वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का नया प्रावधान चर्चा में है। मध्य प्रदेश पहला राज्य बना है, जिसने इस कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। अब सवाल उठता है कि क्या वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य शामिल किए जा सकते हैं?
एक नया अध्याय: हिंदू सदस्यों की नियुक्ति
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत केंद्रीय वक्फ परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और राज्य वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य नामित किए जा सकते हैं। इसमें हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, और जैन जैसे गैर-मुस्लिम धर्मों के व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। यह प्रावधान वक्फ बोर्ड की संरचना को बदल सकता है और इस पर व्यापक बहस चल रही है।
मध्य प्रदेश का कदम क्यों बन गया चर्चा का केंद्र?
मध्य प्रदेश ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम लागू होने के बाद अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। राज्य सरकार ने 10 सदस्यीय बोर्ड का गठन किया है, जिसमें मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव जैसे दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही, बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सनवर पटेल को दोबारा नियुक्त किया गया है। हालांकि, कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस कदम का विरोध किया है, यह दावा करते हुए कि जब वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, तब नए बोर्ड का गठन जल्दबाजी है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
वक्फ (संशोधन) कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कानून की पूरी वैधता पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन कुछ विवादित प्रावधानों पर अंतरिम आदेश दिए हैं। गैर-मुस्लिम सदस्यों की वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों का मुद्दा भी सुर्खियों में है, जहां मुस्लिम संगठनों का यह कहना है कि वक्फ एक धार्मिक संस्था है और इसके प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
विरोध और समर्थन का सिलसिला
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विरोध के सुर भी तेज हैं। कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन का कहना है कि यह एक धार्मिक और सामाजिक संस्था है। इसी तरह, केंद्र सरकार का कहना है कि यह परिवर्तन वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए किया गया है।
वक्फ कानून की आवश्यकता और उद्देश्य
वक्फ अधिनियम, 1995 का गठन मुस्लिम समुदाय की वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए किया गया था। ये संपत्तियां धार्मिक, शैक्षणिक, या सामाजिक कार्यों के लिए दान की जाती हैं। वक्फ बोर्डों का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि इन संपत्तियों का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाए, जिसके लिए उन्हें दान किया गया था।
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