मथुरा महासंग्राम: 9 अगस्त को जन्मभूमि कारसेवा का संतों का महा-ऐलान

The CSR Journal Magazine

अयोध्या के बाद अब मथुरा की बारी, 9 अगस्त को होगी कृष्ण जन्मभूमि कारसेवा, संतों का ऐलान, सभी भक्तों से मथुरा पहुंचने की अपील

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और वहां भव्य मंदिर निर्माण की मांग को लेकर संत समाज ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब संतों ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली को मुक्त कराने के लिए 9 अगस्त को देशव्यापी कारसेवा का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। उत्तराखंड के हरिद्वार और मथुरा के निर्मोही अखाड़ा में आयोजित हुईं संतों की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर बाकायदा पोस्टर भी जारी किए गए हैं।

संतों का महा-आह्वान- ‘चलो मथुरा’

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी और चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज के संयुक्त नेतृत्व में इस महा-आंदोलन का शंखनाद किया गया है। संतों ने देशभर के सनातनी भक्तों, हिंदू संगठनों और कृष्ण भक्तों से अपील करते हुए ‘चलो मथुरा’ का नारा दिया है। महंत रवींद्र पुरी ने इस मुहिम को गति देते हुए कहा कि जिस प्रकार साधु-संतों और रामभक्तों ने अयोध्या कूच करके इतिहास रचा था, ठीक उसी तरह अब समय आ गया है कि सभी कृष्ण भक्त मथुरा पहुंचें। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक ठाकुर देवकीयंदन महाराज से भी मुलाकात की है, जिन्होंने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।

देशभर से जुटेगा संतों का सैलाब

इस कारसेवा को सफल बनाने के लिए केवल हरिद्वार से ही करीब 600 से 700 प्रमुख संतों का जत्था मथुरा के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा निर्मोही अखाड़ा, महामंडलेश्वर बालकानंद, और काली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने भी इस आंदोलन को धार देने का संकल्प लिया है। संतों का दावा है कि 9 अगस्त को ‘क्रांति दिवस’ के अवसर पर देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मथुरा की पावन भूमि पर एकत्र होंगे।

‘अभी नहीं तो कभी नहीं’: संतों की मुख्य मांग

बैठक में संतों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जन्मभूमि परिसर से विवादित ढांचे या गुंबद को हटाकर बिना किसी देरी के भव्य श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। संतों का तर्क है कि यह केवल मथुरा का स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक सनातन समाज की अटूट आस्था का विषय है। संतों ने यह भी कहा कि “अब अभी नहीं तो कभी नहीं की स्थिति है, भगवान श्रीकृष्ण को उनके मूल गर्भगृह में पूर्ण रूप से विराजमान देखना ही हमारा अंतिम संकल्प है”।

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद का कानूनी विवाद वर्तमान में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) और इलाहाबाद हाई कोर्ट के बीच बेहद संवेदनशील कानूनी प्रक्रियाओं से गुजर रहा है।इस बहुचर्चित कानूनी मामले से जुड़ी वर्तमान स्थिति और मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।

सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पहल और लोक अदालत का विफल प्रयास

सर्वोच्च अदालत ने अपने राष्ट्रव्यापी अभियान ‘समाधान समारोह 2026’ के तहत उत्तर प्रदेश के तीन बड़े धार्मिक विवादों (मथुरा, ज्ञानवापी और संभल) को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रस्ताव दिया था। इसके तहत 21 से 23 अगस्त के बीच सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक विशेष लोक अदालत का आयोजन होना तय हुआ है।

वार्ता का प्रयास असफल

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मथुरा की स्थानीय लोक अदालत में (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की देखरेख में) समझौते की एक प्रारंभिक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में हिंदू याचिकाकर्ता तो शामिल हुए, लेकिन शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी का कोई भी प्रतिनिधि या वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने सुलह प्रक्रिया के विफल होने की आधिकारिक रिपोर्ट बंद कर दी है। दोनों पक्षों ने इस विवाद का निपटारा आपसी समझौते के बजाय पूरी तरह कानूनी मेरिट (Legal Merits) के आधार पर करने का विकल्प चुना है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुख्य मुकदमों की सुनवाई

मथुरा जिला अदालत से स्थानांतरित होकर इस विवाद से जुड़े लगभग 18 मूल मुकदमे सीधे इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रहे हैं। मुस्लिम पक्ष (शाही ईदगाह और वक्फ बोर्ड) ने दलील दी थी कि 1991 के पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act) के तहत हिंदू पक्ष के ये मुकदमे सुनवाई योग्य नहीं हैं। हालांकि, हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की इस आपत्ति को पूरी तरह खारिज करते हुए हिंदुओं के मुकदमों को कानूनी रूप से स्वीकार्य (Maintainable) माना है।

