6500 में से सिर्फ 3 कश्मीरी परिवार ने की घाटी में वापसी, जानें क्या है वजह?

The CSR Journal Magazine
कश्मीर घाटी में लौटने की चाह रखने वाले कश्मीरी प्रवासियों की संख्या बढ़ती जा रही है। हाल ही में एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि 6,510 परिवारों ने अपने घर वापस लौटने की इच्छा जताई थी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से सिर्फ 3 परिवार ही वहां स्थायी रूप से बस पाए हैं। इस स्थिति ने समुदाय में चिंताओं को जन्म दिया है और यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अन्य परिवार लौटने से क्यों कतराते हैं।

सुरक्षा और सुविधाओं की कमी

रिपोर्ट के अनुसार, जिन कारणों से कश्मीरी प्रवासी परिवार वापस लौटने से हिचकिचा रहे हैं, उनमें मुख्य रूप से सुरक्षा, घर, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक चिंताएं शामिल हैं। संसदीय समिति ने कश्मीर में स्थितियों का सही आकलन करने की सिफारिश की है। इस दौरान, परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जमीनी हालात का जायजा लेना महत्वपूर्ण है।

रिहैबिलिटेशन पैकेज पर सवाल

कश्मीर के बाहर रहने वाले प्रवासी परिवारों के लिए रिहैबिलिटेशन पैकेज की उचित समीक्षा करनी चाहिए, ताकि एक सुरक्षित और सम्मानित वापसी संभव हो सके। लेकिन सरकार ने इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाई है, यह देखने वाली बात होगी। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया है कि इन परिवारों ने कब वापस लौटने की इच्छा जताई थी।

योजना में सुधार की आवश्यकता

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आयोजित की गई एक बैठक में बताया कि प्रवासी कश्मीरी लोगों की रिहैबिलिटेशन और सम्मानजनक वापसी के लिए वित्तीय मदद दी जाएगी। इसके तहत प्रति परिवार 10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रस्तावित की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है, लेकिन वास्तविकता में इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

जन जागरूकता और समाज का सहयोग

समाज के विभिन्न तबकों को इस मुद्दे पर संवेदनशील बनाना आवश्यक है। समुदाय के भीतर जागरूकता बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि प्रवासी परिवारों को अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने का मौका दिया जाए। कश्मीर में मिल-जुलकर रहने वाले परिवारों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे एक-दूसरे के साथ जुड़ें और अपने अनुभव साझा करें।

क्या हैं भविष्य की योजनाएं?

संसदीय समिति की रिपोर्ट ने प्रशासन से यह आग्रह किया है कि वे लौटने की इच्छा व्यक्त करने वाले परिवारों को उनकी जरूरतों के हिसाब से रिहैबिलिटेशन की योजना बनाएं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, क्या सरकार जल्द ही उचित कदम उठाएगी? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है, लेकिन सभी की नजरें इस दिशा में हैं।

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