लोकसभा में TMC के बागी सांसदों के NCPI में विलय की प्रक्रिया शुरू, छानबीन में जुटी समिति, एक हफ्ते में होगा फैसला
लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की याचिका पर आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। लोकसभा सचिवालय की एक आंतरिक समिति इस याचिका और सौंपे गए दस्तावेजों की बारीकी से छानबीन कर रही है। इस पूरी जांच और विलय की प्रक्रिया को अगले 5 से 7 दिनों (एक हफ्ते) के भीतर पूरा करने की संभावना जताई गई है।
बागी सांसदों का अनोखा कदम
TMC के बागी सांसदों ने 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने हाल ही में पार्टी NCPI में विलय की याचिका दायर की है। यह संख्या दो तिहाई से अधिक है, जिससे उनकी लोकसभा सदस्यता सुरक्षित रहने की संभावना बढ़ गई है। स्पीकर ओम बिरला के अनुमोदन से इस विलय को मान्यता मिल सकती है। पश्चिम बंगाल चुनाव में पराजय के बाद टीएमसी गंभीर संकट का सामना कर रही है, और यह घटनाक्रम पार्टी के भविष्य पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
विलय प्रक्रिया और बागियों की संख्या
कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी सांसदों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल पार्टी से अलग होने का फैसला किया है। सुदीप बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाले इस बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर पत्र सौंपा और केंद्र में NDA सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है। संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों का किसी अन्य दल में विलय जरूरी है। 28 में से 20 सांसद होने के कारण यह संख्या दो-तिहाई से अधिक बैठती है।
विलय प्रक्रिया की गति
रविवार को टीएमसी के बागी सांसदों ने एक अदृश्य पार्टी एनसीपीआई में विलय का ऐलान किया। इसके कुछ ही घंटों बाद लोकसभा सचिवालय ने इस प्रक्रिया पर काम करना शुरू कर दिया। सूत्रों का कहना है कि अगले 5 से 7 दिनों में पूरी प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है, और समिति इसकी छानबीन कर रही है। इसमें कानूनी विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो इस मामले की जटिलताओं को समझने में मदद करेंगे।
दो-तिहाई का महत्व
टीएमसी के बागी सांसदों को एनसीपीआई में विलय के लिए दो-तिहाई संख्या की आवश्यकता है। इस संदर्भ में, 10वीं अनुसूची के पैरा 4 (2) के अनुसार, यदि कोई राजनीतिक दल किसी अन्य पार्टी में विलय करता है, तो उसके सदस्यों की सदस्यता सुरक्षित रहती है। अब स्पीकर ओम बिरला इस याचिका पर समिति की रिपोर्ट आने के बाद फैसला करेंगे।
बदल सकती है बैठने की व्यवस्था
इस बीच, बागी सांसदों की लोकसभा में बैठने की जगह भी बदल सकती है। वर्तमान में, वे विपक्षी बेंचों पर बैठे हैं, लेकिन एनसीपीआई के समर्थन के बाद उनकी व्यवस्था सत्ता पक्ष के बेंच पर हो सकती है। इससे लोकसभा में उनकी स्थिति और मजबूत होगी।
TMC का जवाबी हमला
TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र लिखकर इस अलग हुए गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि कानून किसी राजनीतिक दल के इस तरह टुकड़ों में बंटने को मान्यता नहीं देता और मूल राजनीतिक दल का विलय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों का यह कदम पार्टी के हितों के खिलाफ है। इस बीच, सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि बागी गुट अपनी पहचान को बनाए रखने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार है।
NCPI में अंदरूनी कलह
जिस नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की बात कही जा रही है, उसकी संस्थापक अध्यक्ष श्वेली कुंडू और एक अन्य पदाधिकारी शांतनु डे के बीच इस विलय और दावों को लेकर आपसी विवाद भी शुरू हो गया है। लोकसभा स्पीकर ने दोनों पक्षों को सुनने की प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने टीएमसी नेतृत्व को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है
कानूनी लड़ाई की तैयारी
बागी गुट ने आरोप लगाया है कि वे असली तृणमूल कांग्रेस हैं और वे पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए दावा भी पेश करेंगे। काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि 20 सांसदों ने स्पीकर को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने अलग गुट के रूप में मान्यता की मांग की है। इसके तहत वे एनसीपीआई का समर्थन करेंगे, जो एनडीए का हिस्सा है। समिति की छानबीन पूरी होने और लोकसभा स्पीकर के अंतिम फैसले के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इन बागी सांसदों को संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता मिलती है या उन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा।
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