CJP आंदोलन के बीच कॉकरोच वाली पोस्ट से विवादों में घिरीं RAF अधिकारी सोनिया सहरावत

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कॉकरोच वाली पोस्ट डालकर विवादों में घिरीं RAF अधिकारी सोनिया सहरावत!

असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत सोशल मीडिया पर अपनी खास पहचान बना चुकी हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6.28 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह अक्सर अपने निजी जीवन की झलक के साथ-साथ वर्दी में ड्यूटी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी साझा करती हैं। उनके फॉलोअर्स उनकी पोस्ट का हमेशा बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। लेकिन हाल ही में उनकी एक इंस्टाग्राम स्टोरी ने उन्हें विवादों में डाल दिया है।

इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा बवाल

जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षाबलों की कार्रवाई के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष दंगा नियंत्रण इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत एक कथित इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर बड़े विवादों में घिर गई हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस ‘कॉकरोच’ वाली पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सुरक्षा बलों के गलियारों तक हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा विवाद?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा नीट (NEET) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘संसद चलो’ मार्च का आयोजन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और RAF की टीमों को तैनात किया गया था, जिसमें असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत भी मुख्य अधिकारियों में शामिल थीं। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें लाठीचार्ज की नौबत आई।

डिलीट की विवादित स्टोरी

इस घटना के ठीक एक दिन बाद, सोनिया सहरावत के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक विवादित स्टोरी साझा की गई। इस पोस्ट में जमीन पर उल्टे पड़े एक छटपटाते हुए कॉकरोच का वीडियो या तस्वीर थी, जिसके ऊपर अंग्रेजी में कैप्शन लिखा था: “Can’t fix themselves and they wanna fix the country” (जो खुद को ठीक नहीं कर सकते, वे देश को सुधारने चले हैं)। हालांकि, विवाद बढ़ता देख उन्होंने इस स्टोरी को तुरंत डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक सोशल मीडिया यूजर्स ने इसके स्क्रीनशॉट ले लिए थे जो देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गए। प्रदर्शनकारियों को अप्रत्यक्ष रूप से ‘कॉकरोच’ कहे जाने पर लोगों ने तीखी आपत्ति जताई है।

CJP और विपक्षी नेताओं का तीखा पलटवार

इस पोस्ट के सामने आते ही प्रदर्शनकारी संगठन CJP और विपक्षी पार्टियों ने RAF अधिकारी पर चौतरफा हमला बोल दिया है। CJP के संस्थापकों और समर्थकों ने इसे सुरक्षा बलों की ‘बर्बरता’ और अहंकार का प्रतीक बताया है। CJP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा: “यह बेहद चौंकाने वाला है। यह RAF अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कॉकरोच के रूप में देखती है और मानती है कि पुलिस की बर्बरता पूरी तरह सही थी। लेकिन याद रखें, हम कॉकरोच हैं और कॉकरोच कभी मरते नहीं हैं!”

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने मांगा जवाब

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए सीधे केंद्र सरकार और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:”RAF की असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत की इंस्टा प्रोफाइल हमारे बच्चों (प्रदर्शनकारियों) को कॉकरोच कह रही है। आइए पता करें कि वह कौन हैं, कहां रहती हैं और उनका पिछला रिकॉर्ड क्या है? कानून के दायरे में लाकर ऐसे कट्टरपंथियों का नाम उजागर करना और उन्हें कटघरे में खड़ा करना जरूरी है।”

