घर और जमीन के मालिकाना हक में पुरुषों से कितना पीछे है महिलाएं?

The CSR Journal Magazine
भारत में महिलाएं शिक्षा और नौकरियों में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन जब बात संपत्ति की आती है, तो हालात ठीक नहीं हैं। हाल ही में राज्यसभा में जो आंकड़े पेश हुए, उनसे यह साफ होता है कि 15 से 49 वर्ष की उम्र की केवल 42.3% महिलाएं ही या तो अकेले या संयुक्त रूप से घर की मालिक हैं। वहीं, पुरुषों में यह आंकड़ा 60.1% है। यह न केवल एक संख्या है, बल्कि महिलाएं आर्थिक रूप से कितनी सुरक्षित हैं, इसका भी इशारा करती है।

जमीन पर महिलाओं की स्थिति

जब बात जमीन की आती है, तो महिलाओं का हाल और खराब है। 15 से 49 साल की उम्र की महज 31.7% महिलाएं ही जमीन की मालिक हैं। इसी तुलना में, पुरुषों के पास यह आंकड़ा 42.3% है। यह दर्शाता है कि आर्थिक सुरक्षा और निर्णय लेने की क्षमता पर संपत्ति का सीधा असर पड़ता है।

सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?

अनेक सरकारी योजनाओं के बावजूद, घर और जमीन के मामले में महिलाओं का हिस्सा पुरुषों से लगातार कम है। NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार, घर के मालिकाना हक में अंतर 17.8% और जमीन के मामले में यह 10.6% है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि हम इस डेटा को केवल आंकड़े नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन पर उसके प्रभाव के रूप में देखें।

सरकार की योजनाएं और कदम

महिलाओं के संपत्ति अधिकार को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में घर की सुरक्षा निश्चित रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार ने हालिया वर्षों में इन योजनाओं को और प्रभावशाली बनाने का प्रयास किया है।

जेंडर कॉलम की पहल

महिलाओं के आर्थिक अधिकार को मजबूत करने के लिए, जमीन रिकॉर्ड में महिलाओं के मालिकाना हक की जानकारी को अलग से दर्ज करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से भविष्य में यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि का मालिक कौन है, और इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी है।

महिलाओं को मालिक बनाने की दिशा में

सरकार ने यह सुनिश्चित करने की योजना बनाई है कि संपत्ति के कागजात पर महिला का नाम होना अनिवार्य हो। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी और ग्रामीण दोनों में इसका स्पष्ट प्रावधान है। इससे महिलाओं को संपत्ति से जुड़े अधिकार मिलेंगे, जो उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद करेगा।

समाज में महिलाओं की स्थान

घर जैसी संपत्ति न केवल आर्थिक सुरक्षा का स्रोत है, बल्कि यह परिवार में महिलाओं की सामाजिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान करती है। यदि महिलाओं को संपत्ति का अधिकार मिलता है, तो यह उनके आत्म-सम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता में भी मददगार साबित होगा।

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