राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 20 दिन बाद FIR, 8 की गिरफ्तारी से सवालों का सिलसिला जारी

The CSR Journal Magazine
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में FIR दर्ज करने में हुई 20 दिन की देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने बैंक कर्मचारियों और ट्रस्ट के पूर्व सदस्यों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के पास चंपत राय पर FIR में जानबूझकर जानकारी छिपाने के आरोप भी हैं। करोड़ों के दान की इस चोरी में अभी कई सवाल हल नहीं हुए हैं।

किसके हाथ में है चाबी?

पुलिस की जांच तेजी से चल रही है, लेकिन ऐसे सवाल हैं जो अभी भी अनुत्तरित हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस चढ़ावा चोरी में और कितने लोग शामिल हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इसके बाद पुलिस ने चंपत राय और कृष्ण मोहन जैसे महत्वपूर्ण लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जो इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर संदेह

इस मामले में दो बैंक कर्मचारियों गगनदीप और रत्नेश चतुर्वेदी की भूमिका पर भी जांच चल रही है। उन्हें पुलिस ने नोटिस दिया है। उनकी बताई गई गतिविधियों से ऐसा लगता है कि बिना उनकी मदद के इस तरह की बड़ी लूट संभव नहीं हो सकती। पुलिस अब एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी के बयान पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।

चोरी के तरीके हुए उजागर

जांच में पता चला है कि अभियुक्तों ने अपने लिए पैसे चुराने के लिए दो तरीके अपनाए। पहले, उन्होंने कैमरों से बचते हुए कैश निकाले। अगर वे ऐसा करने में असफल रहते थे, तो वे रिजिस्टर में गलत एंट्री कर देते थे और बाद में वो रकम निकाल लेते थे। यह चिन्हित करना महत्वपूर्ण है कि बैंककर्मियों के बिना यह सब संभव नहीं था।

गिरफ्तारी पर सवाल उठाने वाले तंत्र

पुलिस ने लव कुश मिश्रा के नए घर की भी तलाशी ली है, जिसे सिर्फ तीन-चार महीनों में तेजी से बनाया गया है। यह घर चढ़ावा काउंटिंग टीम का हिस्सा था। गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ल की परिवार ने एक बार फिर से कहा है कि भगवान उनके बेटे के कर्मों का फल देंगे। पुलिस ने चढ़ावा चोरी से जुड़े अन्य संदिग्धों के बारे में भी जानकारी इकट्ठा की है।

अयोध्या के वकीलों का विरोध

इस बीच, अयोध्या के वकीलों ने तय किया है कि वे गिरफ्तार अभियुक्तों की कानूनी लड़ाई नहीं लड़ेंगे। वकीलों ने मांग की है कि चंपत राय और अन्य प्रमुख सदस्य अयोध्या छोड़ दें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आंदोलन किया जाएगा। यह स्थिति मामले में जटिलता जोड़ रही है।

नए खुलासों का सामना

इस चोरी की बात जैसे ही सार्वजनिक हुई, ट्रस्ट को इसकी जानकारी मिल गई थी। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के सहयोग से आरोपी के घर से काफी धनराशि बरामद की थी। इसके बाद भी FIR में इतनी देरी क्यों की गई, यह एक बड़ा सवाल है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी यहाँ अधिक बढ़ जाती है।

राजनीतिक हमले थमने का नाम नहीं ले रहे

चढ़ावा चोरी के मामले में राजनीतिक पार्टियाँ भी सक्रिय हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने इस पर निशाना साधा है कि राम जी की कृपा से लोग बेनकाब हो रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने इस मामले को लेकर अ

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