सोशल मीडिया स्टार अधिकारी की पृष्ठभूमि

असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत केवल एक ऑन-ड्यूटी अधिकारी नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर उनकी एक बड़ी फैन फॉलोइंग है। उनके अकाउंट पर 6.2 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, जहां वह अक्सर अपनी फिटनेस, डांस रील, निजी जिंदगी और कभी-कभी वर्दी में देश सेवा से जुड़ी तस्वीरें साझा करती रहती हैं। हरियाणा के एक पारंपरिक समाज से ताल्लुक रखने वाली सोनिया ने पूर्व में दिए इंटरव्यूज में बताया था कि उन्होंने NCC के जरिए अनुशासन सीखा और कड़ी मेहनत के बाद UPSC CAPF परीक्षा पास कर CRPF में अधिकारी का पद हासिल किया। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता के कारण ही उनकी इस पोस्ट ने इतनी जल्दी और इतनी व्यापक सुर्खियां बटोरीं।

ड्यूटी के दौरान चोट पर अधिकारी का पक्ष

विवाद के बीच एक दूसरा पहलू यह भी है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सोनिया सहरावत खुद भी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। झड़प के दौरान उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद उनके हाथ पर प्लास्टर चढ़ा हुआ देखा गया। न्यूज चैनलों को दिए अपने साक्षात्कार में सोनिया ने प्रदर्शनकारियों पर ही गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था: ” शांतिपूर्ण छात्रों की आड़ में राजनीतिक दलों के हुड़दंगी और असामाजिक तत्व शामिल थे। भीड़ की तरफ से जवानों पर जूते, पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी गईं। यहां तक कि उनका हेलमेट भी छीनने का प्रयास किया गया। सुरक्षाबलों ने कोई बर्बरता नहीं की, बल्कि भीड़ के अनियंत्रित होकर आगे बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति बनी, जिसमें कुछ महिला प्रदर्शनकारी गिर गईं।” सोनिया के मुताबिक, वह खुद एक महिला प्रदर्शनकारी को बचाने के चक्कर में चोटिल हुईं और भीड़ ने उनके गले पर भी नाखूनों से खरोंचें मारीं।

CRPF सेवा नियमों के उल्लंघन पर विभागीय जांच

हालांकि अधिकारी ने अपनी तरफ से घायल होने की बात सामने रखी है, लेकिन सर्विस रूल के मुताबिक सरकारी सेवा में रहते हुए इस तरह के राजनीतिक या विवादास्पद बयान देना नियमों का खुला उल्लंघन माना जाता है। CRPF के सूत्रों के मुताबिक, विभाग के भीतर इस सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया: “सुरक्षा बल एक पेशेवर और निष्पक्ष इकाई हैं। हमारा काम केवल कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को संभालना है। भले ही कोई टिप्पणी व्यक्तिगत अकाउंट से की गई हो, लेकिन जब आप वर्दी में ऑन-ड्यूटी एक्शन का हिस्सा हैं, तो इस तरह की अपमानजनक या राजनीतिक टिप्पणी बल की पेशेवर छवि को धूमिल करती है। यह अनुशासनात्मक कार्रवाई का मामला बनता है।”

कोर्ट मार्शल की तैयारी

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) जल्द ही असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत से इस सोशल मीडिया गतिविधि को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) मांगने की तैयारी में है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विभागीय नियमों के तहत उन्हें सस्पेंशन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला अब सोशल मीडिया पर ‘अभिव्यक्ति की आजादी बनाम आधिकारिक अनुशासन’ की एक बड़ी बहस में तब्दील हो चुका है, जहां इंटरनेट यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। एक धड़ा देश सेवा में घायल हुई महिला अधिकारी के समर्थन में खड़ा है, तो दूसरा धड़ा प्रदर्शनकारी युवाओं को ‘कीड़े-मकौड़े’ समझने वाली सामंतशाही मानसिकता की कड़े शब्दों में निंदा कर रहा है।

विद्यार्थियों और जवानों के लिए मिसाल

सोनिया सहरावत की यह घटना उन सभी युवाओं और विशेषकर जवानों के लिए एक मिसाल बन सकती है, जो सोशल मीडिया का सही उपयोग करना चाहते हैं। इस पोस्ट से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्ति की पहचान और पेशेवर जिम्मेदारियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। ऐसे में यह सही समय है जब युवा खुद को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से अवगत कर लें।

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