पीएम मोदी से अभिजीत दीपके की अपील: 15 अगस्त को लाल किले से GenZ के भविष्य पर बात करें

The CSR Journal Magazine

दीपके ने पीएम से स्वतंत्रता दिवस पर युवाओं को संबोधित करने की अपील की

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवा कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक विशेष ऑनलाइन याचिका के जरिए आगामी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं और ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) की समस्याओं पर सीधे बात करने की अपील की है।

लाल किले से युवाओं और ‘Gen Z’ की समस्याओं पर बोलें पीएम मोदी: अभिजीत दीपके की बड़ी अपील

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में युवाओं के मुद्दों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और प्रमुख युवा चेहरा अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहद अनोखी और बड़ी मांग की है। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत वीडियो संदेश जारी कर पीएम मोदी से अपील की है कि वे इस बार 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से दिया जाने वाला अपना पूरा पारंपरिक संबोधन देश की युवा पीढ़ी यानी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) के नाम समर्पित करें।

दीपके ने लॉन्च की Online Petition

युवाओं की इस सामूहिक आवाज़ को देश के शीर्ष नेतृत्व तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए दीपके ने एक ऑनलाइन याचिका (Online Petition) भी लॉन्च की है। उन्होंने देश के लाखों छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा युवाओं से इस डिजिटल मुहीम का हिस्सा बनने और याचिका पर हस्ताक्षर करने का पुरजोर आग्रह किया है। CJP का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि देश के उस ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (जनसांख्यिकीय लाभांश) की पुकार है जिसके भरोसे भारत विकसित देश बनने का सपना देख रहा है।

युवाओं के तीन यक्ष प्रश्न: शिक्षा, रोजगार और महंगाई

अभिजीत दीपके ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि हर साल देश के प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से सरकार की पुरानी उपलब्धियों, आंकड़ों और भविष्य की कई बड़ी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) योजनाओं का लेखा-जोखा देश के सामने रखते हैं। लेकिन साल 2026 का युवा आज अपने भविष्य, अपनी रोज़मर्रा की अनिश्चितताओं और करियर को लेकर सीधे देश के प्रधान सेवक से ठोस और पारदर्शी जवाब चाहता है। CJP प्रमुख ने मांग की है कि पीएम मोदी अपने आगामी भाषण में देश के युवाओं को परेशान करने वाली निम्नलिखित तीन सबसे गंभीर समस्याओं पर सरकार का स्पष्ट रोडमैप और नीतियां साझा करें।

शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार और परीक्षाओं की शुचिता

देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली इस समय बड़े बदलावों और कई विवादों के दौर से गुजर रही है। दीपके ने कहा कि हालिया समय में देश की सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर युवाओं के मन में गहरा अविश्वास और मानसिक तनाव पैदा हुआ है। पेपर लीक और परीक्षा प्रणालियों में तकनीकी व प्रशासनिक कमियों ने लाखों छात्रों के सालों की मेहनत पर पानी फेरा है। प्रधानमंत्री को देश को आश्वस्त करना चाहिए कि सरकार भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए क्या सख्त कानूनी और तकनीकी कदम उठा रही है।

बढ़ती बेरोजगारी और रोजगार सृजन का ठोस ढांचा

भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, लेकिन यहाँ कौशल (Skill) और रोजगार के अवसरों के बीच एक बड़ी खाई है। दीपके ने प्रधानमंत्री से मांग की कि वे केवल नई योजनाओं की घोषणा न करें, बल्कि यह बताएं कि वर्तमान में रोजगार सृजन की क्या रफ्तार है। नई सरकारी नौकरियों के अवसर कब और कैसे निकलेंगे, देश में स्टार्टअप्स को जमीनी स्तर पर टिके रहने के लिए क्या मदद दी जा रही है और डिग्री धारक युवाओं को उद्योग की जरूरतों के हिसाब से कुशल (Skill Development) बनाने के लिए सरकार के पास क्या वास्तविक ब्लूप्रिंट है।

जीवन-यापन की भारी लागत (Cost of Living)

