ओवैसी का बड़ा आरोप: राजस्थान में 250 साल पुरानी दरगाह समेत 13 धार्मिक स्थलों को ढहाया गया

The CSR Journal Magazine

राजस्थान में धार्मिक स्थलों का ध्वंस, ओवैसी की अमित शाह से दखल की अपील

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम धार्मिक स्थलों के विध्वंस को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने पोस्ट में ओवैसी ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को पूरी तरह से “भेदभावपूर्ण और लक्षित (टार्गेटेड)” करार दिया है.

ऐन राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई

राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिलों में AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम धार्मिक स्थलों के ध्वंस का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इसे जानबूझकर भेदभावपूर्ण कार्रवाई करार देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की है। ओवैसी ने कहा कि इन धार्मिक स्थलों में कई मस्जिदें, दरगाहें और अन्य महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।

250 साल पुरानी दरगाह का ध्वंस

ओवैसी ने बताया कि जैसलमेर में रामगढ़-तानोट बाईपास रोड पर स्थित हजरत महमूद शाह जिलानी की 250 साल पुरानी दरगाह को भी तोड़ा गया है। हालांकि, अधिकारियों ने अपने फैसले का औचित्य बताते हुए कहा है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण किया गया है। उनका तर्क है कि इन स्थानों का निर्माण अवैध रूप से हुआ था, लेकिन ओवैसी ने इन दावों को गलत बताया है।

प्रभावित जिले और धार्मिक स्थल

ओवैसी ने AIMIM के बीकानेर जिला अध्यक्ष शफी जमील कासमी के हवाले से बताया कि राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिलों बीकानेर, फलोदी, जैसलमेर और बाड़मेर में अब तक कुल 13 मुस्लिम धार्मिक स्थलों (जिनमें मस्जिदें और दरगाहें शामिल हैं) को ध्वस्त किया जा चुका है। ओवैसी का आरोप है कि इस कार्रवाई के तहत प्रशासन द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों के सैकड़ों अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिससे स्थानीय समुदायों में भय का माहौल है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भेदभाव?

ओवैसी ने यह भी बताया कि प्रभावित से जुड़े क्षेत्रों के लोग किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं थे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई विशेष रूप से मुसलमानों के पूजा स्थलों को लक्षित कर रही है। पहले अधिकारियों ने कहा कि इन इमारतों का निर्माण चरागाह पर किया गया था, पर जब दस्तावेज दिखाए गए कि जमीन निजी है, तो तर्क बदल दिया गया।

प्रशासनिक तर्कों का खंडन

ओवैसी के अनुसार, अधिकारियों द्वारा शुरुआत में इन ढांचों को चरागाह (सरकारी जमीन) पर अतिक्रमण बताकर कार्रवाई की जा रही थी। लेकिन जब कुछ संपत्तियों के निजी होने के दस्तावेज दिखाए गए, तो प्रशासन ने ‘जरूरी अनुमति या मंजूरी न होने’ का तर्क देना शुरू कर दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर दी जा रही दलीलों का भी विरोध किया है। ओवैसी के अलावा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी इस प्रशासनिक कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। गहलोत ने इसे शांतिपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और राजनीतिक ध्रुवीकरण पैदा करने की कोशिश बताया है।

ओवैसी का सोशल मीडिया पर जोरदार बयान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ओवैसी ने एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह ध्वंस योजना बनाकर किया जा रहा है। उन्होंने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चार मस्जिदों के ध्वंस का जिक्र किया और इसे सांप्रदायिक आधार पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया। ओवैसी ने फिर से केंद्रीय सरकार से अपील की कि इस तरह की कार्रवाइयों पर तुरंत रोक लगाई जाए। इस संवेदनशील और आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने गृह मंत्रालय और अमित शाह से तुरंत दखल देकर इस विध्वंस अभियान पर रोक लगाने और पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करने की अपील की है

स्थानीय प्रशासन से कोई प्रतिक्रिया नहीं

राजस्थान सरकार या स्थानीय प्रशासन की तरफ से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ओवैसी ने इस चुप्पी को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर शीघ्रता से जवाब देना चाहिए। ऐसे समय में जब धार्मिक स्थलों का ध्वंस हो रहा है, नागरिकों की सुरक्षा और उनके धार्मिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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