प्रतिनिधि मुकदमा घोषित

अदालत ने एक प्रमुख सिविल सूट (Original Suit No. 17 of 2023) को प्रतिनिधि मुकदमा (Representative Suit) घोषित कर दिया है। इसका मतलब यह है कि इस केस का जो भी अंतिम फैसला आएगा, वह भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों और संबंधित पक्षों पर समान रूप से लागू और बाध्यकारी होगा।

केंद्र सरकार और ASI को पक्षकार बनाना

हाई कोर्ट ने हिंदू याचिकाकर्ताओं की अर्जी को स्वीकार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी इस केस में प्रतिवादी (पक्षकार) बनाने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रथम दृष्टया हाई कोर्ट के इस कदम को सही ठहराया है।

दोनों पक्षों के मुख्य कानूनी तर्क

हिंदू पक्ष का दावा है कि पूरी 13.37 एकड़ जमीन राजा पटनीमल के वंशजों से खरीदी गई श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की है। उनका दावा है कि विदेशी आक्रांता औरंगज़ेब ने मंदिर तोड़कर उसके मुख्य गर्भगृह पर अवैध रूप से ईदगाह का ढांचा खड़ा किया था। हिंदू पक्ष मस्जिद को वहां से हटाने और वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग पर अड़ा है जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह ढांचा सदियों पुराना है और वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह कमेटी के बीच एक लिखित समझौता हुआ था, जिसके तहत इस स्थिति को दोनों पक्षों ने स्वीकार किया था। वे मुकदमों को खारिज कराने के लिए ऊपरी अदालतों में अपील का सहारा ले रहे हैं।

देशभर से जुड़ेंगे लाखों संत-श्रद्धालु

मथुरा में 9 अगस्त को होने वाली श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा के लिए संत समाज ने देशभर से लाखों श्रद्धालुओं और साधु-संतों के जुटने की उम्मीद जताई है। इस आंदोलन के देशव्यापी स्वरूप को देखते हुए विभिन्न राज्यों और धार्मिक केंद्रों से भीड़ जुटने का अनुमान है। प्रमुख रूप से जहाँ से भीड़ उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है, वे क्षेत्र इस प्रकार हैं-

उत्तराखंड (हरिद्वार और ऋषिकेश)

हरिद्वार में संतों की महाबैठक के बाद यह तय हुआ है कि अकेले उत्तराखंड से ही करीब 600 से 700 शीर्ष साधु-संतों और महामंडलेश्वरों का विशाल जत्था इस कारसेवा की अगुवाई करने मथुरा पहुंचेगा।

उत्तर प्रदेश (ब्रज क्षेत्र, अयोध्या और वाराणसी)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े विभिन्न अखाड़ों (विशेषकर निर्मोही अखाड़ा) के कारण उत्तर प्रदेश के स्थानीय जिलों जैसे अलीगढ़, आगरा, हाथरस और फिरोजाबाद से हजारों की संख्या में स्थानीय ब्रजवासी और कृष्ण भक्त सीधे मथुरा पहुंचेंगे। अयोध्या के संतों ने भी इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है, जिससे वहां से भी संतों की बड़ी टुकड़ी आने की संभावना है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान

मथुरा से सटे हुए राजस्थान (भरतपुर, अलवर, जयपुर) और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भारी संख्या में ग्रामीण और शहरी श्रद्धालुओं के जत्थे निजी वाहनों और बसों के जरिए ब्रज क्षेत्र की ओर कूच कर सकते हैं।

धार्मिक संगठन और सेनाएं

स्वामी आनंद स्वरूप के नेतृत्व वाली ‘काली सेना’ और अन्य हिंदूवादी युवा संगठनों के हजारों कार्यकर्ता इस कारसेवा में सीधे हिस्सेदारी के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचेंगे। संतों का दावा है कि ‘चलो मथुरा’ अभियान के तहत 9 अगस्त (क्रांति दिवस) को मथुरा की सड़कों पर लाखों सनातनियों का सैलाब दिखेगा। इस संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन सुरक्षा घेरा तैयार कर रहा है।

प्रशासनिक सतर्कता और कानून व्यवस्था

संतों के इस बड़े और संवेदनशील ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। चूंकि मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद का कानूनी विवाद न्यायालय में भी विचाराधीन है, इसलिए पुलिस महकमा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष रणनीति बना रहा है। हालांकि, आंदोलन की घोषणा करने वाले संतों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह अभियान प्रतीकात्मक और पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा, जिसमें कानून और न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान किया जाएगा। इसके बावजूद, आगामी 9 अगस्त को लेकर ब्रज क्षेत्र सहित पूरे उत्तर प्रदेश में सामाजिक और धार्मिक हलचल चरम पर पहुंच गई है।

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