सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर अड़े रहे और सरकार नहीं मानी तो क्या होगा? क्या इरोम शर्मिला जैसा तरीका अपनाया जाएगा?

The CSR Journal Magazine
सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल करते हुए आज 20 दिन हो गए हैं। उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है और रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने 19 दिनों में 9 किलोग्राम वजन कम किया है। हाई कोर्ट ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है और सरकार को सलाह दी है कि उनकी सेहत की रोजाना जांच की जाए। वांगचुक ने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनके मुद्दों का समाधान नहीं करती, वह अपनी हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।

सरकार के पास क्या विकल्प हैं?

सोनम वांगचुक की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए, अब सरकार के पास कितने विकल्प हैं? दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि हर नागरिक की जान कीमती होती है और सरकार को हर संभव प्रयास करना चाहिए। वर्तमान स्थिति में, क्या वांगचुक की जान बचाने के लिए सरकार को मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला की तरह उपाय अपनाने पड़ सकते हैं?

इरोम शर्मिला का भूख हड़ताल का इतिहास

इरोम शर्मिला, जिन्हें “आयरन लेडी ऑफ मणिपुर” के नाम से जाना जाता है, ने 16 सालों तक भूख हड़ताल की थी। उन्होंने 2000 में मणिपुर के मालोम क्षेत्र में निर्दोष लोगों की हत्या के विरोध में यह आंदोलन शुरू किया। शर्मिला ने अपनी भूख हड़ताल के दौरान सरकारी ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठाई और जबरन नाक के जरिए खाना खिलाए जाने का अनुभव भी किया।

सरकार के संदर्भ में वांगचुक का स्थिति

सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल जारी रखने से न केवल उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि यह सरकार को भी परेशानी में डाल रहा है। यदि सरकार समय पर कदम नहीं उठाती, तो क्या यह स्थिति इरोम शर्मिला के मामले की तरह बढ़ सकती है?

वांगचुक पर बढ़ता दबाव

रिपोर्ट्स के अनुसार, वांगचुक ने राजनीतिक दलों से अपील करने के बावजूद अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने से मना कर दिया है। उनका मानना है कि यदि वह ऐसा करते हैं, तो यह गलत संदेश जाएगा। इस दौरान, उन्होंने 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की भी अपील की है।

क्या होगा अगला कदम?

अब सवाल यह है कि यदि सरकार वांगचुक की मांगों को अनसुना करती है, तो आगे क्या होगा? क्या उन्हें भी इरोम शर्मिला की तरह सख्त कदम उठाना होगा? या फिर सरकार उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जल्द ही कोई उपाय करेगी?

भविष्य की अनिश्चितता

जैसे-जैसे वांगचुक की सेहत बिगड़ रही है, यह स्पष्ट है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने की आवश्यकता है। सरकार की कार्रवाई और वांगचुक के संघर्ष के परिणाम भी दर्शाएंगे कि भारतीय समाज में ऐसे आंदोलनों का क्या प्रभाव पड़ता है।

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