उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने निगरानी और व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। प्रदेश के 75 जनपदों में संचालित हजारों गौ-आश्रय स्थलों पर अब आधुनिक तकनीक के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है। सरकार का साफ संदेश है कि गोवंश की देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
65 जिलों में सीसीटीवी से निगरानी, बाकी में प्रक्रिया जारी
प्रदेश के कुल 6718 ग्रामीण गौ-आश्रय स्थलों में से 65 जनपदों के 4366 गौ-आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा चुका है। इससे इन स्थलों पर गोवंश की स्थिति, चारा-पानी, साफ-सफाई और देखभाल की लगातार निगरानी संभव हो रही है। शेष जनपदों में भी निगरानी तंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
20 जिलों में बने केंद्रीकृत कंट्रोल रूम
गौ-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं पर सीधी नजर रखने के लिए प्रदेश के 20 जनपदों के विकास भवनों में केंद्रीकृत कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। हरदोई, आगरा, जालौन, झांसी, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, जौनपुर, अयोध्या, आजमगढ़, पीलीभीत, कौशांबी, शामली, बस्ती, अंबेडकरनगर, बलिया, एटा, अमरोहा, फर्रुखाबाद और चंदौली में ये कंट्रोल रूम सक्रिय हैं। यहां से अधिकारियों द्वारा रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे किसी भी समस्या पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
गौ-आश्रय स्थलों में मूलभूत सुविधाओं पर फोकस
योगी सरकार गौ-आश्रय स्थलों को सिर्फ आश्रय तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है। इन स्थलों पर गोवंश के लिए शेड, स्वच्छ चारा और पेयजल, भूसा भंडारण गृह, उपचार कक्ष, पक्के रास्ते, रोशनी और सोलर लाइट जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पशुपालन विभाग लगातार इन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है।
ठंड में गोवंश की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता
सर्दी के मौसम को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ठंड के कारण किसी भी गोवंश की मृत्यु न हो। इसके लिए गौ-आश्रय स्थलों पर तिरपाल, काउ-कोट, अलाव, हरा चारा, दवाइयां और उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है। पेयजल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।
लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई
पशुपालन विभाग के अनुसार, मजबूत निगरानी व्यवस्था के चलते अब किसी भी तरह की लापरवाही सामने आते ही तुरंत कार्रवाई संभव हो पा रही है। योगी सरकार का यह प्रयास प्रदेश में गोवंश संरक्षण को नई गति देने के साथ-साथ गौसेवा को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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