Taj Hotel BMC Dues Dispute: ताज होटल पर निगम का शिकंजा, लाखों रुपये का किराया, लेकिन BMC का 22 करोड़ बकाया!

The CSR Journal Magazine
Taj Hotel BMC Dues Dispute: Tata Group की मुंबई के प्रतिष्ठित ताज महल पैलेस होटल और Mumbai BMC के बीच 22 करोड़ रुपये के बकाया शुल्क को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 26/11 आतंकी हमलों के बाद होटल की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स और एंटी-रैम बोलार्ड का शुल्क अब ताज होटल से वसूला जा रहा है। BMC ने होटल प्रबंधन को बकाया राशि जमा करने का नोटिस भेजा है। दूसरी ओर, ताज होटल शुल्क में छूट की मांग कर रहा है। Taj Hotel BMC Dues Dispute:

सुरक्षा के नाम पर 22 करोड़ का बकाया

BMC का कहना है कि 26/11 हमले के बाद होटल के आसपास सार्वजनिक सड़क और फुटपाथ पर स्थायी सुरक्षा बैरियर लगाए गए थे। Mumbai BMC के नियमों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के ढांचे के लिए निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य है। अधिकारियों के मुताबिक 2009 से यह शुल्क पूरी तरह जमा नहीं किया गया, जिसके कारण ब्याज और अन्य देयकों के साथ बकाया राशि बढ़कर लगभग 22 करोड़ रुपये हो गई है।

Taj Hotel BMC Dues Dispute: ताज होटल का क्या है तर्क?

टाटा ग्रुप के होटल प्रबंधन का कहना है कि बैरिकेड्स किसी व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं लगाए गए थे, बल्कि 26/11 जैसे आतंकी हमले की पुनरावृत्ति रोकने और आम नागरिकों व मेहमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए थे। इसलिए इस शुल्क में राहत दी जानी चाहिए। इसी मुद्दे पर BMC और होटल प्रबंधन के बीच बातचीत जारी है और अगले सप्ताह कोई अंतिम फैसला सामने आ सकता है।

पहले मिली थी राहत, फिर पलट गया फैसला

यह विवाद नया नहीं है। वर्ष 2020 में तत्कालीन स्थायी समिति ने होटल को लगभग 10 करोड़ रुपये की राहत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। लेकिन 2025 में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक ने उस निर्णय को निरस्त कर दिया। इसके बाद मामला फिर से लंबित हो गया और अब BMC के नए नोटिस के बाद चर्चा में आ गया है।

Taj Hotel BMC Dues Dispute: उठ रहे हैं कई सवाल

इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित लग्जरी होटलों में शामिल ताज महल पैलेस, जहां एक कमरे का किराया कई बार लाखों रुपये तक पहुंच जाता है, वह यदि BMC का 22 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुका पा रहा है तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि होटल प्रबंधन का कहना है कि विवाद भुगतान की क्षमता का नहीं, बल्कि शुल्क की वैधता और उसमें राहत का है। अब सभी की नजर BMC और ताज होटल के बीच होने वाली अगली बैठक पर है। यदि समझौता नहीं होता, तो यह मामला कानूनी रूप भी ले सकता है।
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