UP गरीबों के बैंक खातों से खेला 5 करोड़ की साइबर ठगी का खेल, 4 कॉलेज छात्र गिरफ्तार; लैपटॉप-कार बरामद

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में साइबर ठगी के एक बड़े मामले ने पुलिस को भी हैरान कर दिया। पुलिस ने चार कॉलेज छात्रों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को जमा करने और निकालने के लिए किया। पुलिस के मुताबिक, करीब चार साल में इन खातों के जरिए लगभग 5 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई। आरोपित गांवों में जाकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। उन्हें खाता खुलवाने के बदले ₹5,000 देने के साथ आवास, वृद्धा पेंशन और लोन जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच दिया जाता था। लोग उनके झांसे में आकर बैंक खाते खुलवा लेते थे।

50 से ज्यादा खातों में आता था ठगी का पैसा

पुलिस के अनुसार, खाते खुलवाने के बाद आरोपित खाताधारकों से उनके ATM कार्ड, पासबुक और चेकबुक अपने पास रख लेते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने मिर्जापुर में एक्सिस बैंक, ICICI बैंक, बंधन बैंक और HDFC बैंक में कई खाते खुलवाए। बताया गया है कि ऐसे 50 से अधिक खाते पुलिस की जांच के दायरे में हैं। इन खातों में दूसरे साइबर ठगों से ठगी की रकम भेजी जाती थी और बाद में उसे निकाल लिया जाता था।

चारों आरोपित कॉलेज के छात्र

पुलिस जांच में चार युवकों के नाम सामने आए। इनमें आशीष सिंह, कपिल देव भारद्वाज उर्फ मोनू, युवराज सिंह उर्फ राजा और आदर्श सिंह उर्फ मोनू शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, आशीष सिंह, कपिल देव भारद्वाज और युवराज सिंह चुनार क्षेत्र के डिग्री कॉलेजों में बीए और बीकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं आदर्श सिंह दिल्ली के एक कॉलेज से डी-फार्मा की पढ़ाई कर रहा है। यानी जिन युवाओं से पढ़ाई कर अपना भविष्य बनाने की उम्मीद थी, पुलिस के अनुसार वे साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़कर लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करने लगे।

बैंक के फोन से खुला साइबर ठगी का राज

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ खाताधारकों के बैंक खातों में बड़ी रकम का लेनदेन होने लगा। जिन लोगों के खाते इस्तेमाल किए जा रहे थे, उन्हें खुद इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके खातों से हर महीने लाखों रुपये का लेनदेन हो रहा है। पुलिस के मुताबिक, कई खातों में एक महीने में 15 से 20 लाख रुपये तक का लेनदेन हुआ। बैंक की ओर से जब खाताधारकों को फोन कर रकम के स्रोत के बारे में पूछा गया तो वे कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। इसके बाद शक गहराया और मामले की शिकायत की गई।

साइबर सेल की जांच में सामने आए आरोपित

बैंक की शिकायत के बाद साइबर सेल के NCRB पोर्टल पर जानकारी सामने आई। इसके आधार पर साइबर थाने में 7 अगस्त को अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की जांच के लिए पुलिस की तीन टीमें बनाई गईं। जांच आगे बढ़ी तो चारों आरोपितों के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने उभरिया डिग्री कॉलेज के पास से चारों को गिरफ्तार कर लिया।

लैपटॉप, मोबाइल और बैंक दस्तावेज बरामद

पुलिस ने आरोपितों के पास से साइबर ठगी से जुड़े कई सामान बरामद किए हैं। इनमें दो लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, एक CPU, नौ चेकबुक, ATM कार्ड, सात पासबुक, नौ आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस और एक चार पहिया वाहन शामिल है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कितने लोगों से ठगी की रकम मंगाई गई और इस नेटवर्क में मीरजापुर के अलावा दूसरे जिलों या राज्यों के कितने लोग जुड़े हुए हैं।

आगे क्या?

मिर्जापुर का यह मामला बताता है कि साइबर ठग अब सीधे लोगों को फोन करके ही नहीं, बल्कि उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करके भी ठगी का नेटवर्क चला रहे हैं। ₹5,000 या किसी सरकारी योजना के लालच में अपना बैंक खाता, ATM, पासबुक या चेकबुक किसी दूसरे व्यक्ति को देना भारी पड़ सकता है। पुलिस की जांच में आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम के पूरे रास्ते का पता चलने की उम्मीद है।

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