मिल रहा पोषण

सरकार की व्यवस्था में अलग-अलग वर्गों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अनुपूरक पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को उनकी जरूरत के अनुसार पोषण देने पर जोर है। इसका उद्देश्य सिर्फ राशन पहुंचाना नहीं, बल्कि बच्चों और महिलाओं को उनकी जरूरत के हिसाब से अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराना है। इसके जरिए कुपोषण से निपटने की सरकारी कोशिशों को भी मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।

तकनीक से बढ़ी जवाबदेही

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के मुताबिक, पोषण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा जवाबदेही और निगरानी को मिल रहा है। उत्पादन, परिवहन और वितरण के अलग-अलग चरणों में डिजिटल रिकॉर्ड होने से किसी स्तर पर गड़बड़ी की पहचान करना पहले की तुलना में आसान हो सकता है। जीपीएस, क्यूआर कोड और ओटीपी जैसी व्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़कर सप्लाई चेन को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद कर रही हैं। इससे अधिकारियों के पास निगरानी के लिए ज्यादा स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।

पोषण के साथ सुशासन पर भी जोर

योगी सरकार पोषण व्यवस्था को केवल खाद्य सामग्री बांटने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देख रही है। इसमें स्वास्थ्य, तकनीक और सुशासन को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि पोषण सामग्री ज्यादा से ज्यादा लाभार्थियों तक पहुंचे, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित हो कि सामग्री सही समय पर, तय गुणवत्ता के साथ और सही व्यक्ति तक पहुंचे।

अब पोषण व्यवस्था कितनी बदलेगी?

टेक होम राशन में डिजिटल निगरानी लागू होने से उत्तर प्रदेश की पोषण व्यवस्था पहले की तुलना में ज्यादा ट्रैक करने योग्य बन रही है। करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों वाली इस बड़ी व्यवस्था में GPS, QR कोड और OTP जैसी तकनीकें पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। आने वाले समय में इन डिजिटल व्यवस्थाओं के बेहतर इस्तेमाल से पोषण सामग्री की सप्लाई और वितरण को और ज्यादा जवाबदेह बनाने की उम्मीद है।

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