मेट्रो शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में घर से बाहर रहने वाले युवाओं के लिए महंगाई एक बहुत बड़ा संकट बन चुकी है। दीपके के अनुसार, उच्च शिक्षा की बढ़ती फीस, शहरों में किराए के मकानों की आसमान छूती कीमतें और रोज़मर्रा के खान-पान व परिवहन की बढ़ती लागत ने युवाओं की कमर तोड़ दी है। युवा पीढ़ी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरतों पर ही खर्च करने को मजबूर है। सरकार के पास युवाओं के इस आर्थिक बोझ को कम करने के लिए क्या तात्कालिक राहत योजनाएं हैं, इस पर पीएम को खुलकर बोलना चाहिए।

देशव्यापी डिजिटल आंदोलन: ‘एक हफ्ते तक पीएम से करें अनुरोध’

अभिजीत दीपके ने देश के कोने-कोने में बैठे युवाओं को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा, “मैं भारत के प्रत्येक युवा और जेन ज़ी सदस्य से अनुरोध करता हूं कि वे अगले एक हफ्ते तक सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रधानमंत्री से लगातार यह मांग करें कि इस बार का स्वतंत्रता दिवस भाषण सिर्फ और सिर्फ आपके लिए हो।” CJP का मानना है कि लाल किला देश का सबसे बड़ा और गरिमामयी राष्ट्रीय मंच है। यदि देश के प्रधानमंत्री इस मंच से सीधे युवाओं की चिंताओं को स्वीकार करते हैं और उनके समाधान का आश्वासन देते हैं, तो इससे युवा पीढ़ी का भारतीय लोकतंत्र, शासन प्रणाली और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में खोया हुआ विश्वास फिर से और अधिक मजबूत होगा।

अतीत के संघर्ष: नीट (NEET) के खिलाफ 36 दिनों का आंदोलन

यह पहली बार नहीं है जब अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी सीजेपी ने युवाओं के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाया है। इससे पहले, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी ने देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 36 दिनों तक ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन को देशभर के छात्रों और कई विपक्षी दलों का भारी समर्थन मिला था, जिसने सरकार को परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करने पर मजबूर किया था।

भविष्य की रणनीति: ‘क्या बोलती पब्लिक‘ टूर और शिक्षा सुधार अभियान

हाल ही में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में कॉकरोच जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई थी। इस बैठक में संगठन ने अपने भविष्य के आंदोलनों और अभियानों की रूपरेखा तैयार की है। CJP ने देशव्यापी स्तर पर “क्या बोलती पब्लिक” राष्ट्रीय जन-संवाद यात्रा और व्यापक शिक्षा सुधार अभियान की आधिकारिक घोषणा की है।यह राष्ट्रव्यापी जन-संवाद अभियान आगामी 1 सितंबर से देश के अलग-अलग राज्यों में एक साथ शुरू होने जा रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, कोचिंग हबों और युवा हॉस्टलों में जाकर सीधे छात्रों और बेरोजगार युवाओं से संवाद करेंगे। इस यात्रा के दौरान युवाओं से उनकी समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं पर लिखित और डिजिटल राय ली जाएगी। इन सभी इनपुट्स को मिलाकर एक व्यापक ‘युवा सुधार चार्टर’ (Youth Reform Charter) तैयार किया जाएगा, जिसे बाद में केंद्र और राज्य सरकारों को नीति निर्धारण के लिए सौंपा जाएगा।

राजनीतिक मायने और आगामी 15 अगस्त पर टिकीं नजरें

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में इस समय युवाओं से जुड़े मुद्दे बेहद संवेदनशील मोड़ पर हैं। विपक्ष भी लगातार संसद से लेकर सड़क तक बेरोजगारी और पेपर लीक के मामलों पर सरकार को घेरता रहा है। ऐसे में CJP और अभिजीत दीपके द्वारा स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले शुरू की गई यह ऑनलाइन याचिका और डिजिटल अभियान सरकार पर एक नया नैतिक और राजनीतिक दबाव बना सकता है। अब पूरे देश और विशेषकर युवा वर्ग की नजरें आगामी 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से होने वाले ऐतिहासिक संबोधन पर टिक गई हैं। देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रधानमंत्री हमेशा की तरह अपने इस भाषण में युवा पीढ़ी की इन ज्वलंत आकांक्षाओं, आर्थिक चुनौतियों और व्यवस्थागत शिकायतों को प्रमुखता से शामिल करते हैं, या फिर सरकार अपने तयशुदा एजेंडे और विकास कार्यों के उल्लेख तक ही सीमित रहती है।

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