शिक्षा सुधार पर झुकेंगी सरकार? Sonam Wangchuk ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें

The CSR Journal Magazine
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने लंबे समय से जारी अनशन को समाप्त करने के लिए तीन महत्वपूर्ण शर्तें सामने रखी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में कहा कि यदि उनकी ओर से रखी गई तीन शर्तों में से किसी एक को भी पूरा किया जाता है, तो वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल व्यक्तिगत मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर है।

सरकार से शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग

वांगचुक की पहली शर्त केंद्र सरकार से जुड़ी है। उन्होंने मांग की है कि सरकार हाल के वर्षों में सामने आई शिक्षा व्यवस्था की कमियों और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे। उनका कहना है कि इन घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है और इसके लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना छात्रों का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता।

संसद में शिक्षा सुधार का मुद्दा उठाने का आश्वासन चाहते हैं वांगचुक

दूसरी शर्त के तहत वांगचुक ने कहा कि यदि वह और उनकी संस्था सीजेपी (Cockroach Janta Party) का प्रतिनिधिमंडल संसद के प्रवेश द्वार तक पहुंचता है और वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद एवं नेता उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों को संसद में गंभीरता से उठाया जाएगा, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उनका मानना है कि इन विषयों पर संसद में व्यापक चर्चा और नीति स्तर पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

स्वास्थ्य कारणों से संसद न पहुंच पाने की स्थिति में भी रखी शर्त

वांगचुक ने अपनी तीसरी शर्त में कहा कि यदि स्वास्थ्य संबंधी कारणों या अन्य परिस्थितियों के चलते वह संसद तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उन्हें यह आश्वासन दें कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी टकराव की स्थिति पैदा करना नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना है।

अस्पताल में हिरासत और अनशन को लेकर विवाद

अपने ताजा पोस्ट में वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में “अवैध रूप से हिरासत” में रखा गया है। उनका दावा है कि अस्पताल में उनकी आवाजाही, अभिव्यक्ति और लोगों से संवाद की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है। गौरतलब है कि वह 28 जून से अनशन पर हैं। शनिवार को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। इसके बाद उन्होंने अस्पताल बदलने की अनुमति के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।

‘संसद चलो’ मार्च से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन वांगचुक के नेतृत्व वाली सीजेपी ने ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया है। इसे देखते हुए संसद परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं तथा कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। इस बीच वांगचुक ने दोहराया है कि यदि उनकी तीन शर्तों में से किसी एक पर भी सकारात्मक पहल होती है, तो वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

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