कॉरपोरेट इंडिया में महिलाओं की बढ़ी हिस्सेदारी, हर 3 में 1 डायरेक्टर महिला

The CSR Journal Magazine
हाल ही में सरकार ने कॉरपोरेट इंडिया में महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। देश की सक्रिय कंपनियों में कुल 39.99 लाख डायरेक्टर हैं, जिनमें से 11.6 लाख से ज्यादा महिलाएं हैं। यानी, हर तीन डायरेक्टर में एक महिला हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि महिलाएं अब संचालकीय और निर्णय लेने की भूमिकाओं में प्रमुखता से भाग ले रही हैं।

बोर्ड में महिलाएं: जिम्मेदारी और नेतृत्व

टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों में महिलाएं विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। इनमें 9 महिला CEO, 25 महिला मैनेजिंग डायरेक्टर, 67 महिला एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और 638 महिला इंडिपेंडेंट डायरेक्टर शामिल हैं। यह स्पष्ट करता है कि महिलाएं केवल एक पद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कॉरपोरेट सेक्टर के शीर्ष स्तर पर व्यस्त हैं।

महिला डायरेक्टर की आवश्यकता: क्या है कानून?

कंपनी कानून के अंतर्गत कुछ कंपनियों के लिए बोर्ड में कम से कम एक महिला डायरेक्टर रखना अनिवार्य है। लिस्टेड कंपनियों और कुछ अनलिस्टेड कंपनियों को यह नियम निश्चित करना होता है। अगर किसी महिला डायरेक्टर का पद खाली होता है, तो उसे जल्द से जल्द भरने का प्रावधान है।

आंकड़े जो बताते हैं बदलाव की कहानी

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अनुसार, सक्रिय कंपनियों के 39,99,656 डायरेक्टरों में 11,60,933 महिलाएं हैं। यह करीब 29 फीसदी महिलाएं डायरेक्टर के रूप में दिखाई देती हैं, जो बोर्ड स्तर पर निर्णय लेने की महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

कानूनी चूक पर कार्रवाई: कितनी औपचारिकताएं हुईं?

सरकार ने बताया कि महिला डायरेक्टर से जुड़े नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई की गई है। 2021-22 से 2025-26 तक कुल 50 मामलों में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने शिक्षा संबंधी आदेश पास किए हैं। इन मामलों में कुल 71,01,500 रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।

महिलाओं के नेतृत्व में कॉरपोरेट सेक्टर का भविष्य

महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी कॉरपोरेट सेक्टर में उम्मीद जगाती है। यह न केवल उनके लिए अवसरों का द्वार खोलता है, बल्कि यह दर्शाता है कि अब महिलाएं मजबूती के साथ निर्णय लेने में भागीदारी कर रही हैं। उनकी मौजूदगी से कंपनियों में विविधता और समावेशिता की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।

क्या है आगे की राह?

सरकार के आकड़ों के अनुसार, महिलाओं की हिस्सेदारी में वृद्धि को लेकर कोई अलग अध्ययन अभी तक नहीं किया गया है। यह जानना जरूरी है कि ऐसी कौन सी बाधाएं हैं जो महिलाओं को शीर्ष पदों तक पहुंचने से रोकती हैं। आने वाले दिनों में यदि इन चुनौतियों को समझा जाए तो प्रगति की ओर और बेहतर कदम उठाए जा सकते हैं।

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