पाक के कब्जे वाले कश्मीर में सुरक्षा बलों का तांडव: हर आवाज को दबाने का आरोप

The CSR Journal Magazine
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्य सरदार शब्बीर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) में सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और कई लोग हिंसा का शिकार हो रहे हैं। उनकी अपील है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समस्या की गंभीरता को समझे।

बढ़ता हुआ दबाव और प्रदर्शनकारियों पर दमन

शब्बीर ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर जुल्म ढा रहे हैं। उनकी कोशिश है कि कोई भी फिर से सरकार के खिलाफ आवाज न उठा सके। हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि रावलाकोट में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे लोगों पर सुरक्षा बलों ने गंभीर कार्रवाई की। इसमें बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल करते हुए आंसू गैस के गोले चलाए गए। इस दौरान कई लोग घायल हुए और कुछ की जान भी गई।

कोटली में अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत

कोटली में हालात और भी खराब हो गए। छम चौंधियां और भीमबर से आए प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं। उनके अनुसार, घायल लोगों को अस्पताल ले जाने पर भी सुरक्षा बल वहां पहुंच गए और उन्होंने अस्पताल में मौजूद डॉक्टर एवं अन्य लोगों पर फायरिंग की। इस घटनाक्रम में डॉ. एहसान समेत एक प्रोफेसर और एक महिला को भी गोली लगी।

कोटली में मौतों की संख्या बढ़ी

सरदार शब्बीर ने कहा कि कोटली में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। JAAC नेता ने स्पष्ट किया कि पूरे पीओजेके में दमन और डर का माहौल बना हुआ है। हर क्षेत्र की जनता सुरक्षा बलों की कार्रवाई से परेशान है। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अपील की है कि वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं।

पाकिस्तान की कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान चाहिए

JAAC के सदस्य सरदार शब्बीर ने कहा कि यह स्थिति केवल क्षेत्र की नहीं, बल्कि मानवाधिकार का भी सवाल है। उन्होंने दुनिया भर में रह रहे कश्मीरियों से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की है। उनके शब्दों में, “हमें इस दमन को रोके जाने की जरूरत है।” उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

कश्मीरियों की आवाजें नहीं दब सकतीं

यह घटनाएं दिखाती हैं कि कश्मीर में लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश जारी है। सुरक्षा बलों के ऐसे कृत्यों को रोकना जरूरी है। अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों के मानवाधिकार संगठनों को इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाने की आवश्यकता है।

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